लाइव टीवी

उत्तराखंड में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडडर्स, IPHS, लागू… अब सुधर जाएगी स्वास्थ्य व्यवस्था!

Deepankar Bhatt | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 18, 2019, 11:02 AM IST
उत्तराखंड में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडडर्स, IPHS, लागू… अब सुधर जाएगी स्वास्थ्य व्यवस्था!
उत्तराखंड में गुरुवार से आईपीएचएस लागू हो गया है लेकिन सवाल यह है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं में कितना सुधार आएगा?

उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य गठन से अब तक स्वास्थ्य सेवाएं (Health Services) सुधर न पाने की वजह से सही इलाज (Proper Treatment) के अभाव में लोगों की जानें जाने का सिलसिला आज भी जारी है.

  • Share this:
देहरादून. उत्तराखंड में अब सरकारी अस्पतालों का सिस्टम सुधारने और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स के मानक लागू होंगे. गुरुवार को शासन ने यह आदेश जारी कर दिया. ऐसे में सवाल यह है कि क्या इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स (IPHS) लागू करने से क्या उत्तराखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधर पाएगी? दरअसल नीति आयोग की हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट में कहा गया था कि उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है और इसलिए इसे खराब प्रदर्शन वाले राज्यों में शामिल किया गया था. नेशनल हेल्थ मिशन के प्रोजेक्ट में खराब हालत की बात खुद भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय कह चुका है.

क्या है IPHS मानक

बता दें कि IPHS मानकों के मुताबिक जहां तमाम अस्पतालों को मर्ज किया जाएगा. वहीं यह भी देखा जाएगा कि अस्पतालों में डॉक्टर और नर्सिंग के साथ स्टाफ की कोई कमी न रहे. इसके तहत साफ़-सफ़ाई से लेकर एडवांस मशीनों का होना भी ज़रूरी है.

IPHS लागू होने से क्या होंगे बदलाव

इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स लागू होने से उत्तराखंड में तमाम सरकारी अस्पतालों को मर्ज कर दिया जाएगा. महिला और बेस अस्पतालों भी एक हो जाएंगे इसलिए ज़िलों में अब ज़िला अस्पताल और उप-ज़िला अस्पताल होंगे.

कुल मिलाकर राज्य में अब कुल 13 डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, 21 सब डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, 80 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC), 52 प्राइमरी हेल्थ सेंटर (PHC) टाइप-बी, 526 प्राइमरी हेल्थ सेंटर (PHC) होंगे.

digital medical, IPHS मानकों के मुताबिक जहां तमाम अस्पतालों को मर्ज किया जाएगा. वहीं यह भी देखा जाएगा कि अस्पतालों में डॉक्टर और नर्सिंग के साथ स्टाफ की कोई कमी न रहे.
IPHS मानकों के मुताबिक जहां तमाम अस्पतालों को मर्ज किया जाएगा. वहीं यह भी देखा जाएगा कि अस्पतालों में डॉक्टर और नर्सिंग के साथ स्टाफ की कोई कमी न रहे.

Loading...

उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में अब डॉक्टरों के कुल 2604 पद होंगे. पहले राज्य में डॉक्टरों के कुल पद 2735 थी जिनमें से 131 पदों को कम कर दिया गया है.

क्या होगा फायदा?

हेल्थ सेक्टर में सुधार के लिए भारत सरकार तमाम योजनाएं चलाती है लेकिन कई बार उन योजनाओं का फायदा उसी सूरत में मिल पाता है जबकि राज्य में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स लागू हों. IPHS के मुताबिक ही बजट आवंटित किया जाता है.

उत्तराखंड में अब तक सरकारी अस्पताल इन मानकों के हिसाब से नहीं थे जिसकी वजह से कई बार उत्तराखंड को बजट नहीं मिल पाता था. इसी चिंता को देखते हुए कुछ वक्त पहले कैबिनेट ने IPHS मानक लागू करने को मंज़ूरी दी थी जिस पर शासनादेश जारी हो गया है.

no abmulance, no road in chakrata, पहाड़ों में अब भी बीमारों को पैदल पहले सड़क तक और फिर अस्पताल तक लाना पड़ता है जिससे मरीज़ों की जान पर बन आती है.
पहाड़ों में अब भी बीमारों को पैदल पहले सड़क तक और फिर अस्पताल तक लाना पड़ता है जिससे मरीज़ों की जान पर बन आती है.


चुनौती

नवंबर 2000 में उत्तराखंड के गठन से लेकर अबतक स्वास्थ्य सेवाएं सुधर नहीं पाई है जिसका बड़ा नुकसान उत्तराखंड की जनता को हुआ है. पहला नुकसान ये कि गंभीर बीमारी और दुर्घटना की स्थिति में तुरंत सही इलाज न मिलने से लोगों की जानें जाने का सिलसिला आज भी जारी है.

इसके अलावा अच्छे इलाज और सुविधाओं की कमी की वजह से लोग गांव छोड़कर शहरों, कस्बों में आने को मजबूर हो गए हैं और सीमांत गांव घोस्ट विलेज बनते जा रहे हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने लोगों को अच्छे और सस्ते इलाज का भरोसा दिलाने की चुनौती तो है ही.

ये भी देखें:

नीति आयोग ने दिखाया उत्तराखंड को आइना, स्वास्थ्य सेवा में सबसे फिसड्डी राज्यों में शामिल 

एंबुलेंस क्या पहुंचेगी वहां, जहां सड़क ही नहीं... पहाड़ी रास्तों में कंधों पर ज़िंदगी बचाने का सफ़र 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देहरादून से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 18, 2019, 10:54 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...