पिछड़े वर्गों के विकास पर सरकारी विभागों ने मारी कुंडली, बजट के बावजूद कंजूसी

उत्तराखंड में तीन दर्जन सरकारी महकमों को अनुसूचित जाति और जनजाति उप योजना के तहत लगभग दो हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है, लेकिन खर्च में ऐसी कंजूसी, जिसे देखकर बड़ी लापरवाही का अंदाजा लगाया जा सकता है.

Mukesh Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: October 13, 2018, 8:51 AM IST
पिछड़े वर्गों के विकास पर सरकारी विभागों ने मारी कुंडली, बजट के बावजूद कंजूसी
उत्तराखंड शासन सचिवालय
Mukesh Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: October 13, 2018, 8:51 AM IST
अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़ी विकास योजनाओं पर सरकारी विभाग कुंडली मारकर बैठे हैं. सैंकड़ों करोड़ का बजट मौजूद है, लेकिन खर्च के नाम पर बस खाना पूर्ती ही की जा रही है.

उत्तराखंड में तीन दर्जन सरकारी महकमों को अनुसूचित जाति और जनजाति उप योजना के तहत लगभग दो हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है, लेकिन खर्च में ऐसी कंजूसी, जिसे देखकर बड़ी लापरवाही का अंदाजा लगाया जा सकता है. वित्तीव वर्ष 2018-19 की प्रगति रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड के अधिकांश विभाग जारी की गई धनराशि को खर्च में फिसड्डी साबित हुए हैं. अनुसूचित जाति उप योजना के तहत 1460.96 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया, जिसमें 563.72 करोड़ जारी भी कर दिये गये, लेकिन खर्च हुये सिर्फ 175.51 करोड़. जनजाति उप योजना का भी ऐसा ही हाल है. यहां 477.03 लाख के बजट का प्रावधान किया गया और 204.52 करोड़ जारी भी कर दिये गये, लेकिन खर्च हुये महज 70.56 करोड़ रुपये.

योजना के छ: महीने बीत जाने के बाद भी दुग्ध विकास, उरेडा, पर्यटन, युवा कल्याण, श्रम एवं सेवायोजन विभाग ने तो एक रूपया भी खर्च नहीं किया है. इन सभी विभागों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि कई विभाग ऐसे हैं जो नोडल समाज कल्याण विभाग को प्रगति रिपोर्ट ही नहीं सौंप रहे हैं. जाहिर है लापरवाही कई विभागों में चल रही है. हालांकि वित्त मन्त्री कह रहे हैं कि सरकार इन योजनाओं के मामले पर गंभीर है.

जिन विभागों को ग्राउंड जीरो तक विकास योजनाएं पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया है वो कुंभकरणी नींद में सो रहे हैं. योजनाएं भी ऐसी हैं जो खासतौर पर पिछड़े तबके के लिये हैं. बहरहाल सवाल है कि क्या लापरवाह अधिकारी कार्रवाई के हंटर का इंतजार कर रहे हैं.

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