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टिहरी बांध को निजी हाथों में दिया गया तो विरोध करेंगे : प्रदेश कांग्रेस

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: October 13, 2019, 3:55 PM IST
टिहरी बांध को निजी हाथों में दिया गया तो विरोध करेंगे : प्रदेश कांग्रेस
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर उपाध्याय ने कहा कि निजीकरण के बाद रोजगार पर लगे सैकड़ों स्थानीय युवा बेरोजगार हो जाएंगे

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर उपाध्याय ने कहा कि टिहरी बांध के निजीकरण के बाद रोजगार पर लगे सैकड़ों स्थानीय युवा बेरोजगार हो जाएंगे. इससे राज्य की जल संपदा की लूट का भी रास्ता खुल जाएगा.

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देहरादून. टिहरी बांध (Tehri Dam) को निजी हाथों में देने की तैयारी चल रही है. ये आरोप प्रदेश सरकार पर कांग्रेस (Congress) नेता किशोर उपाध्याय ने लगाया है. एक प्रेस वार्ता में किशोर उपाध्याय (Kishore Upadhyay) ने कहा कि केंद्र सरकार बीएसएनएल (BSNL) और ओएनजीसी (ONGC) की तरह अब टीएचडीसी (THDC) को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है. उन्होंने इसे राज्य के जल संसाधनों की लूट करार देते हुए कहा कि निजीकरण (Privatisation) के बाद रोजगार पर लगे सैकड़ों स्थानीय युवा बेरोजगार हो जाएंगे. इससे राज्य की जल संपदा की लूट का भी रास्ता खुल जाएगा.

राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल बताया

किशोर उपाध्याय ने इसे टिहरी बांध के लिए जल समाधि देने वाले 125 गांव की जनता के साथ अन्याय करार देते हुए कहा कि कोई भी परियोजना 25 साल के बाद राज्य सरकार में निहित हो जाती है. टिहरी बांध भी 2026 तक उत्तराखंड के स्वामित्व में आ जाता, लेकिन प्राइवेटाइजेशन होने के बाद इस पर भी संकट खड़ा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के साथ-साथ ये पूरे देश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए. उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल बताया. अगर टिहरी बांध को निजी हाथों में सौंपा गया तब इसका सक्रियता के साथ विरोध किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे. उन्होंने कहा कि टिहरी के नाम को मिटाने की साजिश राज्य और केंद्र सरकार कर रही है.

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि किसी भी लिहाज से देश, राज्य और टिहरी उत्तरकाशी के लोगों के हित में नहीं होगा.


टिहरी बांध का निर्माण देश में हित में हुआ है

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि टिहरी बांध का निर्माण 125 गांवों को डूबो कर किया गया. इसमें उत्तराखंड की संपदाएं चली गईं. इसका निर्माण देश हित में न कि किसी व्यक्ति के हित में किया गया है. उन्होंने कहा कि अगर टिहरी बांध निजी हाथों में जाएगी तो ये हम सभी के लिए चिंता का विषय होगा. इससे टीएचडीसी में काम कर रहे लोगों की छंटनी का खतरा है जिसका विरोध किया जाएगा. इसके अलावा वहां पर देश की सीमा की सुरक्षा का सवाल है. उन्होंने कहा कि यह किसी भी लिहाज से देश, राज्य और टिहरी उत्तरकाशी के लोगों के हित में नहीं होगा.

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First published: October 13, 2019, 3:52 PM IST
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