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Wildfire in Uttarakhand: इस बार जंगल की आग में 30% का इजाफा क्यों? उत्तराखंड सरकार अब करेगी ये इंतजाम

उत्तराखंड सरकार फॉरेस्ट फायर को लेकर रणनीति बनाने की कवायद कर रही है.

उत्तराखंड सरकार फॉरेस्ट फायर को लेकर रणनीति बनाने की कवायद कर रही है.

Uttarakhand Forest fire : जंगल की आग से हर साल बड़े पैमाने पर वन संपदा राख होती है लेकिन आंकलन ठीक से नहीं होता. वन्य जीव इस आंकलन में शामिल ही नहीं हैं. आग से सूखते जलस्रोतों का कोई हिसाब नहीं है. मुख्यमंत्री धामी ने आंकलन के इस मैथड को बदलने की कवायद करने को कहा.

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देहरादून. जंगल की आग रोकने के लिए अब वन विभाग जंगलों में पहाड़ों की रीच पर वॉटर टैंक बनाएगा ताकि ज़रूरत पड़ने पर पानी का प्रयोग किया जा सके. स्टेट लेवल अफसरों को भी अब फील्ड में दौड़ना होगा. उत्तराखंड में जंगलों की आग ने तांडव मचाया है. इधर, टिहरी ज़िले में लगातार जंगल जलने से वन संपदा और लोगों की सेहत पर खासा असर दिख रहा है. वहीं, जंगलों में इस बार इतनी आग क्यों लगी, इसे लेकर एक पर्यावरणविद ने कारणों की पड़ताल करते हुए बढ़ते तापमान को वजह बताया है.

पिछले ढाई महीने में तीन हज़ार हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की ज़द में आ चुका है. सोमवार को मुख्यमंत्री ने वन मंत्री, सभी डीएम और डीएफओ के साथ सचिवालय में फॉरेस्ट फायर को लेकर समीक्षा की. सीएम ने शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाएं बनाने पर ज़ोर देते हुए कहा कि जंगलों में नमी बनी रहे, इसके लिए पहाड़ों की रीच पर भविष्य में वॉटर टैंक बनाए जाएं ताकि फायर सीज़न में ज़रूरत पड़ने पर पानी को आग बुझाने के काम में लाया जा सके.

सीएम ने स्टेट लेवल ऑफिसर की भी ज़िम्मेदारी तय करने को कहा. सीएम ने स्टेट लेवल ऑफिसर को ज़िलों का नोडल अफसर बनाने के निर्देश दिए. प्रमुख सचिव, वन आरके सुधांशु ने रिस्पॉन्स टाइम कम से कम करने के साथ ही कम्युनिटी सहभागिता बढ़ाने पर ज़ोर दिया. तय किया गया कि भविष्य में ग्रामसभा लेवल पर फायर मैनेजमेंट कमेटियां बनाई जाएंगी. इधर टिहरी संवाददाता सौरभ सिंह ने बताया कि जंगलों की आग ​बस्तियों की सेहत के लिए कैसे खतरनाक हो रही है.

टिहरी में बढ़ने लगे मरीज़
ज़िले में जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे वन संपदा को खासा नुकसान पहुंच रहा है. चारों तरफ फैले धुएं से बुजुर्गों और बच्चों में सांस और एलर्जी से संबधित बीमारियां दिखने लगी हैं. अस्पतालों में ऐसे मरीज़ों की संख्या भी बढ़ गई है. अस्पताल के सीनियर डॉक्टर अमित राय का कहना है कि चेहरे को इन दिनों कवर करके रखना चाहिए और आंखों को बार बार ठंडे पानी से धोना चाहिए. इससे पहले बागेश्वर ज़िले के अस्पतालों में भी ऐसे मरीज़ों के बढ़ने की खबरें आ चुकी हैं.

इस बार फॉरेस्ट फायर 30% ज़्यादा क्यों?
पिछले साल अप्रैल की तुलना में इस साल अप्रैल के महीने में जंगल की आग 30% ज़्यादा रही. विशेषज्ञों का मानना है कि न के बराबर बारिश होने के चलते बढ़ी गर्मी इसकी बड़ी वजह है. कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व वाले इलाके रामनगर में बेस्ड पर्यावरणविद एजी अंसारी के हवाले से एक रिपोर्ट कहती है कि मार्च में बारिश 91% और अप्रैल में 96% तक कम हुई इसलिए बढ़ते तापमान का सीधा असर जंगलों की आग के रूप में दिखा.

Tags: Forest fire, Uttarakhand Forest Department, Uttarakhand news

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