शराब कारोबारियों के आगे आबकारी विभाग ने टेके घुटने! ठेकों पर मनमानी जारी... जवाब देने को तैयार नहीं अधिकारी
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शराब कारोबारियों के आगे आबकारी विभाग ने टेके घुटने! ठेकों पर मनमानी जारी... जवाब देने को तैयार नहीं अधिकारी
देहरादून में शराब की दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग की बात करना बेमानी है.

कोरोना की वजह से जब आय के दूसरे स्रोत सूख गए हैं शराब की बिक्री सरकार के लिए बैसाखी बनी हुई है. शराब कारोबारी भी इसे समझ गए हैं.

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देहरादून. शराब को लेकर उत्तराखंड में बड़ा कन्फ़्यूज़न है और इसका असर शराब की दुकानों पर दिखता भी है. उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार शराब कारोबारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर उतर आए और सरकार को उन्हें मनाना पड़ा. दरअसल शराब बिक्री प्रदेश सरकार की आय का बड़ा ज़रिया है और कोरोना की वजह से जब आय के दूसरे स्रोत सूख गए हैं शराब की बिक्री सरकार के लिए बैसाखी बनी हुई है. शराब कारोबारी भी इसे समझ गए हैं इसलिए वह दबाव बना रहे हैं और यह दवाब काम करता नज़र आता है. शराब की दुकानों पर किसी तरह का कोई चेक नज़र नहीं आ रहा. ऐसा लग रहा है कि इन्हें मनमानी करने की खुली छूट दे दी गई है क्योंकि ज़िले से आयुक्त स्तर तक के अधिकारी कुछ कहने को तैयार नहीं हैं.

बड़ा और मुश्किल टार्गेट  

उत्तराखंड में शराब सरकार की आमदनी का बड़ा ज़रिया है. हालत यह है कि इस साल शराब बिक्री से राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य 3600 करोड़ का है. बीते तीन साल में सरकार ने शराब से राजस्व के टार्गेट को डेढ़ गुना से ज़्यादा बढ़ाया है लेकिन टार्गेट कभी पूरा नहीं हो पाया. हालांकि इसके बावजूद सरकार ये टार्गेट हर साल बढ़ाती रही है.



इस साल लॉकडाउन की वजह से शराब की दुकानें भी बंद रही हैं और शराब कारोबारियों को भारी नुक़सान हुआ है. बाकी तो कई वर्गों को सरकार ने छूट दी लेकिन शराब कारोबारियों को नहीं. इसके बाद पहले चेतावनी के बाद 25 जून को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरु कर दी. आबकारी विभाग का ढुलमुल रवैया शायद शीर्ष स्तर पर जारी कन्फ्यूज़न की वजह से रहा इसलिए शराब कारोबारी सिर्फ़ इस बात पर माने की मुख्यमंत्री उनकी मांगों पर विचार करेंगे.



सरकार दोहरे दबाव में है. शराब कारोबारी छूट मांग रहे हैं और उसे राजस्व लक्ष्य पूरा करना है. बहरहाल इस अनिर्णय की स्थिति से कन्फ़्यूज़न है और उसका असर ज़मीन पर नज़र आ रहा है.

wine shop rate list, देहरादून के रिंग रोड और शास्त्री नगर में शराब की दुकानों के बाहर लगी रेट लिस्ट में एक ही ब्रांड के दामों में फ़र्क है.
देहरादून के रिंग रोड और शास्त्री नगर में शराब की दुकानों के बाहर लगी रेट लिस्ट में एक ही ब्रांड के दामों में फ़र्क है.


शराब की दुकानों पर कोई नियम लागू नहीं

शराब की दुकानों पर न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है और न ही शराब बिक्री के नियमों का पालन हो रहा है. एक ही क्षेत्र की तीन शराब की दुकानों में शराब अलग-अलग रेट पर बेची जा रही है. कमाल की बात तो यह है कि दो दुकानों में लगाई गई रेट लिस्ट में भी फ़र्क है और एक ने तो यह लगाने की भी परवाह नहीं की.

आबकारी विभाग लगता है कि कोरोना निद्रा में है. न्यूज़ 18 ने देहरादून के ज़िला आबकारी अधिकारी रमेश चंद्र बंगवाल को तीनों तस्वीरें देते हुए स्थिति के बारे में बताया था लेकिन 24 घंटे बाद भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

हमने आबकारी आयुक्त सुशील कुमार को भी इस बारे में सवाल पूछे लेकिन उनका जवाब नहीं आया. न तो उनसे फ़ोन पर बात हो पाई और न ही उन्होंने वॉट्सऐप पर भेजे गए सवालों का जवाब दिया. अगर विभाग की तरफ़ कोई जवाब आता है तो हम उसे ज़रूर पब्लिश करेंगे.

wine shop, aara ghar, dehradun, देहरादून के आराघर में शराब की दुकान ने तो रेट लिस्ट लगाने की ज़रूरत भी नहीं समझी. शिकायत करने पर ज़िला आबकारी अधिकारी चुप्पी साध गए.
देहरादून के आराघर में शराब की दुकान ने तो रेट लिस्ट लगाने की ज़रूरत भी नहीं समझी. शिकायत करने पर ज़िला आबकारी अधिकारी चुप्पी साध गए.


'पता था घुटने टेकेगी सरकार'

कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने एक ख़बर पर बात करते हुए न्यूज़ 18 को कहा था कि इस सरकार ने धार्मिक-साहसिक-प्राकृतिक पर्यटन, बागवानी, ऑर्गेनिक खेती जैसे राजस्व के वैकल्पिक स्रोतों पर विचार ही नहीं किया. सरकार शराब और खनन से अधिक से अधिक पैसा कमाने की कोशिश में लगी रही. इसी का नतीजा है कि शराब के व्यापारियों की लॉबी इतनी ताकतवर मजबूत हो गई कि वह सरकार को धमकी दे रही है.

धस्माना ने कहा था कि दरअसल शराब व्यापारियों की लॉबी को पता है कि सरकार घुटने टेकेगी क्योंकि सरकार को राजस्व चाहिए. आप सरकार के तीन साल को देखिए... पहले साल सरकार ने मोबाइल वैन में शराब बेची, दूसरे साल सरकार ने दुकानें दुगनी कर दीं. तीसरे साल में जब कोरोना वायरस के चक्कर में जब पूरा देश लॉकडाउन था तब शराब की दुकानें खोलकर सरकार ने जनता की सारी तपस्या की ऐसी-तैसी कर दी.

आबकारी विभाग के अनिर्णय और शराब कारोबारियों की मनमानी को देखते हुए लगता है कि कम के कम विभाग तो घुटने टेक ही चुका है.

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