देश में पहली बार... 32 किलोमीटर दूर PHC से टिहरी अस्पताल तक ड्रोन लाया ब्लड यूनिट

जिस ड्रोन का टिहरी में प्रयोग किया गया उसकी कीमत करीब 10 लाख रुपये पड़ेगी.

Anupam Trivedi | News18 Uttarakhand
Updated: June 7, 2019, 7:36 PM IST
देश में पहली बार... 32 किलोमीटर दूर PHC से टिहरी अस्पताल तक ड्रोन लाया ब्लड यूनिट
भारत में पहली बार ड्रोन से ब्लड यूनिट को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से टिहरी ज़िला अस्पताल तक पहुंचाया गया है.
Anupam Trivedi
Anupam Trivedi | News18 Uttarakhand
Updated: June 7, 2019, 7:36 PM IST
भारत में पहली बार ड्रोन से ब्लड यूनिट को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से ज़िला अस्पताल तक पहुंचाया गया है. टिहरी में दूर-दराज के एक प्राथमिक केंद्र से ज़िला अस्पताल तक ब्लट यूनिट पहुंचाने का यह प्रयोग गुरुवार को सफलतापूर्वक किया गया. जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने में यह एक बड़ा सदम साबित हो सकता है.

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सीडी रोबोटिक्स नाम की एक कंपनी ने टिहरी में गुरुवार को यह डेमो दिया था. सीडी रोबोटिक्स के मालिक आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र निखिल उपाध्याय के अनुसार ड्रोन से ब्लड यूनिट को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का प्रयोग करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य है.

'ज़िलाधिकारी का आइडिया'

टिहरी ज़िला अस्पताल में सीनियर फ़िज़ीशियन डॉक्टर एसएस पांगती कहते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का विचार ज़िलाधिकारी सोनिका का था. डॉक्टर पांगती के अनुसार इससे पहले ज़िलाधिकारी ने ही टेलीमेडिसिन का प्रयोग शुरु किया था.

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डॉक्टर पांगती ने न्यूज़ 18 को बताया,  “हेल्थ प्रोजेक्ट के तहत गुरुवार को नंदग्राम के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से ज़िला अस्पताल तक ड्रोन के ज़रिए एक ब्लड यूनिट को पहुंचाया गया. ज़िला अस्पताल से 32 किलोमीटर दूर नंदग्राम से यह दूरी अमूमन 50-60 मिनट में पूरी होती है लेकिन ड्रोन ने इसे मात्र 18 मिनट में सफलतापूर्वक पार कर लिया.”
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और होंगे प्रयोग 

उन्होंने कहा कि ड्रोन के प्रयोग की व्यवहारिकता को परखने के लिए आने वाले कुछ दिनों में टिहरी में ऐसे ही और प्रयोग किए जाएंगे. निखिल की कंपनी ने वज़न उठाकर ले जाने वाले ड्रोन्स को आईआटी कानपुर के इंक्यूबेशन सेंटर में ही डेवलप किया है. उन्होंने कहा कि यह ड्रोन 500 ग्राम तक का वज़न ले जा सकता है और एक बार की चार्जिंग में 50 किलोमीटर तक जा सकता है.

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निखिल ने कहा, “ड्रोन 50 मिलीलीटर की चार ब्लड यूनिट को सपोर्टिव कोल्ड चेन, जो बल्ड यूनिट को ठंडा रखने के लिए ज़रूरी होती है, के साथ ले जा सकता है. हल्की हवा में यह ड्रोन आसानी से उड़ान भर सकता है”.

'साबित होगा गेम चेंजर' 

देहरादून स्थित उत्तराखंड साइंस एजुकेशन और रिसर्च सेंटर (USERC) के निदेशक प्रोफ़ेसर दुर्गेश पंत स्वास्थ्य सेवाओं में ड्रोन के इस्तेमाल का समर्थन करते हैं. ड्रोन का इस्तेमाल करने वाले वैज्ञानिक प्रयोगों में शामिल रहे प्रोफ़ेसर पंत कहते हैं, “उत्तराखंड जैसे राज्यों के लिए यह गेम चेंजर साबित होगा”.

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वह कहते हैं ड्रोन्स की तकनीक में भी तेज़ी से बदलाव हो रहे हैं और ज़्यादा वज़न लेकर जाने वाले ड्रोन भी आ रहे हैं जो ख़राब मौसम में भी उड़ने के काबिल हैं.

जिस ड्रोन का टिहरी में प्रयोग किया गया उसकी कीमत करीब 10 लाख रुपये पड़ेगी. डॉक्टर पांगती कहते को तो ड्रोन की कीमत एक समस्या हो सकती है लेकिन निखिल ज़ोर देकर कहते हैं कि पहाड़ में इनकी उपयोगिता को देखते हुए कीमत कुछ भी नहीं है.

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First published: June 7, 2019, 7:29 PM IST
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