उत्तराखंड में रेस्क्यू के दौरान पहले भी हुए हैं उत्तरकाशी जैसे हादसे, इन्हें टालना है संभव

News18 Uttarakhand
Updated: August 23, 2019, 9:21 PM IST
उत्तराखंड में रेस्क्यू के दौरान पहले भी हुए हैं उत्तरकाशी जैसे हादसे, इन्हें टालना है संभव
उत्तरकाशी में बुधवार को हुए हैलिकॉप्टर क्रैश में पायलट समेत 3 लोगों की मौत हो गई थी.

उत्तरकाशी में दोनों ही हैलिकॉप्टर ट्रॉलियों की तारों में उलझकर दुर्घटनाग्रस्त हुए. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन हादसों को टाला जा सकता था?

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उत्तरकाशी में आज एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया है. इसके लिए पायलट, को-पायलट के कौशल को श्रेय देने का अर्थ है कि ऐसे ही हादसे में बुधवार को तीन जानें जाने के लिए पायलट, को-पायलट को अकुशल बताना. इसलिए जब तक हादसे के कारणों का विश्लेषण न कर लिया जाए तब तक बच गए लोगों को ख़ुशकिस्मत मानना ही ठीक है. अब तक हम यही जानते हैं कि दोनों हादसों में एक चीज़ समान थी और वह थी दुर्घटना का कारण या दुर्घटना का तरीका. दोनों ही हैलिकॉप्टर सेबों को सड़क तक पहुंचाने के लिए लगाई गई ट्रॉलियों की तारों में उलझकर दुर्घटनाग्रस्त हुए. ऐसे में यह सवाल तो उठता ही है कि क्या इन हादसों को टाला जा सकता था.

2 चक्कर ठीक कटे
बता दें कि उत्तरकाशी के इसी इलाके में बुधवार को एक हैलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैरिटेज कंपनी का वह हैलिकॉप्टर ट्रॉली की तारों से उलझ गया था. इस दर्दनाक हादसे में पायलट, को-पायलट और हैंडलर की मौत हो गई थी. यह भी बता दें कि दुर्घटनाग्रस्त हैलिकॉप्टर को उड़ा रहे कैप्टन लाल एक बेहद अनुभवी पायलट थे और कई रेस्क्यू ऑपरेशन्स में हिस्सा ले चुके थे.

बुधवार के हादसे की पुनरावृत्ति आज फिर हुई. रेस्क्यू ऑपरेशन में लगा एक और हैलिकॉप्टर आज उसी तरह दुर्घटनाग्रस्त हुआ. आराकोट से राशन पहुंचाने के लिए चीवां जा रहा हैलिकॉप्टर ट्रॉली की तारों में उलझकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. ख़ास बात यह है कि यह इस हैलिकॉप्टर का तीसरा चक्कर था. यानि कि वह दो चक्कर सुरक्षित लगा चुका था, तीसरे में दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

uttarkashi emergency landing, उत्तरकाशी में हैलिकॉप्टर की एमरजेंसी लैंडिग के बाद घायल पायलट और को-पायलट को पीठ पर 5 किलोमीटर ऊपर सड़क तक लाया गया.
उत्तरकाशी में हैलिकॉप्टर की एमरजेंसी लैंडिग के बाद घायल पायलट और को-पायलट को पीठ पर 5 किलोमीटर ऊपर सड़क तक लाया गया.


 रेस्क्यू ऑपरेशन में हादसे
राहत की बात रही कि बेहद मुश्किल परिस्थितियों में हैलिकॉप्टर को नदी किनारे पत्थरों पर एमरजेंसी लैंडिंग करवाने में पायलट कामयाब रहे. दोनों पायलटों को हल्की चोट आईं जिन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद देहरादून रेफ़र कर दिया गया.
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लेकिन राज्य में ये पहली घटनाएं नहीं हैं जब राहत बचाव में लगा हैलिकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ हो. 2013 की आपदा के दौरान केदानाथ में ही एक एमआई17 सहित दो हैलिकॉप्टर क्रैश हुए थे जिनमें 19 एयरफ़ोर्स कर्मचारियों समेत 24 लोगों की जान गई थी.इसके बाद 2017 में केदारनाथ में एक एमआई 17 मंदिर के पीछे क्रैश हो गया था लेकिन गनीमत रही कि उसमें सवार सभी लोग भी सुरक्षित रहे.

uttarkashi emergency landing, आज भी बुधवार को हुए हादसे की तरह हैलिकॉप्टर ट्रॉली की तारों से उलझ गया था.
उत्तरकाशी में आज भी बुधवार को हुए हादसे की तरह हैलिकॉप्टर ट्रॉली की तारों से उलझ गया था.


ये हैं बचाव के उपाय
ख़ास बात यह है कि 2013 की आपदा के बाद उत्तराखंड में हर तहसील में हैलिपैड बनाने की योजना थी लेकिन कुछ ही तहसीलों में अभी तक हैलीपैड बन पाए हैं. इसकी वजह से आपात स्थिति आने पर अस्थाई हैलिपैड बनाने पड़ते हैं जैसे कि उत्तरकाशी में बनाए गए हैं- 11 हैलिपैड. लेकिन ये कितने सुरक्षित हैं, इन दो दुर्घटनाओं से पता चल गया है.

इसके अलावा इन दुर्घटनाओं से बचने का एक और तरीका है. उड्डयन मामलों के जानकार डॉक्टर राजीव धर कहते हैं कि सिंगल इंजन से राहत और बचाव कार्य न करवाए जाएं, इनके लिए हमेशा डबल इंजन का इस्तेमाल किया जाए. धर कहते हैं कि हैलिकाप्टरों पर राडार नहीं होते जिससे मौसम में खराबी के चलते दुर्घटना होने की आशंका बढ़ जाती है. सरकार को चाहिए कि राहत और बचाव के लिए डबल इंजन के हैलिकाप्टर का ही उपयोग किया जाए.

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First published: August 23, 2019, 8:12 PM IST
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