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EXCLUSIVE: देवस्थानम बोर्ड की वजह से आया कोरोना वायरस संकट! गंगोत्री के रावल बोले, पहले ही चेता दिया था
Dehradun News in Hindi

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: April 8, 2020, 11:30 AM IST
EXCLUSIVE: देवस्थानम बोर्ड की वजह से आया कोरोना वायरस संकट! गंगोत्री के रावल बोले, पहले ही चेता दिया था
गंगोत्री के रावल शिवप्रकाश महाराज ने 10 फरवरी को न्यूज़ 18 से बातचीत करते हुए सनातन धर्म की परंपराओं से छेड़छाड़ पर भारी अनिष्ट की चेतावनी दी थी.

शिवप्रकाश महाराज ने पहले ही सनातन धर्म से छेड़खानी की वजह से आपदा आने की आशंका जताई थी.

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देहरादून. पूरी दुनिया में चुनौती बन गए कोरोना वायरस कोविड-19 की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन है और करोड़ों की संख्या में लोगों की जिंदगियां उथल-पुथल हो गई हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि दिसंबर, 2019 से ही इस भयावह वायरस को लेकर चेतावनी दे दी गई थी लेकिन उत्तराखंड के चार धामों के तीर्थ-पुरोहितों ने पिछले साल नवंबर में ही किसी बड़ी आपदा की चेतावनी दे दी थी. तो क्या कोरोना वायरस उत्तराखंड के चार धामों के प्रबंधन के लिए बनाए गए देवस्थानम बोर्ड की वजह से फैला है? गंगोत्री के रावल कहते हैं कि बिल्कुल ऐसा हो सकता है और साथ ही कहते हैं कि सरकार चाहे तो इसे अब भी टाला जा सकता है.

देवस्थानम बोर्ड गठन 

बता दें कि उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत कैबिनेट ने 27 नवंबर को चार धाम श्राइन बोर्ड के गठन को मंज़ूरी दी थी. इसके अनुसार बोर्ड के दायरे में बदरीनाथ-केदारनाथ और गंगोत्री-यमुनोत्री समेत 51 मंदिर आने थे. चार धामों के तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारियों ने इसका विरोध किया और उन्हें विपक्षी दल कांग्रेस का भी साथ मिला.



लेकिन सदन से सड़क तक विरोध के बावजूद सरकार ने आसानी से विधेयक को पास करा लिया, बस नाम बदलकर चार धाम देवस्थानम बोर्ड कर दिया गया. विधेयक को तुरंत ही राज्यपाल की अनुमति भी मिल गई और यह कानून बन गया. सरकार ने यह भी ऐलान किया कि इस साल यानी 2020 की चार धाम यात्रा का प्रबंधन बोर्ड ही करेगा.



विरोध 

सरकार पर मनमानी का आरोप लगाते हुए चार धाम तीर्थ-पुरोहित और हक-हकूकधारी महापंचायत ने विरोध तेज़  कर दिया था. महापंचायत के आग्रह पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने हाईकोर्ट में केस दायर कर देवस्थानम बोर्ड के गठन को चुनौती भी दे दी है. तीर्थ पुरोहितों ने चार धाम यात्रा के दौरा धार्मिक अनुष्ठान न करवाने का भी ऐलान कर दिया था.

इस सबके बीच गंगोत्री के रावल शिवप्रकाश महाराज उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने कहा कि वह श्रद्धालुओं को चार धाम यात्रा में न आने की सलाह दे रहे हैं और इसकी वजह उन्होंने सनातन धर्म से छेड़खानी की वजह से आपदा आने की आशंका जताई थी.

गंगोत्री रावल की चेतावनी 

गंगोत्री के रावल शिवप्रकाश महाराज ने 10 फरवरी को न्यूज़ 18 से बातचीत करते हुए कहा था, "यह बोर्ड बनाकर सरकार ने धर्म विरुद्ध कार्य किया है और भूलना नहीं चाहिए कि वरुणाव्रत पर्वत के साथ छेड़छाड़ के बाद कैसी आपदा आई थी. 2013 में धारी देवी मंदिर को हटाने की वजह से केदारनाथ में आपदा आई थी और अब जबकि सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के छेड़छाड़ की गई है तो कितनी बड़ी आपदा आएगी इसकी कल्पना ही की जा सकती है."

उसी इंटरव्यू में रावल ने कहा था, "दिल पर पत्थर रखकर उन्होंने कई राज्यों के श्रद्धालुओं से कहा है कि वह अपने घरों में ही सुरक्षित हैं और इस बार उनका गंगोत्री समेत चार धाम आना खतरनाक हो सकता है. सरकार उन्हें प्रकृति के, देवताओं के कोप से तो बचा सकती नहीं लेकिन एक आपदा को उसने निमंत्रण ज़रूर दे दिया है."

'इसलिए आया कोरोना वायरस' 

प्रदेश के धर्मस्व और पर्यटन मंत्री ने सोमवार को कहा कि इस साल चार धाम यात्रा आयोजित करने के बारे में फ़ैसला केंद्र सरकार ही करेगी, यानी चार धाम यात्रा ही खटाई में पड़ सकती है. गंगोत्री रावल शिवप्रकाश महाराज कहते हैं कि उन्होंने नवंबर में ही किसी भारी अनिष्ट की चेतावनी दे दी थी.

तो क्या उत्तराखंड के चार धाम (समेत 51 मंदिर) का प्रबंधन देवस्थानम बोर्ड को सौंपने की वजह से चीन से  कोरोना वायरस संक्रमण फैला होगा?

शिवप्रकाश महाराज कहते हैं, बिल्कुल हो सकता है. सनातन धर्म सिर्फ़ भारत का नहीं है यह तो पूरे विश्व का धर्म है. जब भी कथा-प्रवचन के बाद हम कहते हैं कि 'सनातन धर्म की जय हो' तो उसके बाद यह नहीं कहते कि भारत का कल्याण हो. हमेशा यही कहा जाता है कि 'विश्व का कल्याण हो'. फिर चीन भी तो हिमालय का मुख है, वहां कैलाश मानसरोवर है (हालांकि गूगल मैप के अनुसार वुहान से कैलाश मानसरोवर की दूरी 3100 किलोमीटर से ज़्यादा है).

गंगोत्री के रावल कहते हैं कि वह इस पर तो कोई टिप्पणी नहीं करेंगे कि कोरोना वायरस क्यों फैला लेकिन यह तय है कि जब-जब भी हम सनातन धर्म के साथ खिलवाड़ करते हैं, प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते हैं प्रकृति कुछ न कुछ अपना रूप दिखाती है. केदारनाथ आपदा से पहले वरुणाव्रत पर्वत से छेड़खानी करने के परिणाम भी सबको याद हैं.

'अब भी है संभावना' 

शिवप्रकाश महाराज कहते हैं कि वह अक्टूबर-नवंबर से ही सरकार को चेतावनी दे रहे थे कि वह सदियों पुरानी सनातन धर्म की परंपराओं से छेड़खानी न करे कोई अनिष्ट हो सकता है लेकिन सरकार नहीं मानी. अब भी लाखों लोगों को बचाया जा सकता है.

गंगोत्री के रावल कहते हैं कि अगर सरकार अब भी अपनी गलती मान ले और देवभूमि उत्तराखंड के देवी-देवताओं से माफ़ी मांगकर अपनी गलती सुधार ले तो इस आपदा पर भी काबू पाया जा सकता है. सनातन धर्म बहुत शक्तिशाली है वह इससे भी बड़ी आपदा से बचा सकता है.

ये भी देखें: 

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First published: April 7, 2020, 7:05 PM IST
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