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देहरादून में मिठास घोल रही राजस्थान की मिठाई, सिर्फ सावन महीने में ही क्यों बनाया जाता है घेवर?

देहरादून में मिठास घोल रही राजस्थान की मिठाई, सिर्फ सावन महीने में ही क्यों बनाया जाता है घेवर?

Raksha Bandhan Ghevar: देहरादून के बाजार में कई तरह के घेवर सावन के महीने में मिलते हैं, जिसमें फीका घेवर, मीठा घेवर, ड्राई फ्रूट्स घेवर और मलाई घेवर प्रमुख है. ड्राई फ्रूट्स घेवर 500 से 600 रुपये प्रति किलो बिकता है.

रिपोर्ट-हिना आज़मी

देहरादून. सावन के महीने में कई त्योहार मनाए जाते हैं. पूरे सालभर में उत्तराखंड में इस महीने में एक ऐसी मिठाई बनाई जाती है, जो काफी पसंद की जाती है. राजस्थान की इस मिठाई को घेवर कहा जाता है. राजधानी देहरादून में इस मिठाई का इंतजार सालभर किया जाता है, क्योंकि यह सिर्फ सावन में ही खाने के लिए मिलती है.

मिठाई खरीदने आई अनुराधा ने बताया कि सावन के विशेष पर्वों हरियाली तीज और रक्षाबंधन में घेवर अहम माना जाता है. कहा जाता है कि घेवर के बिना ये त्योहार अधूरे हैं. घेवर को अंग्रेजी में हनीकॉम्ब डेसर्ट कहा जाता है.

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आज पूरे भारत में घेवर बड़े चाव के साथ खाया जाता है. इसकी उत्पत्ति राजस्थान में हुई थी. वहीं सदियों से ही ब्रज में व उसके आसपास के इलाकों में एक परंपरा चली आ रही है, जिसमें रक्षाबंधन पर बहन घेवर लेकर भाई के घर जाती है. बिना घेवर के भाई-बहन का त्योहार रक्षाबंधन अधूरा माना जाता है.

देहरादून के बाजार में कई तरह के घेवर सावन के महीने में मिलते हैं, जिसमें फीका घेवर, मीठा घेवर, ड्राई फ्रूट्स घेवर और मलाई घेवर प्रमुख है. देहरादून के मिठाई विक्रेता सुरेंद्र भाटिया ने बताया कि घेवर में प्रयोग होने वाली सामग्री पर ही घेवर के दाम निर्भर होते हैं. फीका और सिंपल घेवर सस्ता होता है, तो वहीं पिस्ता, बादाम और मावे वाला घेवर महंगा होता है. अधिकतर लोग पिस्ता, बादाम और मावे वाले घेवर को खाना पसंद करते हैं. यह बाजार में 500 से 600 रुपये प्रति किलो बिकता है.

Tags: Dehradun news

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