होम /न्यूज /उत्तराखंड /दोस्तों ने हमलाकर आंखों में मारी गोली, 3 बार सुसाइड की कोशिश, पर नहीं मानी हार; मिसाल है इस शख्स की कहानी

दोस्तों ने हमलाकर आंखों में मारी गोली, 3 बार सुसाइड की कोशिश, पर नहीं मानी हार; मिसाल है इस शख्स की कहानी

Dehradun News: दोस्तों के हमले में अपनी दोनों आंखों की रोशनी गवां चुके अनिल कुमार आज देहरादून के एसबीआई में बतौर सीनियर ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- हिना आज़मी

देहरादून. कई बार इंसान किसी हादसे का शिकार हो जाता है और फिर जिंदगी की सबसे अनमोल चीज भी गंवा देता है. ऐसे ही एक इंसान की कहानी है अनिल कुमार की, जो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में सीनियर असिस्टेंट के पद पर तैनात हैं. अनिल की दोनों आंखें उनके दोस्तों द्वारा किये गए जानलेवा हमले में चली गईं. आंखों की रोशनी जाने पर जिंदगी में अंधेरा छा गया और वह टूटने लगे. तब उनकी बहन उनके लिये उम्मीद की रोशनी बनीं.

देहरादून के NIVH से पढ़ाई करने के बाद उनकी बहन ने अपने भाई की तैयारी करवाई. अपनी मेहनत और बहन की उम्मीदों के चलते अनिल ने SBI का एग्जाम पास कर लिया. अनिल आज देहरादून के कंटेनमेंट रोड स्थित SBI की ब्रांच के सीनियर असिस्टेंट के पद पर काम कर रहे हैं. वह हर रोज बस से घर से ऑफिस जाते हैं.

अनिल के पिता चीनी मिल में नौकरी पर थे
अनिल ने बताया कि उनके पिता चीनी मिल में मजदूरी करते थे. वह पढ़ाई के साथ-साथ घर में भी हाथ बंटाया करते थे. अनिल बचपन से ही पढ़ाई से लेकर खेलकूद में अव्वल रहते थे. उन्होंने बताया कि साल 2009 में किसी बात को लेकर उनके साथियों के साथ उनकी अनबन हो गई थी. कॉलेज प्रशासन ने मामला शांत करवाया. अगले दिन जब अनिल किसी जानकार की शादी में जा रहे थे, तब अचानक 40 लोग आए और उन्होंने अनिल पर जानलेवा हमला कर दिया.

आंखों पर छाग दी गाेली
अनिल बताते हैं कि पहले उनके सिर पर बंदूक की बट मारी गई, जिससे वह जमीन पर गिर गए और इसके बाद उनकी आंखों पर करीब 34 छर्रे दागे गए. यह छर्रे दागने वाले कोई और नहीं बल्कि उनके ही साथी थे. उन पर हमला करने के बाद सभी लोग वहां से भाग निकले. अनिल के भाई ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया. इलाज के दौरान पता चला कि वह अब कभी नहीं देख पाएंगे. अनिल बहुत टूट चुके थे. तीन बार तो ऐसा हुआ कि उन्होंने आत्महत्या करने की भी कोशिश की लेकिन परिवार के सपोर्ट ने उन्हें टूटने नहीं दिया.

उन्हें देहरादून के एनआईवीएच में कंप्यूटर कोर्स करने के लिए भेजा गया. 18 महीने यहां से कोर्स पूरा करने के बाद वह दोबारा घर चले गए. अनिल कुमार ने बहन की मदद से अपनी बीकॉम की पढ़ाई को जारी रखा और इसी के साथ ही सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी. बहन उन्हें प्रश्न उत्तर पढ़कर सुनाती थी और वह ऐसे ही याद करते थे. संघर्षों से लड़ने वाले अनिल कुमार ने मेहनत और लगन से एसबीआई, यूको और केनरा बैंक के एग्जाम क्रैक किए.

मिसाल बन गए अनिल 
आज अनिल कुमार एसबीआई में बतौर सीनियर असिस्टेंट काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके कंप्यूटर सिस्टम में जॉर्ज नाम का एक सॉफ्टवेयर दिया गया है और इसी के साथ ही स्पीकर भी लगाए गए हैं, जिससे स्क्रीन पर होने वाली गतिविधियां उन्हें सुनाई देती हैं. अनिल घर से कार्यालय तक सार्वजनिक वाहनों से सफर करते हैं. वह अकेले ही सड़कों पर पैदल चलते हैं. अनिल की कहानी वाकई उन लोगों को हिम्मत देती है, जो जिंदगी के आगे घुटने टेक देते हैं.

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें