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पर्यावरणविद बोले, उत्‍तराखंड-हिमाचल के नदी-नालों पर अतिक्रमण से बढ़ रही माल और जनहानि

उत्‍तराखंड और हिमाचल प्रदेश के नदी-नालों पर अतिक्रमण की समस्‍या बढ़ रही है.

उत्‍तराखंड और हिमाचल प्रदेश के नदी-नालों पर अतिक्रमण की समस्‍या बढ़ रही है.

उत्‍तराखंड स्‍पेस एप्लिकेशन सेंटर के चेयरमैन और पर्यावरणविद प्रोफेसर महेंद्र प्रताप सिंह बिष्‍ट का कहना है कि उत्‍तराखंड और हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के अलावा पिछले कुछ सालों से ये आपदाएं ज्‍यादा बढ़ी हैं जिनमें ब्रिज या पुल टूटना, भूस्‍खलन, नदी-नालों में बाढ़ का पानी आने से लोगों के डूबने की घटनाएं, जमीन के धंसने और मकानों के ढहने की घटनाएं आम हो गई हैं.

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    नई दिल्‍ली. उत्‍तराखंड और हिमाचल प्रदेश में आए दिन कुछ न कुछ प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाएं आती रहती हैं. जिसके चलते मालहानि और जनहानि भी हो रही है. इस साल जुलाई से लेकर अभी तक दर्जनों घटनाएं ऐसी हुई हैं जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ है. पर्यावरणविदों का कहना है कि दोनों राज्‍यों में बादल फटने (Cloud Burst), ग्‍लेशियर पिघलने या भूस्‍खलन के अलावा भी एक बड़ी समस्‍या उभर रही है.

    उत्‍तराखंड स्‍पेस एप्लिकेशन सेंटर (USEC) के चेयरमैन और पर्यावरणविद प्रोफेसर महेंद्र प्रताप सिंह बिष्‍ट का कहना है कि उत्‍तराखंड और हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disaster) के अलावा पिछले कुछ सालों से ये आपदाएं ज्‍यादा बढ़ी हैं जिनमें ब्रिज या पुल टूटना, भूस्‍खलन, नदी-नालों में बाढ़ का पानी आने से लोगों के डूबने की घटनाएं, जमीन के धंसने और मकानों के ढहने की घटनाएं आम हो गई हैं.

    प्रो. बिष्‍ट कहते हैं कि पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि दोनों पहाड़ी राज्‍यों में नदियों या नालों के ऊपर बनाए गए पुल और सार्वजनिक परियोजनाओं के आसपास बड़ी संख्‍या में अतिक्रमण की समस्‍या पैदा हुई है. लोग नालों के ऊपर घर बनाकर रह रहे हैं और ऐसा किसी एक जगह पर नहीं है बल्कि अधिकांश हाइवे या रास्‍तों के आसपास हो रहा है. वहीं बारिश के इन चार महीनों में नदी और नालों में जलस्‍तर बढ़ने से बाढ़ के हालात पैदा हो रहे हैं.

    पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि दोनों पहाड़ी राज्‍यों में नदियों या नालों के ऊपर बनाए गए पुल और सार्वजनिक परियोजनाओं के आसपास बड़ी संख्‍या में अतिक्रमण की समस्‍या पैदा हुई है.

    पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि दोनों पहाड़ी राज्‍यों में नदियों या नालों के ऊपर बनाए गए पुल और सार्वजनिक परियोजनाओं के आसपास बड़ी संख्‍या में अतिक्रमण की समस्‍या पैदा हुई है.

    वे कहते हैं कि हाल ही में देहरादून-ऋषिकेश हाइवे (Dehradun-Hrishikesh Highway) के रानीपोखरी में जाखन नदी पर बना 57 साल पुराना मोटर पुल टूटकर बह गया है. जिससे पुल पर मौजूद कार और बाइक सवार सीधे नदी में पहुंच गए और हाइवे पर यातायात भी बंद कर दिया गया. इस हाइवे के आसपास कई सौ मीटर तक मकान बने हुए हैं. ऐसे में किसी भी आपदा के कारण सबसे ज्‍यादा मुसीबत लोगों को यहां से निकालने में आती है. रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के समय से न हो पाने या रास्‍ते की कठिनाइयों के कारण जनहानि भी बढ़ जाती है.

    प्रोफेसर बिष्‍ट कहते हैं कि राज्‍यों में अतिक्रमण को लेकर सरकारों को ध्‍यान देने की जरूरत है. इसके साथ ही लोगों को भी जान को जोखिम में डालकर अतिक्रमण करके घर बनाने से बचना चाहिए. अगर इसी तरह हालात रहे तो प्रकृति के कहर को रोकना मुश्किल हो जाएगा और बड़े स्‍तर पर जन और मालहानि होने से नहीं रोक सकेंगे.

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