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10 साल से बिना रजिस्ट्रेशन दौड़ रहे हैं UPCL के हाइड्रॉलिक ट्रक... अब लाखों रुपये पड़ेगी पैनल्टी, जेब कटेगी उपभोक्ताओं की
Dehradun News in Hindi

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: December 26, 2019, 11:38 AM IST
10 साल से बिना रजिस्ट्रेशन दौड़ रहे हैं UPCL के हाइड्रॉलिक ट्रक... अब लाखों रुपये पड़ेगी पैनल्टी, जेब कटेगी उपभोक्ताओं की
हैरत वाली बात यह है कि UPCL के दो हाइड्रॉलिक ट्रक दो-एक महीने नहीं बल्कि पिछले 10 साल से बगैर रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं.

हाल ही में एक ट्रक की कार से टक्कर हो गई थी. पुलिस ने सुलह करवाई और तब पता चला कि इन ट्रकों का तो रजिस्ट्रेशन ही नहीं है.

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देहरादून. उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के दो हाइड्रॉलिक ट्रक (Hydraulic truck)  बिना नंबर के शहर में दौड़ रहे हैं. हैरत वाली बात यह है कि ये दोनों ट्रक दो-एक महीने नहीं बल्कि पिछले 10 साल से बगैर रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं. नगर निगम ने न तो इन गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन (Registration of Vehicles) की जहमत उठाई और न ही कभी इनके इंश्योरेंस किए. यूपीसीएल को तो छोड़ें न जाने क्यों इन गाड़ियों पर न कभी ट्रैफिक पुलिस की नज़र पड़ी औप न ही आरटीओ की. अब रजिस्ट्रेशन कराने पर करीब सात लाख रुपये तक पैनल्टी पड़ेगी. लेकिन विभाग को क्या, वह फिर बिजली के बिल बढ़ा देगा.

अब क़ाग़ज़ मंगाने की तैयारी 

यूपीसील ने साल 2010 में आयोजित कुंभ मेले में फील्ड वर्क के लिए हाइड्रॉलिक ट्रक खरीदे थे. कुंभ कार्य निपटने के बाद ये हाइड्रॉलिक ट्रक देहरादून भेज दिए गए. इनमें से एक ट्रक निगम के साउथ डिवीजन और दूसरा नार्थ डिवीजन को सौंपा गया. तब से आज तक इन वाहनों को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले मेंटेनेंस कार्यों के लिए उपयोग में लाया जा रहा है लेकिन इनका रजिस्ट्रेशन नहीं कराने की ज़हमत नहीं उठाई गई.



एक ट्रक की कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई जा रही है. निगम अधिकारियों से पूछा गया तो उनकी नींद टूटी. उनका कहना है कि ट्रकों के क़ाग़ज़ मंगाकर रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा.



टक्कर हुई तो खुला राज़ 

रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से इन ट्रकों का इंश्योरेंस भी नहीं हुआ है. ऐसे में यदि कोई दुर्घटना हो जाती है तो इसके लिए ज़िम्मेदार कौन होगा? यह सवाल हर गाड़ी के सड़क पर उतरने से पहले ही पूछा जाता है. बता दें कि हाल ही में एक ट्रक की कार से टक्कर हो गई थी. गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. बाद में किसी तरह सुलह कराकर पुलिस ने मामला शांत कराया गया. इसके बाद ही यह पता चला कि इन ट्रकों का तो रजिस्ट्रेशन ही नहीं है.

अब परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं कि इतने लंबे समय से सड़क पर घूम रहे इन वाहनों पर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की नज़र क्यों नहीं गई? विभाग ने कभी चेकिंग के दौरान इन वाहनों का चालान नहीं काटा. इससे परिवहन विभाग भी सवालों के घेरे में आ गया है. आरटीओ अधिकारियों का कहना है रजिस्ट्रेशन कराने में 5 प्रतिशत महीने के हिसाब से पैनल्टी पड़ेगी, जो करीब 7 लाख रुपये होगी.

यूपीसीएल के अधीक्षण अभियंता शैलेन्द्र सिंह का कहना है कि वाहनों से संबंधित कागज मंगाए जा रहे हैं. कागज आते ही इनके रजिस्ट्रेशन की कार्रवाई की जाएगी.

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First published: December 26, 2019, 11:36 AM IST
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