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पार्टी की भलाई के लिए बागियों के स्वागत के लिए भी तैयार हैं हरीश रावत... लेकिन इन शर्तों के साथ

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: November 18, 2019, 1:03 PM IST
पार्टी की भलाई के लिए बागियों के स्वागत के लिए भी तैयार हैं हरीश रावत... लेकिन इन शर्तों के साथ
अब तक सीबीआई केस में गिरफ़्तारी की आशंका के बीच झूल रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी पुराने गिले-शिकवे मिटाने को तैयार हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

हरीश रावत (Harish) का कहना है कि गिले-शिकवे तो रहेंगे ही लेकिन पार्टी की भलाई के लिए नाराज़गी को साइड करने के लिए वह तैयार हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल शुरु हो गई है. प्रदेश में अब अगला चुनाव 2022 में विधानसभा के लिए होना है और इसे लेकर कांग्रेस में खदबदाहट शुरु हो गई है. 2016 में सत्तासीन पार्टी को झटका देने वाले और तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार को गिराने वाले नेताओं के लिए भी पार्टी के दरवाज़े खुल गए हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक सीबीआई केस में गिरफ़्तारी की आशंका के बीच झूल रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी पुराने गिले-शिकवे मिटाने को तैयार हैं.

गिले-शिकरे तो रहेंगे ही 

उत्तराखंड में सबसे ख़राब स्थिति में पहुंच गई कांग्रेस के पास 11 से ज़्यादा विधायक होते अगर 2016 में 10 नेता बगावत कर पार्टी न छोड़ते. माना जाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए यह निजी झटका था लेकिन 2017 में ऐतिहासिक हार झेलने वाले रावत अब पुरानी बातों को दफ़न करने को तैयार हैं लेकिन शर्तों के साथ.

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि गिले-शिकवे तो रहेंगे ही लेकिन पार्टी की भलाई के लिए नाराज़गी को साइड करने के लिए भी वह तैयार हैं. हालांकि हरीश रावत इसके लिए एक शर्त भी रखते हैं और वह शर्त है समय की. रावत कहते हैं कि अभी, जबकि पार्टी को मजबूत बनाने की ज़रूरत है, तब जो आएगा उसका स्वागत होगा. बाद में जब सारे संकट गुज़र जाएंगे तब आने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.

कभी माफ़ नहीं करना चाहिए 

हरीश रावत तो बागियों को माफ़ करने को तैयार हैं लेकिन पार्टी के युवा नेता इसमें बहुत इच्छुक नज़र नहीं आते. कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी कहते हैं कि पार्टी को संकट में डालने वालों को कभी माफ़ नहीं करना चाहिए. वह आशा जताते हैं कि पार्टी आलाकमान कोई भी फ़ैसला लेते समय स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं का ध्यान ज़रूर रखेगा.

दरअसल यह तय है कि पुराने नेताओं के आने से कांग्रेस में नए नेताओं को मुश्किल होगी. जैसा कि प्रकाश जोशी कहते हैं कि संकट के समय पार्टी को बचाने, बनाए रखने वालों के योगदान को याद रखा जाना चाहिए. युवा नेताओं को डर है कि पुराने नेताओं के आ जाने से मेहनत कोई करेगा और रहमत किसी पर होगी.
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First published: November 18, 2019, 12:59 PM IST
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