ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बाद क्या फिर से ग़ैर हो गया गैरसैंण?
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ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बाद क्या फिर से ग़ैर हो गया गैरसैंण?
गैरसैंण को लेकर हरीश रावत लगातार सक्रिय रहे हैं. पिछले साल शीतकालीन सत्र देहरादून में करवाया गया तो उन्होंने गैरसैंण में धरना दिया था. (फ़ाइल फ़ोटो)

हरीश रावत ने 'ग्रीष्मकालीन राजधानी में सरकार के कामों को तलाशने के लिए' 9 अगस्त को गैरसैंण जाने का ऐलान किया है.

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देहरादून. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत 9 अगस्त को गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी में सरकार के कामों को तलाशने जा रहे हैं. इसके बाद उत्तराखंड में एक बार फिर से गैरसैंण के मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है. दरअसल हरीश रावत ने एक ट्वीट कर कहा था, "ग्रीष्म काल 15 सितंबर तक रहेगा. समय आ गया है 15 अगस्त से पहले गैरसैंण जाकर ग्रीष्मकालीन सरकार के दर्शन और उसके कामकाज का आकलन कर लिया जाए. मैं इस पुण्य कार्य को पूरा करने के लिए 9 अगस्त को गैरसैंण जाऊंगा."

सचिवालय कहां है?

हरीश रावत के इस ऐलान के बाद गैरसैंण एक बार फिर से सुर्खियों में है. हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर गैरसैंण के दौरे की बात क्या लिखी प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है. उत्तराखंड की राजनीति में गैरसैंण बीजेपी, कांग्रेस और यूकेडी जैसे क्षेत्रीय राजनीतिक दल का प्रमुख मुद्दा रहा है. यही नहीं यह मुद्दा विधानसभा चुनावों मैं हमेशा पार्टियों के घोषणा पत्र में भी रहा है. इसलिए अगर गैरसैंण के मुद्दे पर बीजेपी या कांग्रेस कोई बात करती हैं तो पूरे प्रदेश की राजनीति गरमा जाती हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है



पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्म काल राजधानी घोषित कर दिया है और राजधानी का मतलब होता है सरकार, विधानसभा भवन नहीं. विधानसभा भवन तो वहां पहले से है. उन्होंने कहा कि वह गैरसैंण में सरकार देखने जा रहे हैं, सचिवालय देखने जा रहे हैं. वही सचिवालय जिसके लिए उनकी सरकार ने 57 करोड़ रुपये का फंड जारी किया था.
घोषणा पर अमल भी ज़रूरी 

हरीश रावत ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मैं यह भी देख लूंगा कि सरकार का कौन सा अंग वहां काम कर रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ घोषणा से काम नहीं चलता बल्कि उस पर अमल भी करना पड़ता है.

याद दिला दें कि इसी साल मार्च में हुए गैरसैंण में बजट सत्र के दौरान त्रिवेंद्र सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन घोषित कर दिया था. इससे लोगों को उम्मीद बंधी थी कि गैरसैंण मैं अब विकास कार्य तेजी से होंगे. लंबे समय से गैरसैंण को राजधानी घोषित करने की मांग हालांकि आधी ही पूरी हुई थी और गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी बना था लेकिन लोगों में यह उम्मीद जाग गई थी कि अब गैरसैंण मैं बहुत सारे काम तेज़ी से होंगे.

भाजपा ने वादा निभाया

हरीश रावत के दौरे के ऐलान से भाजपा सकते हैं. दरअसल भाजपा को लग रहा था कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर उसने फिलहाल यह मुद्दा खत्म कर दिया है. लेकिन हरीश रावत इसे इतनी आसानी से खत्म होते देखने को तैयार नहीं.

हालांकि हरीश रावत के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कहा कि हरीश रावत को सुर्खियों में रहने की आदत है इसलिए वह ऐसे बयान देते हैं ताकि सुर्खियों में रहें. भगत ने कहा कि भाजपा सरकार ने जो वादा किया था वह निभाया है और गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि बीजेपी सरकार ने जन भावनाओं के मुताबिक ही काम किया है. गैरसैंण में विकास कार्यों के सवाल पर भगत ने कहा कि सरकार ने घोषणा कर दी है और अब धीरे-धीरे उस पर काम किया जा रहा है.
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