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Uttarakhand Chunav: देवभूमि में AAP के 'नये-नये' प्रयोग, कांग्रेस और भाजपा को क्यों होनी चाहिए चिंता?

Uttarakhand Chunav: देवभूमि में AAP के 'नये-नये' प्रयोग, कांग्रेस और भाजपा को क्यों होनी चाहिए चिंता?

अन्य पार्टियों से हटकर 'आप' नए तरीकों से इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है.

अन्य पार्टियों से हटकर 'आप' नए तरीकों से इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है.

Uttarakhand Election : उत्तराखंड चुनाव के माहौल में आम आदमी पार्टी 'नवपरिवर्तन' और 'नवनिर्माण' जैसे शब्दों का प्रयोग कर रही है. दिल्ली मॉडल (Delhi Model) को सामने रखकर मोहल्ला क्लीनिक (Mohalla Clinic) खोलने का वादा कर रही है. नये ज़माने के अपने हथियारों को धार दे रही आप की कार्यप्रणाली (AAP Strategy) को देखकर कहा जा सकता है कि केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के नेतृत्व में आप पार्टी पूरी प्लानिंग के साथ उत्तराखंड में पैठ बनाने की मुहिम चला रही है. उत्तराखंड में राह भले आसान न हो, लेकिन आप के इस अभियान (AAP Campaign) ने विपक्षियों की नींद तो उड़ा ही दी है.

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देहरादून. उत्तराखंड में चुनाव से पहले भाजपा ‘फिर एक बार’ और कांग्रेस ‘परिवर्तन’ की लहर बनाने की जुगत में हैं, तो वहीं आम आदमी पार्टी अपने ‘नव’ प्रयोगों से पैर जमाने में लगी हुई है. जिस तरह आप उत्तराखंड में काम कर रही है, जिस तरह चुनावी प्रचार कर रही है, उससे यही मैसेज जा रहा है कि आप में भी भाजपा या कांग्रेस जितनी ही क्षमता है. देहरादून में आप पार्टी ने अपना कार्यालय बनाया है, जहां से उत्तराखंड की राजनीति में पैठ की रणनीतियां बनाई जा रही हैं. आप के पास उपलब्धि के नाम पर ‘दिल्ली मॉडल’ है और प्रयोग के लिए ‘नए’ मीडिया का सहारा.

पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की बात करें तो वे स्वयं भी उत्तराखंड को लेकर काफी सजग हैं. नमिता सिंह ने तमाम पहलुओं को टटोलते हुए अपने लेख में लिखा है कि वह राज्य की ओर कितना ध्यान दे रहे हैं, इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले साल उन्होंने राज्य के छह दौरे किए. उनकी रैलियों में उमड़ी भीड़ ने उनकी लोकप्रियता के संदेश दिए. केजरीवाल के नेतृत्व में आप ने सैन्य शहीदों के परिजनों को एक करोड़ रुपये देने, मुफ्त बिजली देने जैसे लुभावनी घोषणाएं कीं, तो देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपना विजन रखा. अपने संदेशों को जनता तक पहुंचाने और प्रचार के लिए आप ने जिस तरह रणनीति के साथ काम किया, वह कई मायनों में महत्वपूर्ण है.

वोटरों को डेटा कलेक्शन कर रही है आप!
बदलते दौर में बूथ स्तर के कैम्पेन से अलग आप पार्टी उत्तराखंड में नई तकनीक का इस्तेमाल कर रही है. डेटा कलेक्ट करने के लिए पार्टी युवाओं के लिए एम्पलॉयमेंट गारंटी स्कीम कार्ड, 300 यूनिट फ्री बिजली स्कीम कार्ड, सीनियर सिटीजन फ्री तीर्थ यात्रा कार्ड जैसे रजिस्ट्रेशन करवा रही है. इन कार्ड्स के लिए जो जानकारी ली जा रही है, उससे लाखों वोटरों का डेटा मिल रहा है. बताया जा रहा है कि अब तक पार्टी के पास 28 लाख लोगों का ऑनलाइन डेटा है.

सोशल मीडिया पर आक्रामक है आप
मौजूदा राजनीति में सोशल मीडिया एक पावरफुल माध्यम बन चुका है. कोरोना के टाइम में राजनीतिक पार्टियों के लिए यह और महत्वपूर्ण है. यही कारण है कि आप सोशल मीडिया के ज़रिए भी लगातार कैम्पैनिंग कर रही है. आप ने इसके लिए खास वॉर रूम बनाए हैं, जहां 15-15 लोगों की टीमें हैं. पार्टी ने पूरे उत्तराखंड में 75 सोशल ​मीडिया इंचार्ज बनाए. हर ज़िले के लिए एक अलग सोशल मीडिया टीम रखी गई है.

दूसरी तरफ आप के नेता सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों से कनेक्ट हो रहे हैं. फेसबुक, वॉट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आप के नेता अपनी रैलियों और सभाओं से जुड़े समाचार और वीडियो नियमित रूप से शेयर कर रहे हैं. एक आंकड़े के अनुसार पार्टी हर सप्ताह करीब तीस लाख लोगों को सोशल मीडिया के ज़रिए अप्रोच कर रही है. इसके अलावा, पार्टी डोर टू डोर कैम्पैनिंग तेज़ कर चुकी है. पार्टी ने पांच सदस्यों वाली 30 टीमें बनाई हैं, जो घर घर जाकर पार्टी के बारे में लोगों को बता रही है.

Tags: Uttarakhand AAP, Uttarakhand Assembly Election

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