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मुफ़्त-मुफ़्त-मुफ़्त... दिल्ली की तरह उत्तराखंड में भी दी जा सकती है लाखों परिवारों को मुफ़्त बिजली! यहां जानिए कैसे
Dehradun News in Hindi

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: February 19, 2020, 12:45 PM IST
मुफ़्त-मुफ़्त-मुफ़्त... दिल्ली की तरह उत्तराखंड में भी दी जा सकती है लाखों परिवारों को मुफ़्त बिजली! यहां जानिए कैसे
उत्तराखंड में बिजली विभाग के कर्मचारियों को मुफ़्त बिजली मिलती है जिसे आम लोगों को दिया जाए तो लाखों को फ़ायदा मिल सकता है.

बिजली विभाग के कर्मचारी हर महीने करोड़ों यूनिट बिजली मुफ़्त में फूंक देते हैं. इसे लोगों को दिया जाए तो यह गेम-चेंजर साबित हो सकती है.

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देहरादून. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की बंपर जीत के पीछे 200 यूनिट तक मुफ़्त बिजली का बड़ा हाथ माना जा रहा है. उत्तराखंड में भी यह संभव है लेकिन बिजली विभाग के कर्मचारी इसमें आड़े आ रहे हैं. बिजली विभाग के कर्मचारी हर महीने करोड़ों यूनिट बिजली मुफ़्त में फूंक देते हैं. हमने कम से कम दर से हिसाब लगाया तो निकला यह कि अगर प्रदेश सरकार इसे दिल्ली की तर्ज पर लोगों को मुफ़्त दे तो लाखों  घरों को तो 200 यूनिट तक मुफ़्त बिजली हर महीने दी ही जा सकती है.

दिल्ली और उत्तराखंड का फ़र्क़

दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली मुफ़्त दी जाती है और उसके बाद भी सब्सिडी मिलती है. 400 यूनिट तक बिजली की खपत करने पर दिल्ली में सिर्फ़ 500 रुपये का बिल आता है लेकिन उत्तराखंड में यह इसका चार गुना यानी करीब 2000 रुपये आता है.



फरवरी 2019 के टैरिफ़ के हिसाब से उत्तराखंड में पहली सौ यूनिट तक बिजली दर 2.75 रुपये है, 101 से 200 तक 3.55 रुपये और 201 से 400 तक 4.90 रुपये प्रति यूनिट है. ये मिलाकर 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल का खर्च 1610 रुपये बनता है. इसके अलावा 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने पर 145 रुपये का फ़िक्सड चार्ज भी लिया जाता है.



इसके अलावा बिजली खर्च पर 15 पैसे पर प्रति यूनिट इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी चार्ज की जाती है. 07 पैसे प्रति यूनिट फ़्यूल चार्ज और 39 पैसे प्रति यूनिट एडिशनल इलेक्ट्रिसिटी चार्ज लिया जाता है. यह मिलाकर बनते हैं 244 रुपये. इन्हें मिलाकर 400 यूनिट का बिल आता है, 1999 रुपये.

और यूपीसीएल हर बार घाटे का रोना रोते हुए टैरिफ़ को बढ़ाने की मांग करता रहता है.

मुफ़्त बिजली

जहां उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ता जा रहा है वहीं बिजली विभाग के कर्मचारियों को बिजली मुफ़्त मिलती है. उत्तराखंड में बिजली विभाग के तीन निगम हैं- यूजेवीएनएल, पिटकुल और यूपीसीएल. इन तीनों निगमों के कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों और फ़ैमिली पेंशनरों को (जो करीब 12000 हैं) लगभग असीमित मुफ़्त बिजली मिलती है.

उत्तराखंड के आरटीआई एक्टिविस्टों के एक समूह आरटीआई क्लब ने इसके ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. आरटीआई क्लब के अमर सिंह धुन्ता के अनुसार बिजली विभाग के इन लाभार्थियों को बहुत ही कम फ़िक्स चार्ज पर बिजली दी जाती है लेकिन कमाल की बात यह है कि ज़्यादातर कर्मचारियों-पूर्व कर्मचारियों के घरों पर बिजली के मीटर ही नहीं हैं और हैं तो ख़राब हैं.

धुन्ता के अनुसार इसके चलते ये लोग असीमित बिजली मुफ़्त के भाव इस्तेमाल करते हैं. ऐसे कई मामले हैं जहां ये लाभार्थी बिजली का कॉमर्शियल इस्तेमाल करते हैं. उस बिजली का जो इन्हें करीब-करीब मुफ़्त और असीमित मिलती है. इसका बोझ पड़ता है उपभोक्ताओं पर.

लिमिट पर हाईकोर्ट की फटकार

आरटीआई क्लब की पीआईएल पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जब यूपीसीएल को फटकार लगाई तो निगम ने अपने कर्मचारियों को बिजली देने की सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया. इस प्रस्ताव में यूपीसीएल ने बिजली विभाग के कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों, फैमिली पेंशनरों को चार स्लैब में 8 हज़ार से 12 हज़ार यूनिट तक मुफ़्त बिजली देने की बात कही है. इससे ऊपर इस्तेमाल की जाने वाली बिजली पर 50 फ़ीसदी सब्सिडी दिए जाने का प्रस्ताव है.

