उत्तराखंड में ई-व्हीकल्स... ट्रायल तो ठीक लेकिन पहाड़ में पहुंचना अभी आसान नहीं

ई-बस में चार्जिंग को लेकर दिक्कतें आई थीं. सचिवालय में भी दो ई-कार ट्रायल पर लाई गई थीं लेकिन वह भी बंद ही पड़ी हैं.

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: June 20, 2019, 7:04 PM IST
उत्तराखंड में ई-व्हीकल्स... ट्रायल तो ठीक लेकिन पहाड़ में पहुंचना अभी आसान नहीं
रुद्रप्रयाग में ई-रिक्शा के ट्रायल के बाद पहाड़ों में ई-व्हीकल पहुंचने की संभावना एक बार फिर चर्चाओं में आ गई है.
Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: June 20, 2019, 7:04 PM IST
रुद्रप्रयाग में बुधवार को ई-रिक्शा का ट्रायल किया गया है. हालांकि अभी इसकी सफलता या असफलता को लेकर कुछ कहा नहीं जा रहा है क्योंकि यह फैसला एक समिति को करना है जिसमें ARTO समेत कई अधिकारी शामिल हैं. फिर भी इस ट्रायल के बाद पहाड़ों में ई-व्हीकल पहुंचने की संभावना एक बार फिर चर्चाओं में आ गई है. राज्य की परिवहन आयुक्त इस पर जल्दबाज़ी में कोई टिप्पणी न करने की बात कह रही हैं तो परिवहन मंत्री को इस प्रयोग से राज्य में नई राह खुलने की उम्मीद बंधी है.

ट्रायल 

केंद्र सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश में सिर्फ़ ई-व्हीकल्स चलाने का है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए देश के पास 10 साल का समय बचा है और अभी ज़मीन पर इसकी तैयारियां नज़र नहीं आ रही हैं. उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में तो यह काम और भी मुश्किल नज़र आता है क्योंकि खड़ी चढ़ाई पर ई-व्हीकल के चढ़ने को लेकर संदेह बना हुआ है.

बुधवार को रुद्रप्रयाग में एक ई-रिक्शा का ट्रायल किया गया. यह ई-रिक्शा बाज़ार में भी चला और पहाड़ की चढ़ाई भी चढ़ा. स्थानीय निवासी और अधिकारी इसे लेकर उत्साहित भी नज़र आए क्योंकि इससे पहले 2017 में किया गया एक ट्रायल सफल नहीं रहा था. हालांकि रुद्रप्रयाग में अधिकारी अभी कुछ कहने को तैयार नहीं हैं सिर्फ़ उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने की ही बात कर रहे हैं.

पहाड़ में ई-रिक्शा मुश्किल 

लेकिन देहरादून में अधिकारी इस ट्रायल को लेकर बहुत उत्साहित नज़र नहीं आ रहे. परिवहन आयुक्त सुनीता सिंह कहती हैं कि अभी तक मौजूद ई-व्हीकल्स की क्षमता को देखते हुए पहाड़ों पर ई-व्हीकल्स को मंज़ूरी नहीं दी जा रही है. दरअसल अगर पहाड़ की चढ़ाई पर ई-रिक्शा नहीं चढ़ पाया तो दुर्घटना हो सकती है और ज़्यादातर मौजूदा ई-रिक्शा इतने पावरफ़ुल नहीं कि वह वजन लेकर आराम से पहाड़ चढ़ जाएं.

सुनीता सिंह कहती हैं कि जिस ई-रिक्शा का ट्रायल किया गया है वह कैसा, उसकी क्षमता क्या है और ट्रायल कैसा रहा? इन सवालों का जवाब वह ट्रायल कमेटी की रिपोर्ट देखने के बाद ही दे पाएंगी.
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राज्य के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य रुद्रप्रयाग के प्रयोग का स्वागत करते हैं. वह कहते हैं कि देश में ई-व्हीकल चलाने के केंद्र के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य भी कोशिश कर रहा है. देहरादून-मसूरी और हल्द्वानी-नैनीताल के बीच ई-बस का ट्रायल भी इसी उद्देश्य से किया गया था, जिसका अच्छा रिस्पॉंस मिला था.

ई-बस के टेंडर जल्द 

यशपाल आर्य बताते हैं कि अब राज्य सरकार ई-बस के लिए टेंडर करने जा रही है और अगर कंपीटीटिव टेंडर आते हैं तो इस सेवा का विस्तार भी किया जाएगा. वह रुद्रप्रयाग के प्रयोग को भी इसी दिशा में की गई पहल बताते हैं और कहते हैं कि साफ़ परिवहन व्यवस्था को पहाड़ पर पहुंचाने की कोशिशें जारी रहेंगी.

हालांकि राज्य में ई-व्हीकल की चलाने की राह आसान नहीं है. जिस ई-बस की बात यशपाल आर्य कर रहे हैं उसमें भी चार्जिंग को लेकर दिक्कतें आई थीं. सचिवालय में भी दो ई-कार ट्रायल पर लाई गई थीं लेकिन चार्जिंग स्टेशन के अभाव में वह भी बंद ही पड़ी हैं. राज्य को अगर ई-व्हीकल लागू करने की दिशा में सचमुच आगे बढ़ना है तो उसे चार्जिंग स्टेशन्स, चार्जिंग पॉएंट्स बनाने पर काम करना होगा. गाड़ियां तो प्राइवेट कंपनियां बना ही रही हैं.

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First published: June 20, 2019, 7:04 PM IST
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