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हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद याचिकाकर्ता ने कहा, सरकार के रवैये को देख मजबूरी में डालनी पड़ी पीआईएल
Dehradun News in Hindi

Rajesh Dobriyal | News18Hindi
Updated: May 20, 2020, 9:07 PM IST
हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद याचिकाकर्ता ने कहा, सरकार के रवैये को देख मजबूरी में डालनी पड़ी पीआईएल
हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर किसी में कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो उनकी जांच भी राज्य की सीमा पर ही की जाए और रिपोर्ट नेगेटिव हो तो ही तभी प्रवासी को राज्य में उसके गंतव्य तक भेजा जाए.

नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अन्य प्रदेशों के रेड ज़ोन से राज्य में आने वाले सभी प्रवासियों को राज्य की सीमा पर ही क्वारंटीन किया जाए.

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देहरादून. कोरोना वायरस, कोविड-19, की टेस्टिंग, क्वारंटीन किए जाने, प्रवासियों की घर वापसी से पैदा हालात को लेकर छाई धुंध अब हट सकती है. इस मामले पर दायर एक जनहित याचिका में त्वरित सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अन्य प्रदेशों के रेड ज़ोन से राज्य में आने वाले सभी प्रवासियों को राज्य की सीमा पर ही क्वारंटीन किया जाए. हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर किसी में कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो उनकी जांच भी राज्य की सीमा पर ही की जाए और रिपोर्ट नेगेटिव हो तो ही तभी प्रवासी को राज्य में उसके गंतव्य तक भेजा जाए. कांग्रेस ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है को सरकार का कहना है कि फ़ैसला देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

मजबूरी में दायर की पीआईएल

उत्तराखंड में कोरोना वायरस, कोविड-19, संक्रमण की स्थिति पिछले कुछ दिन में विस्फोटक हो गई है. बीते तीन दिन में ही औसतन 10 पेशेंट पॉज़िटिव मिले हैं और संक्रमण का दायरा अब तक ग्रीन रहे ज़िलों में भी फैल गया है. कोरोना वायरस को लेकर उत्तराखंड सरकार सरकार की तैयारियों और कदमों को अपर्याप्त, बेकार बताते हुए हरिद्वार निवासी सचिदानंद डबराल ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी.



डबराल कहते हैं कि प्रदेश सरकार की तैयारी और रवैया इस कोरोना संकट से निबटने को लेकर शुरु से ही गलत रहा. सरकार एक के बाद एक ऐसे कदम उठा रही थी कि यह आशंक बढ़ती जा रही थी कि कोविड-19 का संक्रमण गांव तक फैल जाएगा इसलिए मजबूरी में पीआईएल दायर करनी पड़ी.



बता दें कि डबराल की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि एक बार यह संक्रमण गांव तक फैल गया तो भारी संकट आ जाएगा. इस याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट थर्मल टेस्टिंग को अपर्याप्त बता चुका है और रैपिड, एंटीजन टेस्ट करने की क्षमता के बारे में सवाल कर चुका है. वह आशंका जताते हैं कि स्थिति विस्फोटक होने के कगार पर पहुंच चुकी है और आशा जताते हैं कि सरकार हाईकोर्ट के निर्देश का पालन कर स्थिति को नियंत्रण में लाने की ईमानदार कोशिश करेगी.

कांग्रेस ने किया स्वागत

कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना हाईकोर्ट को इस आदेश के लिए साधुवाद देते हैं. वह कहते हैं कि हाईकोर्ट के आदेश से उनकी बात की तस्दीक हुई है कि सरकार को प्रवासियों को राज्य भर में नहीं जाने देना चाहिए था. धस्माना कहते हैं कि ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून, नैनीताल के मैदानी क्षेत्रों में आसानी से 10 लाख लोगों को इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन किया जा सकता है.

कांग्रेस सरकार से शुरु से यह मांग कर रही थी कि वह प्रवासियों को इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन करे और सुरक्षित साबित होने के बाद ही गांवों तक जाने दे. गांवों की स्थिति किसी से छुपी नहीं है, न जाने क्यों सरकार ने ऐसे फ़ैसले किए जो स्थिति को ख़राब ही बनाते हैं.

सरकार को आदेश का इंतज़ार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज उच्चाधिकारियों के साथ कोविड-19 संक्रमण की स्थिति की समीक्षा की. इसमें ग्राम प्रधानों को और सशक्त करने, स्वास्थ्य सुविधाओं को अपडेट रखने, चेकअप लगातार करने, कांटैक्ट ट्रेसिंग करने पर बात की गई. हाईकोर्ट के आदेश का इस हाई प्रोफ़ाइल मीटिंग में ज़िक्र नहीं हुआ.

राज्य सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने इस बारे में पूछे जाने पर न्यूज़ 18 से कहा कि हाईकोर्ट के फ़ैसले की कॉपी आ जाने के बाद ही कोई टिप्पणी की जा सकती है. उन्होंने कहा कि राज्य की सीमा (टेस्टिंग के संदर्भ में ) से हाईकोर्ट का क्या अर्थ है? रैपिड टेस्ट में निगेटिव पाए जाने पर व्यक्ति को क्वारंटीन करने की ज़रूरत है या नहीं? ऐसे बहुत सारी बातों के साफ़ होने के बाद ही टिप्पणी करना ठीक रहेगा.

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First published: May 20, 2020, 9:04 PM IST
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