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पता ही नहीं कितनी किताबें छपनी हैं, कैसे NCERT किताबें सबको देगा शिक्षा विभाग

पता ही नहीं कितनी किताबें छपनी हैं, कैसे NCERT किताबें सबको देगा शिक्षा विभाग

इसी तरह कॉलेज में किसी समारोह या सीखने के लिए उन्हें गिटार या अन्य संगीत का सामान या खेलकूद के लिए क्रिकेट बैट या टेनिस रैकेट, कंप्यूटर टेबल-कुर्सी की जरूरत भी कुछ दिन के लिए होती है.

इसी तरह कॉलेज में किसी समारोह या सीखने के लिए उन्हें गिटार या अन्य संगीत का सामान या खेलकूद के लिए क्रिकेट बैट या टेनिस रैकेट, कंप्यूटर टेबल-कुर्सी की जरूरत भी कुछ दिन के लिए होती है.

    सरकार ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करने के साथ ही अगले शैक्षणिक सत्र से सीबीएससी बोर्ड के स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों को लागू करने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही स्कूलों में बुक बैंक स्थापित करने का भी आदेश जारी किया है.

    लेकिन जैसे-जैसे नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के दिन नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि कैसे सरकार प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले हर छात्र तक किताब पहुंचाएगी. दरअसल शिक्षा विभाग के एनसीईआरटी की पुस्तकों की छपाई के लिए टेंडर जारी करने के बाद भी विभाग के आला अफसर इस सवाल पर ख़ामोश हैं कि विभाग कितनी पुस्तकें सीबीएससी बोर्ड के छात्रों के लिए छपवाने जा रहा है.

    शिक्षा विभाग के पुख्ता सूत्रों की मानें तो विभाग के पास ऐसा आंकड़ा ही नहीं है, जिसके हिसाब से विभाग सीबीएससी बोर्ड के स्कूलों के लिए पुस्तकें छपवाए. बस विभाग के पास आंकड़ा है तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए किताब छपवाने का. क्योंकि विभाग ने दो तरह से पुस्तकें छपवाने के लिए टेंडर जारी किए हैं.

    सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे छात्रा के लिए शिक्षा विभाग को पुस्तकें मुहैया कराना ही होगा,वहीं सीबीएससी बोर्ड के स्कूलों में कैसे एनसीईआरटी की पुस्तके लागू होंगी ये अपने आप में एक सवाल बना हुआ है.

    शिक्षा विभाग का तर्क है कि ज्यादातर स्कूल सीधे एनसीईआरटी से ही पुस्तकें खरीदने के लिए आवेदन कर चुके हैं और ऐसा कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है, जिसके अनुसार विभाग सीबीएससी बोर्ड के उन बचे हुए स्कूलों के छात्रों के लिए आंकड़ों के हिसाब से किताब छपवाए जिन्होंने एनसीईआरटी में किताबों के लिए आवेदन नहीं किया है.

    पसोपेश इस बात की है कि आखिर उन स्कूलों को किताब कहा से मिलेंगी, जिन्हें सरकार के दबाव में एनसीईआरटी की पुस्तकें चलवानी है और यही स्थिति रही तो तय है कि अप्रैल में अभिभवको को अपने बच्चों के लिए किताब के लिए भटकना पड़ेगा क्योंकि बाजार में किताब मिलेंगी नहीं.

    सवाल शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय के दावे को लेकर भी है कि फरवरी महीने के पहले सप्ताह तक किताबें बाज़ार में उपलब्ध हो जाएंगीं. लेकिन जो सुस्त रवैया, पुस्तकों की छपवाई के लिए चल रहा है उसे देखकर लगता है कि अप्रैल महीने के पहले सप्ताह में भी शायद पर्याप्त मात्रा में स्कूलों में किताबे पहुंचें.

    हालांकि इस आधू-अधूरी तैयारी के बावजूद शिक्षा विभाग दावा कर रहा है कि समय रहते पुस्तकें छात्रों को उपलब्ध हो जाएंगीं.

    (देहरादून से मनीष डंगवाल की रिपोर्ट)

    Tags: Arvind pandey

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