प्लास्टिक से डीजल का कॉमर्शियल उत्पादन जल्द! प्लांट शुरू कर रहा है IIP

देहरादून से मसूरी के बीच चलने वाली प्लास्टिक एक्सप्रेस 100 किलो तक प्लास्टिक वेस्ट को कलेक्ट कर रही है, जो पहले पहाड़ों के पर्यावरण को ख़राब कर रहा था.

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: June 10, 2019, 10:30 PM IST
प्लास्टिक से डीजल का कॉमर्शियल उत्पादन जल्द! प्लांट शुरू कर रहा है IIP
भारतीय पेट्रोलियम संस्थान प्लास्टिक से डीज़ल बनाने की तकनीक का व्यवसायिक उत्पादन जल्द ही शुरु कर सकता है.
Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: June 10, 2019, 10:30 PM IST
देश को गैस बचाने वाले पीएनजी बर्नर देने वाले भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) जल्द ही प्लास्टिक से डीज़ल बनाने की तकनीक का तोहफ़ा दे सकता है. प्लास्टिक से डीज़ल बनाने की तकनीक आईआईपी पहले ही ईजाद कर चुका था. अब जल्द ही इसका कॉमर्शियल उत्पादन के लिए टेस्ट किया जा रहा है. सब ठीक रहा तो अगले महीने से यह तकनीक उद्योगों के लिए उपलब्ध हो सकती है. आईआईपी ने प्लांट के लिए प्लास्टिक की उपलब्धता के लिए गैर सरकारी संगठन गति फ़ाउंडेशन से क़रार किया है.

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पिछले साल नवंबर में आईआईपी ने पीएनजी बर्नर ईजाद किया था जिससे 20 फ़ीसदी तक गैस की बचत होती है. इन बर्नर के निर्माण के लिए आईआईपी ने कई कंपनियों के साथ क़रार किया है. यह बर्नर अब मिलने भी शुरु हो गए हैं. इसी के साथ आईआईपी ने प्लास्टिक से डीज़ल बनाने की तकनीक भी विकसित की थी. इस तकनीक से बने डीज़ल से आईआईपी में गाड़ियां चलाकर टेस्ट भी किए गए हैं. जल्द ही आईआईपी इस तकनीक का कॉमर्शियल प्रोडक्शन टेस्ट करने जा रहा है.

महीने भर में शुरु हो सकता है कॉमर्शियल प्रोडक्शन टेस्ट

आईआईपी के पीआरओर डॉक्टर डीसी पांडे के अनुसार एक टन प्लास्टिक के दोहन क्षमता का प्लांट अगले महीने शुरु हो सकता है. इसके सफल संचालन के बाद आईआईपी इस तकनीक को भी कॉमर्शियल प्रोडक्शन के लिए उपलब्ध करवा सकता है. प्लास्टिक उपलब्ध करवाने के लिए आईआईपी ने गति फ़ाउंडेशन के साथ करार किया है.

anoop nautiyal signing mou with IIP team, गति फ़ाउंडेशन के अनूप नौटियाल और आईआईपी साइंटिस्ट एमओयू पर साइन करते हुए
आईआईपी फ़ाउंडेशन और गति फ़ाउंडेशन के बीच प्लास्टिक से डीज़ल बनाने के प्लांट के लिए प्लास्टिक वेस्ट सप्लाई करने का अनुबंध हुआ है.


गति फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल के अनुसार महीने भर में प्लांट की ज़रूरत 6-8 टन यानि 6000 से 8000 किलो प्लास्टिक वेस्ट की होगी. इतना प्लास्टिक वेस्ट जुटाने की चुनौती आसान नहीं है लेकिन नौटियाल को यकीन है कि वह गति फ़ाउंडेशन इसे कर लेगा. दरअसल इस विश्वास के पीछे देहरादून से मसूरी के बीच चल रही प्लास्टिक एक्सप्रेस है. गति फ़ाउंडेशन और नेस्ले मिलकर इस प्लास्टिक एक्सप्रेस का संचालन कर रहे हैं.
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मैगी पॉएंट्स और प्लास्टिक वेस्ट

देहरादून से मसूरी की चढ़ाई शुरु होने से लेकर मसूरी तक 80 से ज़्यादा फ़ास्ट फ़ूड स्टॉल्स हैं जिन्हें मैगी पॉएंट के नाम से पहचाना जाता है. इसी तरह मसूरी से कैंपटी फ़ॉल के बीच में भी 80 से ज़्यादा मैगी पॉएंट्स हैं. कुल मिलाकर देहरादून के कैंपटी के बीच 200 से ज़्यादा मैगी पॉएंट्स हैं.

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देहरादून से कैंपटी फ़ॉल के बीच करीब 200 मैगी पॉएंट हैं.


मसूरी आने वाले पर्यटक ही नहीं स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में इन मैगी पॉएंट्स में खाने-पीने पहुंचते हैं. ज़ाहिराना तौर पर यहां बहुत बड़ी मात्रा में कूड़ा निकलता है जिसमें मैगी के रैपर, डिस्पोज़ेबल गिलास, प्लेट्स, बॉटल्स के रूप में प्लास्टिक कूड़ा बहुतायत में होता है. अभी तक यहां कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं थी. अमूमन दुकानदार या तो इस कूड़े को जला दिया करते थे या फिर उसे पहाड़ी से नीचे गिरा देते थे.

प्लास्टिक एक्सप्रेस 

देश में अपनी तरह के पहले प्रयोग में नेस्ले के साथ मिलकर गति फाउंडेशन ने 15 मई से एक प्लास्टिक एक्सप्रेस शुरू की. इस पहल के तहत मैगी पाएंट्स चलाने वाले दुकानदारों को प्लास्टिक का कूड़ा अलग से इकट्ठा करने को कहा गया. इसके लिए इन्हें बैग भी दिए गए. नौटियाल कहते हैं कि दुकानदारों के सहयोग के यह प्लास्टिक एक्सप्रेस 100 किलो तक प्लास्टिक वेस्ट को कलेक्ट कर रही है जो पहले पहाड़ों के पर्यावरण को ख़राब कर रहा था.

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प्लास्टिक एक्सप्रेस देहरादून-कैंपटी फ़ॉल के बीच रोज़ करीब 100 किलो प्लास्टिक वेस्ट कलेक्ट कर रही है.


अनूप नौटियाल को यह भी लगता है कि जैसे लोग व्यवस्थाएं सुधरने का इंतज़ार कर रहे थे. जैसे ही उन्हें सुविधा मिली उन्होंने प्लास्टिक को जलाना बंद कर दिया, उसे खुले में फेंकना बंद कर दिया. वह कहते हैं कि पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील राज्य में इस पहल को चार धाम रूट के साथ अन्य सभी संवेदनशील स्थानों तक विस्तार दिया जाना चाहिए.

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First published: June 10, 2019, 8:16 PM IST
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