फॉरेस्ट गार्ड भर्ती मामला: मंगलवार को सचिवालय कूच करेगी उत्तराखंड यूथ कांग्रेस

यूथ कांग्रेस के मंगलवार को होने वाले सचिवालय कूच में वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी मौजूद रहेंगे.
यूथ कांग्रेस के मंगलवार को होने वाले सचिवालय कूच में वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी मौजूद रहेंगे.

आठ महीने से इस मामले में न एसआईटी जांच का परिणाम सामने आ पाया है और न भर्ती परीक्षा का परिणाम.

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देहरादून. उत्तराखंड में फॉरेस्ट गार्ड भर्ती मामले पर एक बार फिर राजनीति गरमाने वाली है. पिछले आठ महीने से बोतल में बंद जिन्न को कांग्रेस एक बार फिर बाहर निकालने जा रही है. दरअसल इस मामले में न एसआईटी जांच का परिणाम  सामने आ पाया है और न भर्ती परीक्षा का परिणाम. इधर बेरोजगार अधर में लटके हैं. कांग्रेस की यूथ विंग ने भर्ती रद्द कर नए सिरे से कराने की मांग को लेकर मंगलवार को सचिवालय कूच का ऐलान किया है. बताया जा रहा है कि मंगलवार के प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष समेत कांग्रेस के सीनियर लीडर भी मौजूद रहेंगे.

आठ महीने बाद भी कन्फ्यूज़न

बता दें कि उत्तराखंड वन विभाग में सालों बाद 2017 में फॉरेस्ट गार्ड के 1218 पदों के लिए विज्ञप्ति निकाली गई थी लेकिन, हर बार कोई न कोई पेंच फंसता रहा. आखिरकार इस साल फरवरी महीने में एग्ज़ाम हुए लेकिन पेपर लीक होने से मामला एक बार फिर लटक गया.



इसके बाद सरकार ने एसआईटी जांच बैठाई और शेष उन सेंटरों पर जहां पेपर लीक होने का मामला सामने नहीं आया था रिज़ल्ट घोषित करने की बात कही गई थी. इस बात को भी आठ महीने बीत गए. न एसआईटी जांच का परिणाम  सामने आ पाया और न भर्ती परीक्षा का परिणाम. बेरोज़गार अधर में लटके हैं.
कांग्रेस अब इसे मुददा बनाकर मंगलवार को सचिवालय में हल्ला बोलने जा रही है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह कहना है कि सरकार अपने पौने चार साल के कार्यकाल में रोज़गार के नाम पर इसी तरह का झुनझुना बेरोजगारों को पकड़ाती रही है.

बचाव में उतरे पार्टी प्रवक्ता को भी मामले का पता नहीं 

उधर, भाजपा का कहना है कि कांग्रेस को विरोध करना है, इसलिए वह विरोध कर रही है. पार्टी प्रवक्ता और विधायक खजानदास का कहना है कि भाजपा को छींक भी आती है तो कांग्रेस उसमें भी मुद्दा खेाजने लगती है लेकिन, फॉरेस्ट गार्ड भर्ती मामले में अब पेंच कहां फंसा है यह खजानदास भी स्पष्ट नहीं कर पाए.

बहरहाल, यह बात सच है कि तीन साल गुजर गए लेकिन युवाओं का फॉरेस्ट गार्ड बनने का सपना साकार नहीं हो पाया. यह अलग बात है कि चुनाव नज़दीक आए तो सियासी दलों को भी अटकी पड़ी फॉरेस्ट गार्ड भर्ती और उम्मीद में बैठे लाखों बेरोजगारों की याद आने लगी है.
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