उत्तराखंडः दमयंती रावत के आगे बौनी साबित होती सरकारें, पहले कांग्रेस, अब BJP सरकार ने साधी चुप्पी

विशेष परिस्थितियों में गुणावगुण के आधार पर छह महीने के भीतर यदि दोबारा प्रतिनियुक्ति पर जाना हो तो इसका अधिकार प्रशासकीय विभाग को होगा.
विशेष परिस्थितियों में गुणावगुण के आधार पर छह महीने के भीतर यदि दोबारा प्रतिनियुक्ति पर जाना हो तो इसका अधिकार प्रशासकीय विभाग को होगा.

दमयंती रावत (Damayanti Rawat) को श्रम मंत्री हरक सिंह रावत की करीबी माना जाता है. पुनर्गठन आदेश के तहत कामचलाऊ सचिव दमयंती रावत को हटाकर उनकी जगह श्रम विभाग के सचिव को बोर्ड का सचिव बनाया गया.

  • Share this:
देहरादून. उत्तराखंड की सरकार पिछले साढे़ तीन साल से बहुत जोर-शोर से जीरो टालरेंस ऑन करप्शन (Zero tolerance on corruption) का नारा देती आ रही है. लेकिन पावर कॉरीडोर में पावरफुल लोगों के इस जीरो टालरेंस के कोई मायने नहीं है. ऐसा ही एक नाम है दमयंती रावत (Damayanti Rawat) का, जो पिछली कांग्रेस सरकार (Congress Government) में भी नियम-कानूनों को धता बताकर मन माफिक सरकारी पोस्ट पर काबिज रहीं, तो अब जीरो टालरेंस वाली त्रिवेंद्र सरकार भी उनके आगे नतमस्तक है. आखिर कौन हैं दमयंती रावत...

उत्तराखंड की सियासत इन दिनों खूब गरम है. मामला है उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का. उत्तराखंड सरकार ने बोर्ड के अध्यक्ष पद पर काबिज श्रम मंत्री हरक सिंह रावत को हटा कर पूरे बोर्ड का ही पुनर्गठन कर डाला. कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर मंत्री की जगह श्रम बोर्ड के अध्यक्ष दायित्वधारी शमशेर सिंह सत्याल को बैठा दिया, तो इससे श्रम मंत्री हरक सिंह रावत खासे नाराज हैं. वहीं, हाल ही में उन्होंने कहा था कि मैं 2022 का चुनाव नहीं लड़ना चाहता हूं. अब इसको इसी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है. इसी बोर्ड में सचिव पद पर तैनात हैं दमयंती रावत.

हरक सिंह रावत की करीबी
दमयंती रावत को श्रम मंत्री हरक सिंह रावत की करीबी माना जाता है. पुनर्गठन आदेश के तहत कामचलाऊ सचिव दमयंती रावत को हटाकर उनकी जगह श्रम विभाग के सचिव को बोर्ड का सचिव बनाया गया, लेकिन ताज्जुब इस बात का अगले 24 घंटे के भीतर ही सचिव दमयंती रावत की ये कहकर दोबारा ताजपोशी कर दी गई कि उनको हटाने का आदेश गलती से हो गया था.
कौन हैं दमयंती रावत


दमयंती रावत मूल रूप से शिक्षा विभाग में खंड शिक्षा अधिकारी हैं. साल 2012 में जब उत्तराखंड में कांग्रेस सत्ता में आई तो हरक सिंह रावत कृषि मंत्री बनाए गए. तब दमयंती रावत खंड शिक्षा अधिकारी सहसपुर, ग्रेड वेतन 6600  के पद पर तैनात थी. कृषि विभाग में दमयंती रावत के लिए बकायदा विशेष कार्याधिकारी का निसंवर्गीय पद ग्रेड वेतन 8700 स़ृजित किया गया और इस पर प्रतिनियुक्ति के जरिए दमयंती रावत की ताजपेाशी की गई. हालांकि, तत्कालीन शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने एनओसी देने से मना कर दिया था. लेकिन दमयंती रावत बेरोकटोक प्रतिनियुक्ति पर आ गई. यही नहीं कुछ समय बाद उनका ओहदा बढ़ाकर उन्हें कृषि विभाग में उत्तराखंड बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण अभिकरण के निदेशक पद पर तैनात  कर दिया गया. लेकिन, 2016 में सत्ता के समीकरण गड़बड़ाए और मंत्री हरक सिंह रावत को अपनी विधायकी से हाथ धोना पड़ा तो इसका असर दमयंती रावत पर भी पड़ा.

नतीजा 2016 में  बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण अभिकरण के डायरेक्टर पद से छुट्टी कर उन्हें मूल विभाग को वापस कर दिया गया. लेकिन, दमयंती रावत ने एक साल दो महीने तक वापस अपना मूल विभाग भी ज्वाइन नहीं किया. कृषि विभाग से विदाई के बाद दमयंती रावत ने दस  जुलाई 2017 को शिक्षा विभाग में ज्वाइनिंग दी. सवाल उठा कि एक साल दो महीने वे कहां गायब रही. इसके लिए शिक्षा विभाग ने उनको आरोप पत्र थमा दिया. दमयंत्री रावत ने आरोपों के जवाब में चिकित्सा प्रमाण पत्रों के साथ ही जो  स्पष्टीकरण दिया उस पर आज भी फैसला नहीं हो पाया है. लेकिन, 31 अक्टूबर 2017 को उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी, विण, पिथौरागढ़ के पद पर नियुक्ति दे दी गई.

