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श्रद्धालुओं को चार धाम यात्रा में आने को मना कर रहे हैं गंगोत्री के रावल... यहां जानिए क्यों
Dehradun News in Hindi

Kishore Kumar Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: February 10, 2020, 5:30 PM IST
श्रद्धालुओं को चार धाम यात्रा में आने को मना कर रहे हैं गंगोत्री के रावल... यहां जानिए क्यों
गंगोत्री के रावल ने पूछा कि बोर्ड का समर्थन करने वाले महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी जिस काली मंदिर के पीठाधीश्वर हैं उसे और धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज के आश्रम को क्या इस देवस्थानम बोर्ड में शामिल नहीं किया जाना चाहिए?

गंगोत्री के रावल शिवप्रकाश महाराज ने कहा कि अभी समय है, राज्य सरकार को इस बोर्ड को वापस ले लेना चाहिए क्योंकि यह बोर्ड सनातन धर्म के विरुद्ध है.

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देहरादून. उत्तराखंड के चार धाम देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ-पुरोहितों और हक-हकूकधारियों का विरोध जारी है. नवगठित बोर्ड इस बार से चार धाम यात्रा समेत प्रदेश के 51 मंदिरों की देख-रेख और नियंत्रण करेगा. इसे लेकर तीर्थ-पुरोहित और हक-हकूकधारी तो आंदोलित हैं ही यह मामला अब अदालत में भी पहुंच गया है. इस बीच गंगोत्री के रावल ने सरकार के इस कदम को धर्म-विरोधी बताते हुए कहा कि इससे भारी अनिष्ट हो सकता है. वह श्रद्धालुओं से चार धाम यात्रा पर न आने का आग्रह भी कर रहे हैं.

सनातन धर्म के विरुद्ध 

शीतकाल में जब गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ के कपाट छह महीने के लिए बंद होते हैं तब यहां के तीर्थ-पुरोहित देश भर की यात्रा कर श्रद्धालुओं से मिलते हैं और उन्हें अगली चार धाम यात्रा में आने का निमंत्रण देते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है.

कई राज्यों की यात्रा कर देहरादून पहुंच गंगोत्री के रावल शिवप्रकाश महाराज ने कहा कि अभी समय है, राज्य सरकार को इस बोर्ड को वापस ले लेना चाहिए क्योंकि यह बोर्ड सनातन धर्म के विरुद्ध है. उन्होंने  कहा कि इस बोर्ड का सीईओ आईएएस अफ़सर बनेगा जिसे मंदिरों की पूजा पद्धति, पूजा के नियम और परंपराएं का ज्ञान नहीं होगा.

सतपाल महाराज का आश्रम क्यों बाहर 

उन्होंने कहा कि सरकार ने अगर राजस्व को ध्यान में रखते हुए चार धाम देवस्थानम बोर्ड बनाया है तो हरिद्वार में बहुत सारे मठ-मंदिर हैं जहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, उन्हें भी इसके दायरे में लिया जाए... सरकार को और राजस्व मिलेगा.

गंगोत्री के रावत ने पूछा कि बोर्ड का समर्थन करने वाले महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी जिस काली मंदिर के पीठाधीश्वर हैं उसे और धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज के आश्रम को क्या इस देवस्थानम बोर्ड में शामिल नहीं किया जाना चाहिए?आपदा को बुलावा

रावल ने कहा कि यह बोर्ड बनाकर सरकार ने धर्म विरुद्ध कार्य किया है और भूलना नहीं चाहिए कि वरुणाव्रत पर्वत के साथ छेड़छाड़ के बाद कैसी आपदा आई थी. 2013 में धारी देवी मंदिर को हटाने की वजह से केदारनाथ में आपदा आई थी और अब जबकि सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के छेड़छाड़ की गई है तो कितनी बड़ी आपदा आएगी इसकी कल्पना ही की जा सकती है.

गंगोत्री के रावल कहते हैं कि इसलिए दिल पर पत्थर रखकर उन्होंने कई राज्यों के श्रद्धालुओं से कहा है कि वह अपने घरों में ही सुरक्षित हैं और इस बार उनका गंगोत्री समेत चारधाम आना खतरनाक हो सकता है. सरकार उन्हें प्रकृति के, देवताओं के कोप से तो बचा सकती नहीं लेकिन एक आपदा को उसने निमंत्रण ज़रूर दे दिया है.

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First published: February 10, 2020, 5:14 PM IST
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