प्रचार-प्रसार की कमी के चलते उत्तराखंड के लोगों तक नहीं पहुंच पाती फिल्में

चिल्ड्रेन फिल्म सोसाइटी की तरफ से साल 2016 में बनाई गई फिल्म 'पिन्टी का साबुन' की 80 प्रतिशत शूटिंग उत्तराखण्ड में हुई, लेकिन उत्तराखंड के लोग ये फिल्म नहीं देख पाए.

News18 Uttarakhand
Updated: July 28, 2018, 4:31 PM IST
प्रचार-प्रसार की कमी के चलते उत्तराखंड के लोगों तक नहीं पहुंच पाती फिल्में
सांकेतिक तस्वीर.
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Updated: July 28, 2018, 4:31 PM IST
फिल्म मेकर्स की पसंद उत्तराखण्ड बन चुका है. साउथ से  लेकर बॉलीवुड की फिल्में यहां शूट की जा रही हैं. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 80 लाख के बजट की चिल्ड्रेन फिल्म सोसाइटी की तरफ से साल 2016 में बनाई गई फिल्म 'पिन्टी का साबुन' की 80 प्रतिशत शूटिंग उत्तराखण्ड में हुई, लेकिन उत्तराखंड के लोग ये फिल्म नहीं देख पाए. पिछले 17 सालों में CFSI (CHILDREN FILM SOCIETY OF INDIA) द्वारा बनाई गई 69 फिल्मों के रिकॉर्ड का खुलासा आरटीआई के तहत हुआ.

आरटीआई एक्टिविस्ट राजू गुंसाई ने उत्तराखण्ड में शूट हुई फिल्म 'पिन्टी के साबुन' का निर्माण कार्य पूरा हुआ या नहीं जब इस संबंध में जानकारी मांगी तो कई चौकाने वाले आंकड़े सामने आये हैं. दरअसल फिल्म जुलाई 2016 में ही पूरी हो चुकी है और 9 फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा चुकी है, लेकिन आज तक फिल्म की मात्र 7 डीवीडी बिकी, यानि फिल्म के सभी कलाकारों को ही फिल्म देखना नसीब नहीं हुआ.

फिल्म निर्माता उत्तराखण्ड को साफ्ट टारगेट के तौर पर देख रहे हैं. लोकल प्रोडक्शन हाउस से सहयोग तो लिया जाता है, लेकिन उसे तरजीह नहीं दी जाती है. फिल्म को न तो सोशल साइट पर डाला जा रहा है न ही किसी और फॉरमेट में फिल्म दिखाई जा रही है. प्रचार-प्रसार की कमी के चलते फिल्म लोगों की पहुंच से दूर होकर डब्बा बंद तक हो रही है.

फिल्म को बनाने में कई लोगों की मेहनत लगती है. ऊपर से बच्चों के लिए बनाई जा रही फिल्म जब बच्चों को ही देखने को नसीब न हो तो ऐसी फिल्मों को बनाने का औचित्य क्या है. फिल्म फेस्टिवल में फिल्म  दिखाकर मोटा मुनाफा तो निर्माता अपनी जेब में रख लें और लोकल लोगों को ही इसका लाभ न मिले तो सवाल उठने लाजमी हैं.

(रिपोर्ट - भारती सकलानी)
First published: July 28, 2018, 4:31 PM IST
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