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Lockdown: खेती से चार गुना ज्यादा होगी कमाई और सरकार भी करेगी मदद, जानें क्या करना होगा

fishing, angling, मत्स्य पालन में काम करने के इच्छुक लोगों को न सिर्फ़ विभाग इन सबकी जानकारी देता है बल्कि ट्रेनिंग और काम शुरु करने के लिए वित्त प्रबंधन में भी मदद करता है.

fishing, angling, मत्स्य पालन में काम करने के इच्छुक लोगों को न सिर्फ़ विभाग इन सबकी जानकारी देता है बल्कि ट्रेनिंग और काम शुरु करने के लिए वित्त प्रबंधन में भी मदद करता है.

Lockdown: मत्स्य पालन की विभिन्न योजनाओं में विभाग की ओर से अनुदान भी दिया जाता है जो 50 फ़ीसदी तक है. मत्स्य विभाग की वेबसाइट से आपको सारी जानकारी मिल जाएगी.

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देहरादून. देश भर की तरह उत्तराखंड में भी लाखों की संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी अपने घरों को लौट रहे हैं. अब तक सरकार को ढाई लाख प्रवासी वापस आने के लिए आवेदन दे चुके हैं और इनमें से डेढ़ लाख से ज़्यादा लौट भी चुके हैं. अभी तो कोरोना (COVID-19) का डर खड़ा है लेकिन इसके साथ ही लोगों को यह भी चिंता सता रही है कि घर तो लौट आए हैं यहां करेंगे क्या? चिंताजनक बात यह भी है कि ये प्रवासी उत्तराखंडी बाहर जहां भी काम करते थे वहां भी हालत जल्दी सुधरने की संभावना नहीं है. हम बता रहे हैं एक ऐसा काम जिसे लोग अपने गांवों-घरों में आसानी से कर सकते हैं और खेती की तुलना में इसमें चार गुना तक कमाई हो सकती है. यह काम है मत्स्य पालन.

50 फ़ीसदी तक अनुदान भी 

उत्तराखंड मस्त्य विभाग के संयुक्त निदेशक एचके पुरोहित बताते हैं कि विभाग अलग-अलग भौगोलिक परिस्थतियों के अनुरूप अलग-अलग तरह की योजनाएं चलाता है. मत्स्य पालन में काम करने के इच्छुक लोगों को न सिर्फ़ विभाग इन सबकी जानकारी देता है बल्कि ट्रेनिंग और काम शुरू करने के लिए वित्तीय प्रबंधन में भी मदद करता है.

मत्स्य पालन की विभिन्न योजनाओं में विभाग की ओर से अनुदान भी दिया जाता है जो 50 फ़ीसदी तक है. पुरोहित बताते हैं कि पारंपरिक खेती की तुलना में ज़मीन, मेहनत और निवेश के अनुपात में चार गुना तक कमाई हो सकती है. अभी चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के पैदा होने वाली मछलियों की खपत स्थानीय स्तर पर ही हो जाती है. विभाग अब इस उत्पाद को शहरों तक पहुंचाने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग का नेटवर्क भी तैयार कर रहा है.

fishrie trout farming, मत्स्य विभाग 4000 मीटर से ऊंचाई वाले इलाक़ों में ट्राउट पालन को बढ़ावा दे रहा है.
मत्स्य विभाग 4000 मीटर से ऊंचाई वाले इलाक़ों में ट्राउट पालन को बढ़ावा दे रहा है.


ट्राउट पालन, ज़रूरत और कमाई  

मत्स्य विभाग 4000 मीटर से ऊंचाई वाले इलाक़ों में ट्राउट पालन को बढ़ावा दे रहा है. ट्राउट पालन के लिए व्यक्तिगत के बजाय को-ओपरेटिव मत्स्यपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. पुरोहित बताते हैं कि इसके लिए को-ओपरेटिव सोसायटी के पास 25-30 नाली पक्की ज़मीन, पानी की उपलब्धता और काम करने वाले लोग होने चाहिएं. इन सब ज़रूरतों को पूरा करने वाली को-ओपरेटिव सोसायटी को 50 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है.

ट्राउट मछली को तालाब के बजाय रेसवे में पाला जाता है. ये रेसवे 25 मीटर लंबे, दो मीटर चौड़े और एक मीटर गहरे होते हैं. अमूमन एक साथ 20-25-30 रेसवे एक साथ बनाए जाते हैं. 8-9 महीने में एक रेसवे से एक टन से ज़्यादा ट्राउट मछली का उत्पादन हो जाता है.

कमाई की बात करें तो 10-11 लोगों की कोऑपरेटिव सोसायटी को 25 लाख तक की कमाई साल भर में हो जाती है. इसके अलावा फ़िश फ़ार्मिंग पर काम करने वालों को वेतन तो मिलता ही है.

fishrie fish farming, उत्तराखंड मे पानी भरपूर है और मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं.
उत्तराखंड मे पानी भरपूर है और मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं.


अपार संभावना हैं, यहां से लें पूरी जानकारी

उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों के मामले में बेहद समृद्ध है और पानी तो यहां भरपूर है. 1,000 से ज़्यादा छोटी-बड़ी नदियों वाले उत्तराखंड में चाल-खाल, तालाब बनाकर, वर्षा जल का संरक्षण कर मत्स्य पालन के लिए पानी मिल सकता है. मत्स्य पालन को गंभीरता से लिया जाए तो यह बड़ी संख्या में रोज़गार देने की क्षमता रखता है.

मत्स्य विभाग की वेबसाइट fisheries.uk.gov.in पर आपको ज़रूरत की सारी जानकारी मिल सकती है. आप विभाग के ज़िला कार्यालय से भी बात करके जानकारी ले सकते हैं. ट्राउट पालन की तरह ही विभाग कई तरह की योजनाएं चला रहा है जिनसे अपने गांव-घर में ही स्वरोज़गार शुरु कर और अच्छी कमाई की जा सकती है.

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