मन न करे तो उपभोक्ताओं की शिकायत भी नहीं सुनी जाती इस ‘ऊर्जा प्रदेश’ में

रविवार को बिजली जाने पर ज़्यादातर जगह स्थानीय सब स्टेशनों के फ़ोन बिज़ी रहे और दोनों टोल फ़्री नंबर बंद हो गए. ऐसे में उपभोक्ता शिकायत करे तो कहां?

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: June 5, 2019, 6:53 PM IST
 मन न करे तो उपभोक्ताओं की शिकायत भी नहीं सुनी जाती इस ‘ऊर्जा प्रदेश’ में
उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड
Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: June 5, 2019, 6:53 PM IST
उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश कहा जाता है. दरअसल राज्य के नीति नियंताओं की कल्पना यह थी कि अपनी एक हज़ार छोटी-बड़ी नदियों से राज्य इतनी बिजली पैदा कर लेगा कि वह न सिर्फ़ अपनी ज़रूरतें पूरी कर लेगा बल्कि अन्य बिजली बेचकर कमाई भी कर पाएगा. राज्य में छोटे-बड़े करीब 80 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट हैं. राज्य में बिजली आपूर्ति के लिए ज़िम्मेदार निगम उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) दावा करता है कि राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में 23.30 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली दी जा रही है लेकिन यह दावा निगम मुख्यालय के बाहर ही हवा हो जाता है. राजधानी देहरादून में भी लोग रोज़ बिजली कटौती और वोल्टेज फ़्लक्चुएशन झेल रहे हैं.

आंकड़ों की बाज़ीगरी 

आरटीआई एक्टिविस्ट संजीप गुप्ता कहते हैं कि यूपीसीएल आंकड़ों की बाज़ीगरी में माहिर है. वह 24 घंटे ही नहीं दिन में 26 घंटे बिजली देने का दावा भी कर सकत है जैसे सौभाग्य योजना में एक लाख कनेक्शन फालतू देने का दावा कर दिया था. बाद में पोल खुली तो अधिकारी निचले कर्मचारियों की ग़लती बताकर पल्ला झाड़ने लगे.

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राजधानी देहरादून के ज़्यादातर इलाकों में गर्मी शुरु होती ही रोज़ अघोषित बिजली कटौती शुरू हो गई है. उत्तराखंड में अब घोषित बिजली कटौती या रोस्टिंग लगभग नहीं होती लेकिन छोटी-बड़ी वजहों से अघोषित बिजली कटौती लगातार होती है. इसके अलावा उपभोक्ताओं को वोल्टेज फ़्लक्चुएशन का भी सामना करना पड़ता है हालांकि विभाग इसे आसानी से स्वीकार नहीं करता.

बिजली गई, फ़ोन बंद

उत्तराखंड में बिजली संबंधी किसी भी शिकायत के लिए देश भर में लागू टोल फ़्री नंबर 1912 और 18004190405 हैं, जहां फ़ोन कर उपभोक्ता 24 घंटे शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. लेकिन जब ज़्यादा ज़रूरत हो तो यह भी बंद हो जाते हैं... कम से कम रविवार रात तो ऐसा ही हुआ.
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देहरादून में रविवार रात पावर ट्रांस्मिशन करने वाले निगम पिटकुल का एक ट्रांस्फ़ॉर्मर फुंक गया था और इसकी वजह से आधे से ज़्यादा शहर में बिजली नहीं थी. यूपीसीएल के काम करने के तरीके का अंदाज़ा इसी से लगता है कि ज़्यादातर जगह स्थानीय सब स्टेशनों के फ़ोन बिज़ी रहे और दोनों टोल फ़्री नंबर बंद हो गए. ऐसे में उपभोक्ता शिकायत करे तो कहां? और जब उपभोक्ताओं की शिकायत ही दर्ज नहीं होगी तो यूपीसीएल के 24 घंटे के दावे पर सवाल कैसे खड़े होंगे?

अनुत्तरित सवाल 

यूपीसीएल के एमडी बीसीके मिश्रा और एमडी ऑफ़िस से अटैच चीफ़ इंजीनियर एके सिंह से हमने नीचे लिखे सवालों के जवाब जानने चाहे लेकिन न तो उनके फ़ोन उठे और न ही उन्होंने वाट्सऐप मैसेज के जवाब दिए.

आप भी जानिए ये सवाल...

  • अगर शिकायत करने के यह तीनों नंबर काम न करें तो उपभोक्ता के पास क्या विकल्प हैं? उसे क्या करना चाहिए?

  • जब यूपीसीएल 23.30 और 24 घंटे बिजली देने का दावा करता है तो क्या कल जैसी या औसतन रोज़ होने वाली कटौती और लो-वोल्टेज को गिना जाता है या नहीं?

  • टोल फ़्री नंबर को बंद करने-करवाने, Temporarily Suspend करने-करवाने का अधिकार क्या यूपीसीएल में किसी के पास होता है?


अगर हमें यूपीसीएल से कोई जवाब मिलेगा तो हम उसे ख़बर में ज़रूर शामिल करेंगे.

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First published: June 3, 2019, 7:25 PM IST
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