उच्च शिक्षा मंत्री का ज्ञान महाकुंभ पर ज़ोर, कॉलेजों की बदहाली पर नज़र नहीं

चमोली जिले के घाट में कॉलेज किराए के घर में चल रहा है और यमुनोत्री के बड़कोट में बिना परमानेंट फैकल्टी वाले कॉलेज में बच्चे 12 किलोमीटर पैदल चलकर आते हैं.

News18 Uttarakhand
Updated: September 12, 2018, 6:31 PM IST
उच्च शिक्षा मंत्री का ज्ञान महाकुंभ पर ज़ोर, कॉलेजों की बदहाली पर नज़र नहीं
उत्तराखंड के ज्ञान महाकुंभ में उच्च शिक्षा की क्वालिटी सुधारने पर बात होगी लेकिन सवाल यह है कि कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर कौन चिंतन करेगा?
News18 Uttarakhand
Updated: September 12, 2018, 6:31 PM IST
उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री का पूरा जोर ज्ञान महाकुंभ की तैयारियों पर है. इसमें उच्च शिक्षा की क्वालिटी सुधारने पर बात होगी लेकिन सवाल यह है कि कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर कौन चिंतन करेगा? दूरदराज के इलाक़े में चमोली और उत्तरकाशी में हायर एजुकेशन बेहाल है जिससे ज्ञान-महाकुंभ के मकसद पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं. चमोली जिले के घाट में कॉलेज किराए के घर में चल रहा है और यमुनोत्री के बड़कोट में बिना परमानेंट फैकल्टी वाले कॉलेज में बच्चे 12 किलोमीटर पैदल चलकर आते हैं.

चमोली के घाट में 2014 में कॉलेज खुला तो स्थानीय लोगों को उम्मीद बंधी कि हायर एजुकेशन का बच्चों का सपना अब सपना ही नहीं रह जाएगा. लेकिन पहले तो कॉलेज में प्रिंसिपल ही नहीं थे जो विद्यार्थियों के आंदोलन के बाद आए. पर बच्चों के लिए बैठने की जगह अभी तक नहीं बन पाई है.

दरअसल ये कॉलेज किराए के घर में शुरू हुआ था. शुरू में लगता था कि जल्द ही कॉलेज को अपनी बिल्डिंग मिल जाएगी लेकिन चार साल बाद भी इसकी कोई सूरत नज़र नहीं आती. विद्यार्थी क्लास के बाहर बैठते हैं और मौसम ख़राब होने पर घर चले जाते हैं.

उत्तरकाशी में यमुनाघाटी के बड़कोट में बने कॉलेज के पास बिल्डिंग तो है लेकिन टीचर्स नहीं. यमुनाघाटी में कॉलेज खुल जाने से यहां के बच्चों को पढ़ने के लिए उत्तरकाशी या देहरादून तो नहीं जाना पड़ता लेकिन टीचर्स ही नहीं हैं तो पढ़ेंगे क्या?

छात्र बताते हैं कि पॉलीटिकल साइंस विषय का टीचर ही नहीं है. हालत तो यह है कि बीएससी कोर्स शुरू तो कर दिया गया लेकिन तीन साल तक इसका टीचर ही नहीं आया. अब आप खुद ही सोचिए जिन्होंने बीएससी विषय लिया होगा उन्होंने कैसे पढ़ाई की होगी?

श्रीदे‌व सुमन यूनिवर्सिटी की बात करें तो गढ़वाल मंडल के 51 सरकारी डिग्री कॉलेज यूनिवर्सिटी से संबद्ध हैं. इनमें से ज्यादातर डिग्री कॉलेज खुलने की घोषणा 2002 से 2007 तक तिवारी सरकार के दौरान हुई. बावजूद इसके बीते 10 साल में उच्च शिक्षा का हाल सुधरने के बजाय बिगड़ा है और बुनियादी ज़रूरत पूरी किए बगैर ही कॉलेज चल रहे हैं.

उच्च शिक्षा मंत्री ज्ञान महाकुंभ के आयोजन से पहले ही अपनी पीठ-थपथपा रहे हैं लेकिन ज़रूरत है कि उच्च शिक्षा का स्तर सुधारने और गुणवत्ता बढ़ाने से पहले बात उन मूलभूत जरूरतों पर की जाए, जिनके पूरे न होने से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है.
Loading...
(चमोली से प्रभात पुरोहित और बड़कोट से नितिन चौहान के साथ देहरादून से दीपांकर भट्ट की रिपोर्ट)

उच्च शिक्षा भी आएगी सेवा के अधिकार के तहत, हज़ारों छात्रों को होगा फ़ायदा

बद से बदतर होती जा रही है देवभूमि की उच्च शिक्षा व्यवस्था
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर