गुप्ता बंधुओं की शादी के साथ ही विरोध, समर्थन भी जारी... ‘रिस्ट्रिक्शन के साथ हों ऐसे आयोजन’

गुरुवार को शादी समारोह निपटने के बाद गुप्ता परिवार तो निकल जाएगा लेकिन बहुत से सवाल उत्तराखंड की फ़िज़ाओं में तैरते रहेंगे.

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: June 19, 2019, 1:42 PM IST
गुप्ता बंधुओं की शादी के साथ ही विरोध, समर्थन भी जारी... ‘रिस्ट्रिक्शन के साथ हों ऐसे आयोजन’
औली में गुप्ता बंधुओं का विवाह समारोह जारी है तो राज्य में इसे लेकर वाद-विवाद भी चल रहा है.
Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: June 19, 2019, 1:42 PM IST
औली में गुप्ता बंधुओं की लग्ज़री वेडिंग को लेकर राज्य में बुद्धिजीवी वर्ग दो-फाड़ हो गया है. मंगलवार से शुरु हुआ विवाह समारोह 22 तारीख तक चलेगा. इसके विरोध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चमोली की डीएम और राज्य प्रदूषण निंयत्रण बोर्ड को इस समारोह पर नज़र रखने को कहा है. मुख्यमंत्री ने इस विवाद को अनावश्यक बताया है तो स्थानीय पर्यटन कारोबारी पूछ रहे हैं कि पर्यावरण नुक़सान किस कीमत पर किया जा रहा है? गुरुवार को शादी समारोह निपटने के बाद गुप्ता परिवार तो निकल जाएगा लेकिन बहुत से सवाल उत्तराखंड की फ़िज़ाओं में तैरते रहेंगे.

डेस्टिनेशन वेडिंग के इंतज़ाम भी हैं?

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को गुप्ता बंधुओं की शादी पर कहा था कि सरकार की कोशिशें राज्य को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की हैं ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और राज्य की अर्थव्यवस्था सुधरे. उन्होंने इस शादी के विरोध को ग़लत बताया.

‘पलायन एक चिंतन’ के संयोजक रतन असवाल औली में गुप्ता बंधुओं की शादी और रणवीर सिंह-दीपिका पादुकोण की इटली में डेस्टिनेशन वेडिंग की तुलना पर कहते हैं कि इटली जैसी जगहों में ऐसे आयोजनों के लिए जगह चिन्हित हैं और वहां सुविधाएं विकसित हैं. वहां निश्चित दायरे में आने-जाने, रहने-खाने, सुरक्षा के इंतज़ाम पूरे हैं. वह पूछते हैं कि क्या ऐसी सारी चीज़ें सरकार ने औली में विकसित कर ली हैं?

'स्थानीय लोगों से भेदभाव'

असवाल यह भी कहते हैं कि इटली जैसी जगहों में कोई कहीं भी जाकर ऐसे आयोजन नहीं कर सकता  लेकिन पैसे की चमक के आगे झुकी सरकार ने औली में घास के बुग्यालों को तहस-नहस करने की इजाज़त दे दी. वह सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि स्थानीय लोगों, छोटे-बड़े स्थानीय व्यवसाइयों को बुग्यालों पर रात को कैंपिंग की इजाज़त दिलाने के लिए सरकार ने एनजीटी, सुप्रीम कोर्ट में पैरवी क्यों नहीं की?

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पूर्व पर्यटन मंत्री केदार सिंह फोनिया को औली को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का श्रेय जाता है. वह कहते हैं, “औली दुनिया के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है. इसको विश्वविख्यात बनाने के लिए ऐसे आयोजन होने चाहिए, लेकिन रिस्ट्रिक्शन के साथ.”

'जितनी क्षमता है उतने ही आएं'

फोनिया कहते हैं औली की सेंसेटिविटी का ख़्याल रखा जाना चाहिए. औली में जीएमवीएन के गेस्ट हाउस, वहां पहले से मौजूद प्राइवेट होटल्स में जितने लोग आ सकते थे उतनों को ही इस समारोह में बुलाना चाहिए था. लोगों के रुकने के लिए टैंट कॉलोनी बनाना, यह उचित नहीं है. औली में ज़रुर ऐसे आयोजन हों लेकिन रिस्ट्रिक्शन्स के साथ.

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फोनिया यह भी कहते हैं हमें इस बात से मतलब नहीं होना चाहिए कि शादी में 200 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं या नहीं. इससे स्थानीय दुकानदारों, स्थानीय व्यवसाइयों, स्थानीय लोगों को कितना फ़ायदा हो रहा है? फ़र्क इस बात से पड़ता है.

'पर्यटन को फ़ायदा मिलेगा'

जोशीमठ में दो 3 स्टार होटल चलाने वाले माधव प्रसाद सेमवाल उत्तराखंड उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री भी हैं. औली में हो रही गुप्ता बंधुओं के विवाह समारोह से उन्हें सीधा कोई फ़ायदा नहीं मिल रहा है लेकिन वह इस तरह के आयोजनों का स्वागत करते हैं और इन्हें प्रदेश के हित में बताते हैं.

सेमवाल कहते हैं कि पर्यावरण की चिंता तो पर्यावरणविद् करेंगे लेकिन जब ऐसे आयोजन होते हैं तो स्थानीय व्यवसाइयों को कुछ न कुछ फ़ायदा मिलता ही है. इसके अलावा इतने बड़े आयोजनों से क्षेत्र की पब्लिसिटी भी होती है. सेमवाल कहते हैं कि अगर कोई बॉलीवुड स्टार जैसे सिलेब्रिटी आएंगे तो औली की ख़ूबसूरती को देखकर वह भी अभिभूत होंगे. वह भी तो जाकर माउथ पब्लिसिटी करेंगे और यहां फ़िल्म की शूटिंग या फिर आने की योजना बनाएंगे. इसलिए भी ऐसे आयोजन प्रदेश के लिए बहुत अच्छे हैं.

(with inputs from Robin Singh Chauhan)

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First published: June 19, 2019, 1:33 PM IST
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