वरुणावत से है इंदिरा कॉलोनी को खतरा, वैज्ञानिकों की खाली करवाने की सलाह

2003 में भी उत्तरकाशी नगरी को वरुणावत पर्वत ने दहलाया था जिसके बाद सरकार ने इसके ट्रीटमेंट पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे.

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: September 4, 2018, 8:34 PM IST
वरुणावत से है इंदिरा कॉलोनी को खतरा, वैज्ञानिकों की खाली करवाने की सलाह
वरुणावत पर्वत की तलहटी में बसी इंदिरा कॉलोनी पर बोल्डर गिरने का ख़तरा अब भी बना हुआ है.
satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: September 4, 2018, 8:34 PM IST
उत्तरकाशी ज़िले में स्थित वरुणावत पर्वत कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है. वरुणावत पर्वत की तलहटी में बसी इंदिरा कॉलोनी पर बोल्डर गिरने का ख़तरा अब भी बना हुआ है. वैज्ञानिकों ने उत्तरकाशी प्रशासन और सरकार को वरुणावत के नीचे बसी इंदिरा कालोनी को खाली करवानी की सलाह दी है.

दरअसल उत्तरकाशी में वरुणाव्रत पर्वत में एक बार फिर भूस्खलन हो गया है. बीते बुधवार को वरुणाव्रत पर्वत के तांबाखानी शूट से इंदिरा कॉलोनी के मकानों में बड़े-बड़े बोल्डर गिरे थे और लोगों ने भागकर जान बचाई थी. प्रशासन ने कॉलोनी के बीस घरों को खाली करवा दिया था. सरकार ने वरुणावत पर्वत के तांबाखाणी की साइड वाले हिस्से के ट्रीटमेंट के लिए 6.62 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं.

लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि ख़तरा अभी टला नहीं है. पर्वत की तलहटी में बसी इंदिरा कॉलोनी पर बोल्डर गिरने से ख़तरा अब भी बना हुआ है. अब ज़िला-प्रशासन ने उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र से वरुणावत के ट्रीटमेंट पर सलाह मांगी है.

यूसेक के निदेशक डॉक्टर एमएस बिष्ट कहते हं कि पर्वत के नीचे बसी आबादी को विस्थापित किया जाना चाहिए. वह कहते हैं कि इंसान प्रकृति से नहीं टकरा सकता और जब ख़तरा हो तो उससे बचना ही सबसे अक्लमंदी का काम होता है.

बता दें कि साल 1991 में वरुणावत पर्वत से पत्थर गिरने शुरू हुए थे, जो समय समय पर लोगों में पैदा करते रहे हैं. 2003 में भी उत्तरकाशी नगरी को वरुणावत पर्वत ने दहलाया था जिसके बाद सरकार ने इसके ट्रीटमेंट पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे.

बिष्ट कहते हैं कि वह वर्ल्ड क्लास ट्रीटमेंट था लेकिन अब नया लैंड स्लाइड ज़ोन बन गया है तो उसका भी ट्रीटमेंट करना होगा. लेकिन सबसे पहले उन लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना होगा जो इस भूस्खलन से ख़तरे की जद में हैं.

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