'पंचेश्वर बांध परियोजना को रद्द कर दे भारत, PM  मोदी करें नेपाल के प्रधानमंत्री से सीधे बात'
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'पंचेश्वर बांध परियोजना को रद्द कर दे भारत, PM  मोदी करें नेपाल के प्रधानमंत्री से सीधे बात'
पंचेश्वर बांध बनने से 30000 से ज़्यादा परिवार स्थापित हो जाएंगे. (विरोध की फ़ाइल फ़ोटो)

धारचूला विधायक हरीश धामी कहते हैं कि चीन के प्रभाव में आए कुछ कम्युनिस्ट भड़काने वाली बातें कर रहे हैं.

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देहरादून. नेपाल के बढ़ते विरोध के बीच उत्तराखंड में भारत में भी नेपाल को सख्त संदेश देने की भावना बलवती हो रही है. भारत के लिपुलेख सड़क का उद्धघाटन करने के बाद से ही नेपाल भारत विरोधी रुख अख़्तियार किए हुए है और तो और भारत के लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी पर अपना दावा जताते हुए अपनी संसद से इसके समर्थन में बिल भी पास कर चुका है. ये तीनों इलाके धारचूला विधानसभा के हिस्से हैं जहां के विधायक हरीश धामी हैं. धामी कहते हैं कि प्रधानमंत्री को इस मामले को हल करने के लिए सीधे नेपाल के प्रधानमंत्री से बात करनी चाहिए और इसके साथ ही चंपेश्वर बांध परियोजना को तुरंत रद्द कर देना चाहिए.

पंचेश्वर बांध से पर्यावरणीय नुकसान

करीब दो दशक पुरानी पंचेश्वर बांध परियोजना ने केंद्र में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद रफ़्तार पकड़ी है. ऐसे समय में जबकि उत्तराखंड आधिकारिक रूप से बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण से तौबा कर चुका हो भारत सरकार पंचेश्वर बांध परियोजना को आगे बढ़ाने पर आमादा है.



5040 मेगावाट की इस परियोजना के भूकंप सेंसेटिव ज़ोन 5 में पड़ने से भारी तबाही का खतरा तो है ही इसके बनने पिथौरागढ़, चंपावत और अल्मोड़ा के 30,000 परिवार भी विस्थापित होंगे. इसके अलावा इससे स्थानीय पर्यावरण और संस्कृति के भी छिन्न-भिन्न हो जाने की आशंका है. उत्तराखंड की स्टेट ऑफ़ एनवायरमेंट रिपोर्ट के अनुसार 193 मेडिसिनल प्लांट्स के अलावा 43 स्तनधारी, 70 पक्षी, 47 तितली और 30 मछली प्रजातियां लुप्त हो सकती हैं.
पर्यावरणविद् और स्थानीय निवासी दोनों ही इसका विरोध करते रहे हैं लेकिन सरकार इस बांध परियोजना पर लगातार आगे बढ़ रही है.

भारत के लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी पर अपना दावा जताते हुए नेपाल अपनी संसद से इसके समर्थन में बिल भी पास कर चुका है. ये तीनों इलाके धारचूला विधानसभा के हिस्से हैं जहां के विधायक हरीश धामी हैं.


कैंसिल करें बांध परियोजना

ऐसा भी माना जाता है कि इस परियोजना से भारत अपेक्षा नेपाल को ज़्यादा फ़ायदा होगा और भारत का ज़्यादा क्षेत्र डूब क्षेत्र में आ रहा है. ऐसे में जबकि नेपाली एफ़एम अब भारतीयों को उकसाने-अपमानित करने के लिए बॉर्डर एरिया में सुने जाने वाले एफ़एम रेडियो में भारत विरोधी गाने बजा रहा है भारतीयों में भी गुस्सा पनप रहा है.

धारचूला विधायक हरीश धामी कहते हैं कि चीन के प्रभाव में आए कुछ कम्युनिस्ट भड़काने वाली बातें कर रहे हैं. सीमांत इलाक़ों में रहने वाले नेपाली भी इस बात से दुखी हैं कि ऐसे लोगों की वजह से भारत से संबंध ख़राब हो सकते हैं. धामी कहते हैं बीजेपी सरकार नेपाल को खुश करने के लिए पंचेश्वर बांध परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ा रही थी लेकिन अब इस पर तुरंत रोक लगा देनी चाहिए.

धामी कहते हैं कि भारत के अब सख़्त कदम उठाने का समय आ गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तुरंत नेपाल के प्रधानमंत्री से फ़ोन पर दोटूक बात करनी चाहिए कि वह चीन के बहकावे में भारत से संबंध खराब न करे. इसके अलावा सेस्मिक ज़ोन 5 में आने वाली और क्षेत्र के पर्यावरण-संस्कृति को खत्म करने वाली पंचेश्वर बांध परियोजना को भी रद्द कर देना चाहिए.

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