उत्तराखंड को बाल कुपोषण से मुक्ति दिलाएगा गोद अभियान!

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बच्चों को कुपोषण से दूर रखने के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आगे आने के निर्देश दिए हैं.

Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: September 2, 2019, 4:50 PM IST
उत्तराखंड को बाल कुपोषण से मुक्ति दिलाएगा गोद अभियान!
उत्तराखण्ड में इस साल 1600 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं. इसे देखते हुए उत्तराखण्ड सरकार ने गोद अभियान चलाने का फैसला लिया है.
Bharti Saklani
Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: September 2, 2019, 4:50 PM IST
देश भर में सितम्बर का महीना पोषण अभियान के तौर पर मनाया जा रहा है जिसमें कुपोषित बच्चों को पोषित आहार देकर भारत को कुपोषण मुक्त बनाने की कोशिश की जा रही है. उत्तराखण्ड में इस साल 1600 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं. इसे देखते हुए उत्तराखण्ड सरकार ने गोद अभियान चलाने का फैसला लिया है. इस अभियान के तहत सचिवालय से 94 अधिकारियों को चिन्हित कर कुपोषित बच्चों को गोद लेने की ज़िम्मेदारी दी गई है. उत्तराखण्ड को कुपोषण से मुक्त करने के लिए शिक्षा,स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है. ये एक महीने तक कुपोषण के विरोध में कार्यक्रम चलाने से लेकर कुपोषण से बच्चों को कैसे दूर रखा जा सकता है इसको लेकर जागरूकता फैलाने के लिए काम करेंगे.

इतने हैं कुपोषित बच्चे 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बच्चों को कुपोषण से दूर रखने के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आगे आने के निर्देश दिए हैं. इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए देहरादून सचिवालय से 94 अधिकारियों को चिन्हित कर एक-एक बच्चा गोद लेने का दारोमदार दिया गया है.

उत्तराखंड में कुपोषित बच्चों की संख्या 17,000 है. महिला सश्क्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने पहले चरण में 1600 अतिकुपोषित बच्चों को कुपोषण से दूर करने की योजना पर काम करने का फ़ैसला किया है. इसके तहत 3 सितम्बर से अभियान शुरु किया जाएगा जिसमें मुख्य सचिव उत्पल कुमार से लेकर सचिवालय के सभी बड़े अधिकारी शामिल रहेंगे. महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग की सचिव सौजन्या के अऩुसार उत्तराखण्ड में ज़िलास्तर के अधिकारी भी गोद अभियान का हिस्सा बनेंगे.

ये हैं वजह 

विशेषज्ञों का कहना है कि देश भर में पैक्ड फ़ूड के बढ़ते प्रचलन से मां और बच्चों की सेहत पर कुप्रभाव पड़ रहा है और इसी वजह से कुपोषण भी बढ़ रहा है. मां द्वारा बच्चों को स्तनपान न करा पाना भी बच्चों के कुपोषण के पीछे बड़ी वजह निकलकर सामने आई है. बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने के लिए ज़रूरी माना जाता है कि बच्चों को जन्म के एक घंटे के अंदर ही मां स्तनपान करवाए.

साल 2006 से 2016 तक कुपोषण के रेट में 10% तक का इजाफ़ा हुआ है. इसके बाद इस साल उत्तराखण्ड सरकार ने फैसला लिया कि अतिकुपोषित बच्चों की दवा और खुराक की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधि उठाएंगे और बच्चों का फ़ीडबैक लेते रहेंगे.
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First published: September 2, 2019, 4:50 PM IST
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