जिसके लिए चप्पे-चप्पे पर है नजर, हो रहे हैं करोड़ों खर्च... राजाजी से गायब हो गई वह बाघिन-T1

राजाजी की मोतीचूर रेंज में सितंबर से T1 बाघिन नज़र नहीं  आई है. (फ़ाइल फ़ोटो)
राजाजी की मोतीचूर रेंज में सितंबर से T1 बाघिन नज़र नहीं आई है. (फ़ाइल फ़ोटो)

T1 बाघिन सितंबर महीने के बाद से कहीं देखी नहीं गई और पार्क प्रशासन को इसकी खबर तक नहीं.

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देहरादून. राजाजी बाघ रिज़र्व से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर है. पार्क की मोतीचूर रेंज में सालों से जो दो बाघिन रहती हैं, उनमें से एक ढाई महीने से भी अधिक समय से गायब है. ऐसा इसके बावजूद हुआ है जबकि पार्क में इनकी देखरेख के लिए भारी भरकम अमला तैनात है और इनकी देख-रेख के लिए करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. यह पता चलने के बाद पार्क प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है.

लापरवाही या मामला दबाने की कोशिश?

बता दें कि राजाजी बाघ रिजर्व की मोतीचूर रेंज में साल 2006 में भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने दो बाघिनों की मौजूदगी का पता लगाया था. इससे पहले माना जा रहा था कि मोतीचूर रेंज में अब बाघ नहीं रह गए हैं.



मोतीचूर रेंज में हाईवे, रेलवे ट्रैक आदि के कारण ये दोनों बाघिनें सालों से यहां अकेली रह रही हैं. इनकी देखरेख के लिए यहां भारी भरकम स्टॉफ तैनात है. कई कैमरा ट्रेप भी लगाए गए हैं. हर दिन इन दोनों बाघिनों की लोकेशन ट्रेस की जाती है लेकिन यह सब कहने की या रिकॉर्ड में दर्ज करने की बातें हैं.
ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें से एक बाघिन सितंबर महीने के बाद से कहीं देखी नहीं गई और पार्क प्रशासन को इसकी खबर तक नहीं. इसकी दो वजह हो सकती हैं. पहली तो यह कि पार्क प्रशासन ने इस मामले में गंभीर लापरवाही बरती है या फिर उसे इस बात का पता था और इसे दबाने में लगा हुआ है.

अभी तक नहीं गई मोतीचूर के बाहर 

सालों से अकेली रह रही इन दोनों बाघिनों को T1 और T2 नाम दिया गया है. इनमें से T1 गायब है. आखिरी बार सितंबर में बेरीवाड़ा और कांसरो के मिलान पर घाटा क्षेत्र में एक बाघिन के पग चिन्ह देखे गए थे. पार्क के डायरेक्टर डीके सिंह का दावा है कि ये TI के ही पग चिन्ह थे लेकिन पार्क प्रशासन के पास अपने दावे को साबित करने के लिए कुछ नहीं है. सितंबर के बाद से T1 की कोई फोटोग्राफ भी पार्क प्रशासन के पास नहीं हैं.

हालांकि पार्क डायरेक्टर डीके सिंह का कहना है कि कुछ दिन पूर्व बडकोट रेंज के घोलना क्षेत्र में भी पग चिन्ह देखे गए हैं. वहां स्टॉफ़ बढ़ाकर गश्त शुरू कर दी गई है. इसके अलावा कैमरा ट्रेप भी लगाए जा रहे हैं. लेकिन, पार्क के डायरेक्टर डीके सिंह के इस बयान में झोल है.

बड़कोट रेंज देहरादून फॉरेस्ट डिवीजन में पड़ती है. इस रेंज में आज तक मोतीचूर की ये बाघिन कभी नहीं आईं क्योंकि यहां आने के लिए उसको हाईवे का लंबा पैच पार करना होगा और इसी पैच के कारण ये दोनों बाघिन आज तक मोतीचूर से बाहर नहीं देखी गईं.

एनटीसीए को रखा अंधेरे में

इधर, देहरादून फॉरेस्ट डिवीजन के डीएफओ राजीव धीमान का कहना है कि उनको इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. यदि ऐसा होता तो पार्क प्रशासन हमसे ज़रूर संपर्क करता या फिर हमारे फील्ड ऑफिसर इसकी जानकारी देते.

बाघिन T1 का अचानक गायब होना इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है कि दोनों बाघिनों के अकेलेपन को दूर करने के लिए, उनका वंश बढ़ाने के लिए यहां कार्बेट से पांच बाघ लाने की करोड़ों की योजना पर लंबे समय से काम चल रहा है. एनटीसीए लगातार इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है. इसका यह भी मतलब निकलता है कि पार्क प्रशासन द्वारा टी वन की लोकेशन को लेकर एनटीसीए को भी अंधेरे में रखा गया.

पोचिंग के लिहाज से संवेदनशील 

इस महीने के अंत में यहां पहले चरण में दो बाघ लाए जाने हैं लेकिन इस बीच पहले से ही मौजूद बाघिन के गायब हो जाने से पार्क की सुरक्षा व्यवस्था और गश्त पर सवाल उठने लगे हैं. पार्क से जुडे सूत्रों के अनुसार यह पूरा इलाका पोचिंग के लिहाज से संवेदनशील है. T1 बाघिन शिकारियों के निशाने पर है. इस क्षेत्र में पहले कैमरा ट्रेप भी गायब पाए गए हैं.

सूत्र बताते हैं कि इसी साल अगस्त महीने T1 बाघिन शिकारियों द्वारा लगाए गए खटके में फंसते-फंसते बची थी. इससे उसके एक पैर पर चोट भी लगी थी. पार्क के ऑनरेरी वाइल्ड लाइफ वार्डन राजीव तलवार का कहना है कि यह बेहद गंभीर मामला है. वह मुख्यमंत्री से इस बात की शिकायत करेंगे. राजीव तलवार का कहना है कि चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन को पूरे मामले की जांच करानी चाहिए.
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