Uttarakhand : तीन चर्चित मामलों पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जानें ये तीन मामले कौन-कौन से थे
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Uttarakhand : तीन चर्चित मामलों पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जानें ये तीन मामले कौन-कौन से थे
अनुपमा गुलाटी हत्याकांड समेत तीन महत्त्वपूर्ण मामलों पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.

देहरादून (Dehradun) के चर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में राजेश गुलाटी की अंतरिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को आपत्ति दर्ज करने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया है.

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  • Last Updated: September 15, 2020, 12:15 AM IST
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नैनीताल. सोमवार को हाईकोर्ट में उत्तराखंड (Uttarakhand) के तीन बड़े मामले में सुनवाई हुई. देहरादून (Dehradun) के चर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में राजेश गुलाटी की अंतरिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट (High Court) ने उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) को आपत्ति दर्ज करने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया है.

शांतिकुंज में भगदड़ का मामला

दूसरा मामला हरिद्वार के शांतिकुंज में हवन के दौरान मची भगदड़ का मामला था. इस मामले में हाईकोर्ट ने घटना के सभी दस्तावेज एक महीने के भीतर दाखिल करने का आदेश सरकार को दिया है. अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने इस मामले में जनहित याचिका दाखिल करते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है. आपको याद दिला दें कि 11 नवंबर 2011 को शांतिकुंज में हवन के दौरान मची भगदड़ में 20 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 67 लोग घायल हुए थे.



शांतिकुंज प्रमुख पर रेप का मामला
तीसरा चर्चित मामला भी हरिद्वार का ही था. यहां शांतिकुंज प्रमुख पर नाबालिग से रेप का आरोप लगा था. इस मामले में हाईकोर्ट ने गृह सचिव नितेश झा को अवमानना नोटिस जारी किया है. इस मामले में कोर्ट ने 3 महीने में जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के आदेश का पालन न होने पर अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने अवमानना याचिका दाखिल की है.

अनुपमा गुलाटी हत्याकांड

अनुपमा गुलाटी हत्याकांड की सुनवाई मामले न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा के खण्डपीठ में हुई. आपको याद दिला दें कि पिछली सुनवाई के दौरान चर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड (Anupama Gulati Murder Case) के दोषी राजेश गुलाटी को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी थी. हाईकोर्ट ने राजेश की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए राजेश गुलाटी (Rajesh Gulati) को शपथ पत्र दाखिल करने को कहा था. आपको बता दें कि 17 अक्टूबर 2010 को राजेश गुलाटी ने ही अपनी पत्नी अनुपमा गुलाटी की हत्या कर दी थी. फिर उसके शव को 72 टुकड़े कर फ्रीज में डाल दिया था. 12 दिसंबर 2010 को अनुपमा के भाई दिल्ली (Delhi) से देहरादून (Dehradun) आए तो हत्या का खुलासा हो हुआ. इसके बाद 1 सितंर 2017 को निचली अदालत ने दोषी राजेश गुलाटी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 15 लाख का जुर्माना भी लगाया था. कोर्ट ने कहा था कि अर्थदंड से 70 हजार राजकीय कोष में जमा करने होंगे. बाकि राशि बच्चों के बालिग होने तक बैंक में जमा किया जाएगा. कोर्ट ने भी इस हत्याकांड को जघन्य अपराध की श्रेणी में माना था. इस आदेश को राजेश गुलाटी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. राजेश के अधिवक्ता ने कोर्ट में अंतरिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था.
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