हाईकोर्ट ने इस पर बिजली विभाग को फटकार लगाई है और इस प्रस्ताव को दुरुस्त करने को कहा है. स्थिति यह है कि हाईकोर्ट की फटकार के बावजूद यूपीसीएल यह नहीं बता पाया है कि कितने कर्मचारियों-अधिकारियों के घरों में मीटर हैं और सुनवाई शुरु होने के बाद से वह कितने लगा पाया है.

मज़ेदार बात यह है कि बिजली विभाग के कर्मचारी ‘मुफ़्त बिजली’ में किसी भी तरह की कटौती का विरोध कर रहे हैं और इसके लिए मैनेजमेंट का घेराव तक कर चुके हैं.

करोड़ों यूनिट बिजली अब भी फ़्री

यूपसीएल के आठ से 12 हज़ार यूनिट तक मुफ़्त बिजली के प्रस्ताव में से हमने 10000 यूनिट का एक औसत मानकर हिसाब लगाया तो पता चला कि हर महीने करोड़ों यूनिट बिजली अब भी बिजली विभाग के कर्मचारियों को मुफ़्त मिलेगी.

बिजली विभाग से जुड़े 12000 परिवारों को सालाना 10000 यूनिट बिजली फ़्री दी जाती है तो साल में 12 करोड़ यूनिट बिजली मुफ़्त दी जाएगी या महीने में एक करोड़ यूनिट बिजली मुफ़्त दी जाएगी. इसका अर्थ यह हुआ कि 12000 परिवारों में से हर परिवार को औसतन 833 यूनिट से ज़्यादा बिजली मुफ़्त मिलेगी.

दिल्ली की तर्ज पर अगर उत्तराखंड सरकार भी 200 यूनिट बिजली मुफ़्त देना चाहे तो वह हर महीने कम से कम पचास हज़ार परिवारों को इतनी बिजली मुफ़्त दे सकती है.

लाखों को मिल सकता है फ़ायदा

अब ज़रा यह भी हिसाब लगाते हैं कि बिजलीकर्मियों को मुफ़्त दी जाने वाली बिजली की कीमत कितनी आएगी...

400 यूनिट तक टैरिफ़ चार्ज बनता है 1755 रुपये. इसके बाद प्रति यूनिट 5.65 प्रति यूनिट लगता है. तो 433 यूनिट पर बिजली का खर्च आएगा 2446.45 रुपये. इसके अलावा 15 पैसे पर प्रति यूनिट इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी चार्ज, 07 पैसे प्रति यूनिट फ़्यूल चार्ज और 39 पैसे प्रति यूनिट एडिशनल इलेक्ट्रिसिटी चार्ज आएगा 508.31 रुपये.

इस तरह कुल मिलाकर एक परिवार का 833 यूनिट के लिए हर महीने बिल आना चाहिए 4706.76 रुपये. 12000 परिवारों का हर महीने का बिजली का बिल बनता है 5 करोड़ 65 लाख 17 हज़ार 120 रुपये. साल का यह हो जाता है 67 करोड़ 82 लाख 05 हज़ार 440 रुपये.

इस पैसे में 3.55 रुपये के औसत (जो 200 यूनिट तक का बिजली की दर है) से 191043785 यूनिट बिजली ली जा सकती है. यह बिजली 200 यूनिट प्रति परिवार के हिसाब से 9 लाख 55 हज़ार 218 परिवारों को दी जा सकती है.

कई गुना होती है मुफ्त बिजली खर्च   

बिजली विभाग के कर्मचारी कम से कम करोड़ों रुपये की बिजली मुफ़्त जलाते हैं और हर साल इसका बोझ बढ़ता जाता है उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं पर. अब चूंकि अभी तक बिजली विभाग के कर्मचारी असीमित बिजली इस्तेमाल करते रहे हैं तो हर साल इससे कई गुना की बिजली वह मुफ़्त में जला चुके होंगे. यूपीसीएल को हर साल होने वाले करोड़ों रुपये के घाटे की बड़ी वजह यह भी है.

फिर बता दें कि यह आंकड़ा न्यूनतम उपभोग को ध्यान में रखकर लगाए गए हिसाब का है. इस तथ्य को भी ध्यान में रखना होगा कि बिजलीकर्मी चार स्लैब में 12000 यूनिट तक बिजली खर्च कर सकते हैं और यह तय माना जा रहा है कि वह 10000 यूनिट के औसत से ज़्यादा ही बिजली खर्च करेंगे और इसलिए बिजली विभाग अपने कर्मचारी-अधिकारियों को इससे कई गुना ज़्यादा की बिजली मुफ़्त देगा.

क्या राजनीतिक दल यह गणित समझ रहे हैं? दिल्ली की तरह उत्तराखंड में उपभोक्ताओं को मुफ़्त बिजली दिया जाना संभव है लेकिन इसके लिए चाहिए समझ और राजनीतिक इच्छाशक्ति.

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First published: February 19, 2020, 12:36 PM IST
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