मार्च 2017 में भाजपा की सरकार बन चुकी थी
इसे दमयंती रावत का रुतबा ही कहा जाएगा कि तमाम नियम कानूनों को ताक पर रखती आ रही दमयंती रावत ने  पिथौरागढ़ में ज्वाइनिंग नहीं ली. इसके पीछे एक कारण ये भी है कि मार्च 2017 में भाजपा की सरकार बन चुकी थी और हरक सिंह रावत को वन एवं श्रम  मंत्री बनाया गया था. हरक सिंह रावत अब दमयंती को अपने विभाग में लाना चाहते थे. इसके लिए श्रम विभाग के अधीन कर्मकार कल्याण बोर्ड सबसे उपयुक्त पाया गया. दमयंती रावत के लिए अपर कार्याधिकारी का पद भी खोज लिया गया. मंत्री हरक सिंह रावत पहले श्रम विभाग के सचिव के बजाए खुद बोर्ड के अध्यक्ष बने और फिर 15 दिसंबर 2017 को बोर्ड ने शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर दमयंती रावत को प्रतिनियुक्ति के लिए कार्यमुक्त करने का पत्र भेजा. लेकिन अबकी बार शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय दमयंती रावत को एनओसी न देने पर अड़ गए.

इसकी परवाह न दमयंती रावत ने की और न हरक सिंह ने. बिना एनओसी के ही दिसंबर 2017 में दमयंती रावत को अपर कार्याधिकारी कर्मकार कल्याण बोर्ड में यह कहकर तैनाती दे दी गई कि वह अपने विभाग से शीघ्र एनओसी उपलब्ध करा देंगी. लेकिन, दमयंती रावत को आज तक एनओसी नहीं मिली. यहां भी पूर्ववर्ती सरकार की तरह कहानी देाहराई गई. विशेष कार्याधिकारी से जुलाई 2018 में उन्हें सचिव पद पर तैनाती दी गई. आदेश में लिखा गया कि नियमित तैनाती होने तक कामचलाऊ व्यवस्था के तहत अग्रिम आदेशों तक उन्हें बोर्ड का सचिव बनाया जाता है. तब से दमयंती रावत बेरोकटोक बोर्ड के सचिव की कुर्सी पर विराजमान हैं. इसी सचिव पद पर रहते हुए उन पर श्रमिकों के नाम पर मशीन, साइकिल आदि खरीदने में करोड़ों रूपए घोटाले के आरोप लग रहे हैं. क्या हुआ दमयंती रावत की एनओसी का नियम कहता है कि सरकारी सेवक को जो प्रतिनियुक्ति पर जा चुका हो, उसे दूसरी बार प्रतिनियुक्ति पर जाने  के लिए कम से कम दो साल अपने मूल विभाग में सेवा देना अनिवार्य है.

इसका अधिकार प्रशासकीय विभाग को होगा
विशेष परिस्थितियों में गुणावगुण के आधार पर छह महीने के भीतर यदि दोबारा प्रतिनियुक्ति पर जाना हो तो इसका अधिकार प्रशासकीय विभाग को होगा. इससे कम अवधि के लिए वित्त विभाग की सहमति आवश्यक है. लेकिन, इसे पॉवर कारीडोर में पहुंच ही कहेंगे कि इनसबको धत्ता बताते हुए दमयंती रावत विभाग में तैनाती देने के छह महीने से भी काफी पहले दोबारा प्रतिनियुक्ति पर चली गई. कर्मकार कल्याण बोर्ड के लिए जब दमयंती रावत की एनओसी की फाइल शिक्षा विभाग की सचिव भूपेंद्र कौर औलख के पास आई तो दो जनवरी 18 को औलख ने लिखा कि दमयंती रावत लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर हैं.

आरोप पत्र पर आए उनके स्पष्टीकरण पर भी अभी तक निर्णय नहीं हुआ है. प्रतिनियुक्ति की समय सीमा पांच साल भी पूर्ण हो चुकी है. ऐसे में दमयंती रावत प्रतिनियुक्ति की अर्हता पूरी नहीं करती हैं. अत: उन्हें प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाना संभव नहीं है. सचिव औलख की इस टिप्पणी पर  नौ जनवरी को सीएम त्रिवेंद्र रावत ने भी अपनी सहमति जताई है. सीएम की सहमित के बाद 16 जनवरी 2018 को सचिव भूपेंद्र कौर औलख ने महानिदेशक विधालयी शिक्षा को पत्र लिखा कि दमयंती रावत का प्रतिनियुक्ति पर जाने का प्रस्ताव औचित्यहीन है. उनकी प्रतिनियुक्ति संभव नहीं है. इसलिए एनओसी नहीं दी जा सकती.

कर्मकार कल्याण बोर्ड में बतौर सचिव काम कर रही है
लेकिन ताजुब्ब की बात है कि सीएम के निर्देश और पूरे सिस्टम को धत्ता बताकर दमयंती रावत आज भी दूसरे विभाग यानि की कर्मकार कल्याण बोर्ड में बतौर सचिव काम कर रही है. जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी का कहना है कि दमयंती रावत की इस नियमविरूद्व प्रतिनियुक्ति पर जीरो टालरेंस का नारा देने  वाली सरकार और उसके कारिंदों की चुप्पी आर्श्चजनक है. उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग उठाई है. न्यूज 18 ने इस संबंध में दमयंती रावत से उनके ऑफिस जाकर बात करने की कोशिश की, लेकिन दमयंती रावत बिना बात किए अपने ऑफिस से ही निकल गई.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज