पटना से हरी झंडी मिली, अब दिल्ली पर हैं नज़रें...  ऋषिकेश में बाढ़ को रोकने के लिए भेजा गया है प्रस्ताव
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पटना से हरी झंडी मिली, अब दिल्ली पर हैं नज़रें...  ऋषिकेश में बाढ़ को रोकने के लिए भेजा गया है प्रस्ताव
ऋषिकेश दौरे में गंगा के बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का जायज़ा लेते विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल.

विधानसभा अध्यक्ष ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा, 51 करोड़ रुपये की बाढ़ नियंत्रण योजना के बारे में बताया  

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ऋषिकेश. गंगा और उसकी सहायक नदियों के उफन आने पर तटीय इलाकों में बाढ़ से होने वाले नुकसान को अब रोका जाएगा. इसके लिए तैयार प्रस्ताव को जल्द ही केंद्र सरकार से हरी झंडी मिल सकती है. इसके बाद ऋषिकेश के बाढ़ से प्रभावित होने वाले इलाकों को बचाने के लिए काम किया जाएगा. ऋषिकेश विधायक और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने आज यहां बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद यह दावा किया.

फ्लड कंट्रोल कमेटी की हरी झंडी 

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत  बाढ़ग्रस्त नदियों में तटबंध बनाने और बाढ़ सुरक्षा कार्य के लिए लगभग 51 करोड़ रुपये लागत की एक योजना भारत सरकार के माध्यम से गंगा फ्लड कंट्रोल कमेटी, पटना को प्रेषित की गई थी. अच्छी बात यह है कि वहां से इसे तकनीकी स्वीकृति मिल गई है.



विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि अब यह प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग, भारत सरकार में स्वीकृति के अंतिम चरण में है. वहां से स्वीकृति मिलने के बाद बजट जारी हो जाएगा और फिर तुरंत की बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के कार्य किए जाएंगे.
बता दें कि मानसून में ऋषिकेश के गंगा तट के इलाकों में गंगा की सहायक नदियों में उफान आ जाता है और गौहरीमाफ़ी, श्यामपुर, छिद्दरवाला, रायवाला और हरिपुर के गंगा तट क्षेत्र में बसे गांव हर साल बाढ़ की मार झेलते हैं. बाढ़ से खेतों की उपजाऊ मिट्टी बह जाती है और पशुओं का भी नुकसान होता है.

हर साल बह जाते हैं पुश्ते 

यहां निवास कर रहे लोग सालों से की मांग कर रहे हैं कि सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा दीवार बनाए ताकि नदी का पानी गांव के अंदर न घुस पाए. सिंचाई विभाग बाढ़ का पानी रोकने के लिए पुश्ते बनाता भी है लेकिन वे हर बार बह जाते हैं और नदियों का पानी गांव में प्रवेश कर जाता है.

हर साल के इस नुकसान को रोकने के लिए बनाई गई योजना को गंगा फ्लड कमेटी की मंज़ूरी मिलने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि अब बाढ़ को रोकने का पुख्ता इंतजाम होगा. इसके बाद सॉंग, सुसवा नदी के उफान पर आने से तटीय इलाकों में नुक़सान नहीं होगा.
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