उत्तराखंड में सरकारी अस्पताल नहीं जीत पाए लोगों का भरोसा... प्राइवेट में जाते हैं ज़्यादातर मरीज़

उत्तराखंड बने 19 साल गुजरने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी पर नहीं आई हैं.

नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन की रिपोर्ट के अनुसार बाकी हिमालयी राज्यों में लोग सरकारी अस्पतालों, डॉक्टरों से ज़्यादा इलाज करवाते हैं लेकिन उत्तराखंड में स्थिति उलट है.

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देहरादून. क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड में आज भी लोग ज्यादातर अपना इलाज़ करवाने प्राइवेट डॉक्टर और प्राइवेट हॉस्पिटल में जाते हैं. उत्तराखंड बने 19 साल गुजरने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी पर नहीं आई हैं. हालत यह है कि प्रदेश में आज भी लोग इलाज़ के लिए प्राइवेट डॉक्टर और प्राइवेट अस्तपाल पर निर्भर हैं. यह बात पता चली है नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन यानि NSSO की सर्वे रिपोर्ट से.

स्वास्थ्य पर खर्च 

सरकारी तंत्र में सबसे ज्यादा बजट स्वास्थ्य या शिक्षा पर खर्च किया जाता है. सरकारी शिक्षा का हाल तो सबको पता है लेकिन स्वास्थ्य की स्थिति इससे भी ख़राब है. राज्य बने 19 साल होने के बावजूद सरकारें उत्तराखंड में आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने में कामयाब नहीं हो पाई हैं. नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन की जुलाई 2017- से जून 2018 तक की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल, जम्मू और कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम जैसे हिमालयी राज्यों में लोग सरकारी अस्पतालों, डॉक्टरों से ज़्यादा इलाज करवाते हैं लेकिन उत्तराखंड में स्थिति उलट है.

एक नज़र इन राज्यों में सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए जाने वाले मरीज़ों की संख्या में फ़र्क पर (आंकड़े प्रतिशत में हैं)...
















































राज्य सरकारी हॉस्पिटल प्राइवेट डॉक्टर/क्लीनिक
उत्तराखंड 32.9 36.5
हिमाचल 67.7 18.4
जम्मू और कश्मीर 69.3 27.7
मणिपुर 82.6 14.4
मेघालय 52.7 14.8
मिजोरम 68.2 19.9
नागालैंड 49.2 33.6
सिक्किम 52.0 37.9

 

इसी तरह एक नज़र अस्पताल में भर्ती होने के फ़र्क पर भी...
















































राज्य सरकारी हॉस्पिटल प्राइवेट डॉक्टर/क्लीनिक
उत्तराखंड 35.7 63.1
हिमाचल 77.3 21.2
जम्मू और कश्मीर 91.2 8.2
मणिपुर 79.7 19.6
मेघालय 85.0 14.5
मिजोरम 80.0 18.5
नागालैंड 73.4 26.5
सिक्किम 79.9 20.1

ये आंकड़े बताते हैं कि अन्य हिमालयी राज्य कितने आगे हैं.

विभाग को आंकड़ों पर विश्वास नहीं 

इस बारे में उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉक्टर अमिता उप्रेती कहती हैं कि ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक में सरकारी हॉस्पिटल ज्यादा सुविधाएं दे रहे हैं.  वह इस बात से इनकार करती हैं कि सरकारी के बजाय आम लोग प्राइवेट डॉक्टर या क्लीनक में जाते हैं.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के उत्तराखंड के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर संजय गोयल कहते हैं कि आम लोग प्राइवेट डॉक्टर के पास या क्लीनिक में इसलिए जाते हैं क्योंकि सरकारी अस्पतालों में भीड़ बहुत ज़्यादा है और प्राइवेट डॉक्टर के पास उन्हें पर्सनल ट्रीटमेंट मिल जाता है.

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