उत्तराखंड में 35 निकायों का हुआ विस्तार, विरोध के बीच 375 गांव होंगे शामिल

satendra bartwal | ETV UP/Uttarakhand
Updated: September 17, 2017, 5:37 PM IST
उत्तराखंड में 35 निकायों का हुआ विस्तार, विरोध के बीच 375 गांव होंगे शामिल
मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत.
satendra bartwal | ETV UP/Uttarakhand
Updated: September 17, 2017, 5:37 PM IST
उत्तराखंड सरकार ने निकायों को तोहफा देकर निकायों का विस्तारीकरण तो कर दिया, लेकिन इस विस्तारीकरण पर अब सवाल उठने लगे हैं. लोगों का कहना है कि सरकार ने विस्तारीकरण में जल्दबाजी दिखाई है और बिना कर्मियों के भला ऐसे में निकायों में विकास कैसे संभव हो सकेगा.

बता दें कि मौजूदा निगम पहले ही अधिकारियों और कर्मचारियों की जबरदस्त किल्लत से जूझ रहे हैं, ऐसे में सरकार के निकायों के विस्तार के फैसले पर अब जनप्रतिनिधि ही सवाल उठा रहे हैं. राज्य सरकार ने 35 निकायों का विस्तारीकरण किया है, जिसमें करीब 375 गाँव अब निकायों से जुड़ जाएंगे.

महत्वपूर्ण बात यह है कि सूबे के अलग-अलग इलाकों में लोग लगातार निकायों में शामिल होने का विरोध भी करते आ रहे हैं. लोगों का कहना है कि नगरपालिका या नगर निगम की सीमा में शामिल होने से उन पर अतिरिक्त करों का बोझ तो पड़ेगा ही, सामान्य कार्यों के लिए भी अधिकारियों की परमिशन की समस्या भी बढ़ जायेगी.

प्रदेश के सबसे बड़े नगर निगम देहरादून के मेयर विनोद चमोली का इस मसले पर कहना है कि जितना महत्वपूर्ण निकायों का विस्तारीकरण करना है, उतना ही महत्वपूर्ण इनमें संसाधनों को जोड़ना भी है. इसके लिए भी सरकार को पहल करनी चाहिए.

हालांकि मामले को लेकर शहरी विकास सचिव राधिका झा ने कहा कि निकायों का विस्तारीकरण होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और रहा सवाल व्यवस्था की कमी का तो इन कमियों को भी दूर किया जायेगा.

मौजूदा स्थिति पर एक नजर:

• प्रदेश में अभी 6 निगम और 39 नगर पालिका 47 नगर पंचायत स्थित हैं.
• राज्य सरकार ने 3 निगमों, 22 नगर पालिकाओं और 10 नगर पंचायतों का विस्तारीकरण किया गया है.
• अभी भी निकायों में करीब 350 स्थाई अधिकारियों की कमी.
• 370 सफाई कर्मचारियों की कमी.
• डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए करीब 600 कर्मचारियों की कमी.
• तकनीकी स्टाफ की भारी किल्लत.
• करीब-120 वाहन चालकों की कमी.
• गाँवों को निकाय में जोड़ने से कई मूलभूत सुविधाएं भी निकायों को देनी पड़ेगी, जिसका सीधा भार बजट पर पड़ेगा.
• सड़क, पेयजल, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट, नालियां, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसी कई बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से सूबे के बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा.
First published: September 17, 2017
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