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उत्तराखंड में महंगी होगी बिजली, मगर किसानों और गरीबों को राहत देगी सरकार

(सांकेतिक तस्वीर)
(सांकेतिक तस्वीर)

Electricity rate news: उत्तराखंड ऊर्जा निगम ने प्रदेश में बिजली की दर बढ़ाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है. प्रस्तावित बढ़ोतरी में किसानों, गरीब परिवारों और हर महीने 100 यूनिट बिजली जलाने वालों को बड़ी राहत दी गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2021, 1:27 PM IST
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देहरादून. उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों में बिजली की दरें (Electricity rate) महंगी हो सकती है. खासकर कॉमर्शियल और औद्योगिक कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को अब बिजली के लिए महंगी कीमत चुकानी पड़ सकती है. वहीं, किसानों, गरीब परिवारों (Farmers/BPL) और जिन घरों में हर महीने 100 यूनिट तक बिजली की खपत होती है, ऐसे उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का ज्यादा भार नहीं पड़ेगा. उत्तराखंड ऊर्जा निगम (UPCL) ने विद्युत नियामक आयोग को जो प्रस्ताव भेजा है, उसके तहत घरेलू बिजली की दरों में 2 प्रतिशत से कम बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है. वहीं, कॉमर्शियल और औद्योगिक कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं पर महंगी बिजली का भार देने का प्रस्ताव है.

ऊर्जा निगम के प्रस्ताव पर गौर करें तो घरेलू बिजली की दर में जहां 1.99 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है, वहीं कॉमर्शियल दरों में 4.05 प्रतिशत, एलटी उद्योगों में 2.5 और उद्योगों की दरों में 5.13 प्रतिशत तक की वृद्धि का प्रस्ताव है. निगम ने नियामक आयोग को जो प्रस्ताव भेजा है, उसमें बिजली की दरों में 4.56 फीसदी बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है. आपको बता दें कि प्रदेश में बिजली की दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव पहले पिछले साल 30 नवंबर तक ही भेजा जाना था. ऐसा न होने पर आयोग ने निगम से बिजली दर बढ़ोतरी का प्रस्ताव 31 दिसंबर तक भेजने को कहा था.

31 दिसंबर तक भी प्रस्ताव न भेजने पर नियामक आयोग ने ऊर्जा निगम के लिए आखिरी तारीख 15 जनवरी तक बढ़ा दी थी. इसके बाद यूपीसीएल ने आनन-फानन में बिजली दरों में वृद्धि का प्रस्ताव आयोग को भेज दिया है. गौरतलब है कि ऊर्जा निगम को बिजली दर में वृद्धि से पहले बोर्ड की बैठक भी बुलानी पड़ती है, लेकिन प्रस्ताव भेजने में हुई अतिरिक्त देरी की वजह से बिना बैठक किए ही इस बार बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग को भेज दिया गया है. इस प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रदेश में जिन उपभोक्ताओं के घरों में हर महीने 100 यूनिट तक बिजली की खपत होती है, उन पर अतिरिक्त भार नहीं डाला गया है. घरेलू बिजली की दरों में भी मामूली बढ़ोतरी की गई है.
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