आग बुझाने में वन विभाग फिसड्डी, महीने भर में खाक हुई लाखों की वन संपदा

उत्तराखंड पर इस बार मौसम काफी मेहरबान रहा. यहां अप्रैल महीने तक बारिश होती रही और मई में भी जब तब लोगों को गर्मी से राहत मिलती रही. बावजूद इसके जंगलों की आग ने 1590 हेक्टेयर क्षेत्रफल को अपनी जद में ले लिया.

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: May 26, 2019, 1:35 PM IST
आग बुझाने में वन विभाग फिसड्डी, महीने भर में खाक हुई लाखों की वन संपदा
उत्तराखंड - महीने भर के भीतर जंगलों में 1257 जगहों पर आग लगने की घटनाएं घटित हुईं.
Sunil Navprabhat
Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: May 26, 2019, 1:35 PM IST
उत्तराखंड वन विभाग जंगलों की आग पर काबू पाने में फिसड्डी साबित हो रहा है. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार आग में अभी तक 28 लाख मूल्य की वन संपदा जलकर खाक हो चुकी है. वैसे, देखें तो उत्तराखंड पर इस बार मौसम काफी मेहरबान रहा. यहां अप्रैल महीने तक बारिश होती रही और मई में भी जब तब लोगों को गर्मी से राहत मिलती रही. बावजूद इसके जंगलों की आग ने 1590 हेक्टेयर क्षेत्रफल को अपनी जद में ले लिया. महीने भर के भीतर जंगलों में 1257 जगहों पर आग लगने की घटनाएं घटित हो गई. इनमें एक अनुमान के अनुसार 28 लाख रुपए मूल्य की वन संपदा जलकर राख हो गई.

आंकड़ों पर गौर करिए -

* आग लगने की सर्वाधिक घटनाएं अभी तक नैनीताल जिले में घटित हुई हैं. यहां 270 बार जंगलों में आग लग चुकी है.
* अल्मोड़ा में आग की 250 घटनाओं में सर्वाधिक पांच सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल का जंगल आग की भेंट चढ़ गया.

* आग लगने की इन घटनाओं के दौरान 6 मवेशी मारे गए. वहीं आग बुझाते हुए 8 वनकर्मी बुरी तरह झुलस गए.
* 20 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्लांटेशन भी नष्ट हो गया. विभागीय आंकड़ों के अनुसार 2000 पौधे जल गए

वन क्षेत्रों में लगातार लग रही आग की घटनाओं के संदर्भ में फायर विभाग के नोडल अफसर केपी सिंह ने कहा कि वनों में आग लगने की सूचनाएं स्टाफ को मिलते रहती है. कर्मी आग बुझाने में लगे रहते हैं. आग बुझाने में अग्निशमन विभाग का भी सहयोग मिल रहा है. जंगल की आग बुझाने के लिए SDRF से भी मदद लेने का प्रयास किया जा रहा है.
चिंताजनक बात ये है कि इस दौरान कॉर्बेट और राजाजी पार्क जैसे वन्य जीवों के लिए संरक्षित              संवेदनशील क्षेत्रों में भी वन विभाग आग पर काबू पाने में सफल नहीं हो पाया. इन क्षेत्रों में आग लगने की 56 घटनाएं सामने आ चुकी हैं. करोड़ों रुपए का बजट, भारी भरकम फौज और लंबी चौड़ी बैठकों के बावजूद वन संपदा साल दर साल स्वाह होती जा रही है. इससे वन विभाग की प्लानिंग और इम्पलीमेंटेशन पर सवाल खड़े किए जाने लगे हैं.

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