29 सालों में पहली बार नहीं होगा भारत-चीन का व्यापार, व्यापारियों ने इस वजह से खड़े किए हाथ
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29 सालों में पहली बार नहीं होगा भारत-चीन का व्यापार, व्यापारियों ने इस वजह से खड़े किए हाथ
अब भारत से सूअर नहीं खरीदेगा चीन

1962 में भारत-चीन युद्ध (Indo-China War) के बाद दोनों देशों ने अपने बॉर्डर पूरी तरह सील कर दिए थे. 1991 में व्यापार फिर शुरू हुआ था. लेकिन इस बार COVID-19 की वजह से एक बार फिर कारोबार का संकट आ खड़ा हुआ है.

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पिथौरागढ़. भारत-चीन के बीच खट्टे-मीठे संबंधों के बीच 1991 से भारत-चीन (Indo-China Trade) स्थलीय व्यापार लगातार जारी रहा है. भारत के नेपाल (Indo-Nepal Border Dispute) और चीन के साथ खींचतान के बीच इस बार इस व्यापार पर भी संकट है, हालांकि यह संकट राजनीतिक नहीं कोरोना की वजह से है. विदेश मंत्रालय स्तर पर होने वाले इस व्यापार को लेकर अभी तक दोनों देशों के बीच कुछ तय नहीं हुआ है, लेकिन भारतीय व्यापारियों ने कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए चीन की तकलाकोट मंडी जाने से इनकार कर दिया है.

सदियों से होता था व्यापार

कैलाश-मानसरोवर यात्रा के साथ ही हर साल इंडो-चाइना ट्रेड आयोजित होता था. इस व्यापार में पिथौरागढ़ की बॉर्डर तहसील धारचूला के व्यापारी शिरकत करते हैं. वस्तु विनिमय के आधार पर होने वाले इस व्यापार के जरिए चीन सीमा के करीब रहने वाले भारतीय ग्रामीणों की साल भर की रोजी-रोटी चलती है.



धारचूला के उच्च हिमालयी इलाकों में रहने वाले ग्रामीण सदियों से तिब्बत के साथ व्यापार करते आ रहे थे लेकिन 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों देशों ने अपने-अपने बॉर्डर पूरी तरह सील कर दिए थे. 1991 में दोनों देशों की साझा कोशिशों से व्यापार फिर शुरू हुआ था. यह पिछले साल तक बदस्तूर जारी रहा था.



भारतीय व्यापारियों ने कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए चीन की तकलाकोट मंडी जाने से इनकार कर दिया है.


कोई ट्रेड पास नहीं

इस बार करीब सौ से अधिक व्यापारियों ने कोरोना संकट को देखते हुए व्यापार में शामिल न होने का मन बनाया है. भारत-चीन व्यापार संघ के संरक्षक बिशन गर्ब्याल के नेतृत्व में व्यापारियों ने धारचूला एसडीएम से मिलकर अपनी मंशा जाहिर कर दी है. बिशन गर्ब्याल का कहना है कि भारत के साथ ही चीन भी कोरोना की चपेट में है. जिसे देखते हुए अधिकांश व्यापारियों ने इस बार व्यापार में शिरकत नहीं करने का मन बनाया है.

पिथौरागढ़ के डीएम विजय जोगदांडे ने बताया कि इस बार अभी तक किसी भी व्यापारी ने ट्रेड पास के लिए न तो आवेदन किया है और न ही विदेश मंत्रालय स्तर से कोई निर्देश मिले हैं. पिछले साल 265 ट्रेड पास जारी हुए थे. 2019 में भारतीय व्यापारियों ने 1 करोड़ 91 लाख 77 हजार का सामान आयात किया था और 1 करोड़ 25 लाख का निर्यात हुआ था.

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First published: May 28, 2020, 11:56 AM IST
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