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चंपावत: लॉकडाउन में लिखना-पढ़ना सीख रहे 100 से ज्यादा निरक्षर नेपाली नागरिक

ऐसे 50 से अधिक नेपाल के नागरिकों को साक्षर किया गया है.

ऐसे 50 से अधिक नेपाल के नागरिकों को साक्षर किया गया है.

भारत-नेपाल सीमा (Indo-Nepal Border) से लगे चंपावत (Champawat) जिले में लॉकडाउन के दौरान 100 से ज्यादा नेपाली नागरिक लिखना और पढ़ना सीख रहे हैं.

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चम्पावत (उत्तराखंड). भारत-नेपाल सीमा (Indo-Nepal Borrder) से लगे चंपावत जिले में लॉकडाउन के दौरान 100 से ज्यादा नेपाली नागरिक लिखना और पढ़ना सीख रहे हैं. यहां प्रशासन की पहल से नेपाली नागरिकों को बनबसा टनकपुर राहत शिविर रखा गया है. टनकपुर और बनबसा के राहत शिविर  में रह रहे इन नेपाली नागरिको के लिए यह शिविर किसी पाठशाला से कम नहीं है. बेसिक जिला शिक्षा अधिकारी सत्यनारायण के मुताबिक राहत शिविरों में मौजूद 107 लोग निरक्षर थे.  ऐसे 50 से अधिक नेपाल के नागरिकों को साक्षर किया गया है. इनमें उत्तर प्रदेश के भी लोग शामिल हैं. इसके लिए जिला अधिकारी एस एन पांडे ने निर्देश दिया था. साक्षर हुए नेपाल के साथ यूपी के इन लोगों को साक्षर प्रमाण पत्र दिए गए हैं.

55 साल से अधिक उम्र के भी हैं छात्र
राहत शिविरों में चल रही इस पाठशाला में ऐसे भी लोग हैं जिनकी उम्र 55 साल से अधिक है. बचपन में आर्थिक अभाव में जिन्हें माता-पिता पढ़ा नहीं पाए बाद में घर संभालने की जिम्मेदारी के कारण शिक्षा से दूर रहें. ऐसे लोगों को जब लॉकडाउन के दौरान पाठशाला में पढ़ने को लिखा तो जो सपना छूट गया था उसे पूरा करने का मौका मिला.

भारत निभा रहा नेपाल के साथ मित्रता का धर्म
ऐसा नहीं है यहां सिर्फ बुजुर्ग लोगों ने अपने नाम को लिखना सीखा. इस लिस्ट में 20 से 30 साल के युवा भी शामिल हैं. जो चंपावत जिले के राहत शिविरों में रहकर अब अंगूठे की जगह नाम लिखना सीख चुके हैं. यहां मौजूद ये लोग पूरी तरह सकारात्मक ऊर्जा से भरे हुए हैं. नेपाल के नागरिक भी मानते हैं कि कोरोना संकट के दौरान मित्र राष्ट्र नेपाल के लिए दोस्ती निभा रहा है. इन सभी का कहना है लॉकडाउन में भारत में की गई इस पाठशाला को वो सारी जिंदगी याद करेंगे.





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