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कांग्रेस विधायक धामी के मामले में हरीश रावत ने साधी चुप्पी, जानिए इसके पीछे की वजह
Dehradun News in Hindi

Kishore Kumar Rawat | News18Hindi
Updated: January 27, 2020, 7:20 PM IST
कांग्रेस विधायक धामी के मामले में हरीश रावत ने साधी चुप्पी, जानिए इसके पीछे की वजह
हरीश रावत का हरीश धामी के मामले में चुप रहना भी बड़ी राजनीति की ओर इशारा है. (File Photo)

हरीश रावत ने पहले भी कई बार नाराज़ धामी को मनाया है लेकिन इस बार धामी के तेवर बहुत तल्ख हैं.

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  • Last Updated: January 27, 2020, 7:20 PM IST
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देहरादून. बात-बात पर अपनों और विपक्ष पर सोशल मीडिया में टिप्पणी करने वाले हरीश रावत फिलहाल कांग्रेस विधायक हरीश धामी के मामले में चुप है. अपने विरोधियों, सरकार और अपने समर्थकों को हरीश रावत सभी सीधे और कभी इशारों में सोशल मीडिया से संदेश देते रहते हैं लेकिन उनके समर्थन में कांग्रेस तक से बग़ावत को तैयार हरीश धामी को लेकर कांग्रेस में जारी बवाल पर वह ख़ामोश हैं और इसी से सवाल उठ रहे हैं कि ऐसा क्यों है?

बड़ी राजनीति का इशारा

हरीश रावत न सिर्फ़ कांग्रेस, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति में​ बड़े नेता हैं. मौजूदा कांग्रेस में संभवतः हरीश रावत ही ऐसे नेता हैं, जिनकी राजनैतिक हैसियत को दिल्ली में भी पहचाना जाता है और यह इत्तेफ़ाक नहीं कि वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और असम प्रभारी हैं.

हरीश रावत की चुप्पी पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों की भी निगाहें हैं क्योंकि रावत उत्तराखंड में मौजूद रहें या नहीं, सोशल मीडिया से वह राजनीतिक भूचाल लाते रहे हैं. इसलिए जानकार मान रहे हैं कि हरीश धामी के मामले में चुप रहना भी बड़ी राजनीति की ओर इशारा है.

धामी की नाराज़गी

यह ध्यान रखना भी ज़रूरी है कि हरीश धामी ही वह विधायक हैं जिन्होंने हरीश रावत के सीएम बनने के बाद अपनी धारचूला से विधायकी उनके लिए छोड़ी थी. लेकिन जब हरीश धामी ने नई कार्यकारिणी में सचिव बनाए जाने से नाराज़ होकर इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है तो भी हरीश रावत चुप हैं.

धामी ने तो यहां तक कह दिया है कि वह हरीश रावत के कहने पर भी वे अपना फ़ैसला नहीं बदलेंगे. वैसे हरीश रावत ने पहले भी कई बार नाराज़ धामी को मनाया है लेकिन इस बार धामी के तेवर बहुत तल्ख हैं.कांग्रेस की मुश्किल

हरीश रावत के खास माने जाने वाले धामी के तेवरों को देखते हुए लग रहा है कि पार्टी हाईकमान या हरीश रावत के विरोधी हरीश रावत के खिलाफ पार्टी में लॉबिंग करें. वैसे 2017 और 2019 के चुनावों में पार्टी का जो हाल हुआ है उससे उबरना पार्टी के लिए आसान नहीं है और कम से कम तब तक तो संभव नहीं है जब तक पार्टी एकजुट नहीं हो जाती.

राजनीतिक गणित कहता है कि सिर्फ़ 11 विधायकों पर सिमट गई कांग्रेस का अगर एक विधायक भी पार्टी से कम होता है तो असर 2022 के चुनावों में इसका सीधा मनोवैज्ञानिक और राजनैतिक असर होगा. जानकार यह भी मान रहे हैं कि कांग्रेस को टूटने से इस समय सिर्फ़ हरीश रावत ही बचा सकते हैं और उनकी चुप्पी को तूफ़ान से पहले की ख़ामोशी भी कहा जा रहा है.

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First published: January 27, 2020, 6:30 PM IST
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