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Budget 2020: रेल बजट ने उत्तराखंड वासियों को किया निराश, धरी रह गई लोगों की आस
Dehradun News in Hindi

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: February 2, 2020, 11:39 AM IST
Budget 2020: रेल बजट ने उत्तराखंड वासियों को किया निराश, धरी रह गई लोगों की आस
रेल बजट ने उत्तराखंड वासियों को किया निराश, मसूरी को रेल लाइन से जोड़ने का सपना नहीं हुआ पूरा

उत्तराखंड राज्य (Uttarakhand State) में अगर रेल बजट (Railway Budget) की बात करें तो यहां लोगों को निराशा हाथ लगी है.

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देहरादून. उत्तराखंड राज्य (Uttarakhand State) में अगर रेल बजट (Railway Budget) की बात करें तो यहां लोगों को निराशा हाथ लगी है. माना जा रहा था कि इस बार पिटारे से राज्य के लिए कुछ नई या पुरानी रेल लाइनों के लिए सौगात मिलेगी, जिसमें अंग्रेजों के ज़माने से शुरू हुई मसूरी-देहरादून रेल लाइन (Mussoorie-Dehradun Railway Route) भी शामिल होगी, लेकिन लोगों की आस धरी की धरी रह गई.

मसूरी को रेल लाइन से जोड़ने का सपना नहीं हुआ पूरा

इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए बजट 2020 से मसूरी-देहरादून वासियों को बड़ी उम्मीद थी कि सरकार इस बजट में मसूरी-देहरादून रेल के लिए कोई सौगात देगी, लेकिन बजट में कुछ देखने को नहीं मिला. दरअसल, पहाड़ों की रानी मसूरी अंग्रेजों की पसंदीदा स्थानों में से एक थी, जिसे रेल लाइन से जोड़ने के लिए अंग्रेजों ने पहला प्रयास सन् 1896 में किया था. यह रेल लाइन हरिद्वार से मसूरी जानी थी, लेकिन दून के बड़े व्यापारियों के विरोध के चलते रेल लाइन को पहले देहरादून फिर दून से मसूरी ले जाने का निर्णय लिया गया.

लाखों के निवेश के बाद भी आज तक तैयार नहीं हुई कोई रूपरेखा 



उन्होंने बताया कि पहाड़ों की रानी मसूरी को रेल लाइन से जोड़ने के लिए एक बार फिर सन् 1921 में कोशिशें शुरू हुई थी, जिसके लिए एक कंपनी तैयार की गई थी. देहरादून-मसूरी इलेक्ट्रिक ट्राम वे कंपनी लिमिटेड जिसने 36 लाख रुपए बजट से काम शुरू किया था. इस बजट में नाभा पंजाब के महाराजा रिपुदमन सिंह ने 10 लाख रुपए का निवेश किया था, जिसमें मसूरी राजपुर टनल का भी निर्माण शुरू हुआ था. इस इलेक्ट्रिक रेलवे नेटवर्क को राजपुर को मसूरी से झारीपानी और बरलोगगंज के माध्यम से जोड़ा जाना था.

इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने कहा कि अंग्रेजों ने जिस रेल लाइन पर कार्य शुरू किया था, उस पर स्वतंत्र भारत में कोई रूपरेखा आज तक तैयार नहीं हो पाई. हालांकि देश के कई हिल स्टेशनों को रेलवे लाइन मिली, लेकिन मसूरी में रेल लाइन लगता है स्वतंत्र भारत में एक सपना बनकर ही रहेगा.

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First published: February 2, 2020, 11:39 AM IST
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