चीन से तनाव पर यंग लेफ़्टिनेंट की बातः जोश में होश खोना अक्लमंदी नहीं... हर ओर से घेरना होगा चीन को
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चीन से तनाव पर यंग लेफ़्टिनेंट की बातः जोश में होश खोना अक्लमंदी नहीं... हर ओर से घेरना होगा चीन को
लेफ़्टिनेंट हीरा सिंह रावत अपने बैच के उन 10 और उत्तराखंड के दो ऑफ़िसर्स में शामिल हैं जिनका सेलेक्शन आर्मी के एविएशन कोर के लिए हुआ है.

एक युवक में और भारतीय सेना के एक अफ़सर में फ़र्क लेफ़्टिनेंट हीरा सिंह रावत की बात को सुनकर समझ आता है.

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देहरादून. लद्दाख में चीन की चालबाज़ी और धोखा देकर भारतीय सैनिकों को शहीद किए जाने के बाद से देश गुस्से में है. चीन से लड़ चुके पूर्व सैनिक फिर से मौका मिलने पर चीन से 1962 का बदला लेने की बात कह रहे हैं तो सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर भी लोगों का चीन के प्रति आक्रोश झलक रहा है. ऐसे समय में हमने बात की हाल ही में भारतीय थल सेना में शामिल हुए एक युवा सैन्य अफ़सर से. कमाल की बात यह है कि गुस्से में चीन को सबक सिखाने की बात कहने के बजाय भारतीय सेना का यंग ऑफ़िसर स्थिति को देखकर ठंडे दिमाग से फ़ैसला करने की बात करता है.

सेना में जाने वाली तीसरी पीढ़ी 

देहरादून के प्रेमनगर इलाक़े में रहने वाले मोहन सिंह रावत मूल रूप से चमोली के निवासी हैं. रिटायर्ड सूबेदार मोहन सिंह रावत का बेटा हीरा सिंह रावत इसी साल आईएम से पास होकर लेफ़्टिनेंट बना है. लेफ़्टिनेंट हीरा सिंह रावत अपने बैच के उन 10 और उत्तराखंड के दो ऑफ़िसर्स में शामिल हैं जिनका सेलेक्शन आर्मी के एविएशन कोर के लिए हुआ है यानी वह आर्मी में पायलट के रूप में सेवाएं देंगे.



चमोला के नारायण बगड़ के विनायक गांव के मूल निवासी हीरा सिंह रावत के दादा नारायण सिंह बुटोला रावत सेना से हवलदार रिटायर हुए थे और पिता मोहन सिंह रावत सूबेदार. सेना में भर्ती जाने वाली इस परिवार की वह तीसरी पीढ़ी हैं. कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इस बार अभूतपूर्व परिस्थतियां बनीं और उनके माता-पिता उनके कंधे पर सितारे नहीं लगा पाए और सभी अफ़सरों को सीधे अपनी यूनिट में जॉयनिंग देने को भी कहा गया. लेफ़्टिनेंट हीरा सिंह रावत से हमारी फ़ोन पर बात हुई.
हीरा सिंह रावत के दादा नारायण सिंह बुटोला रावत (दाएं) सेना से हवलदार रिटायर हुए थे और पिता मोहन सिंह रावत सूबेदार (बाएं).


जंग से दोनों देशों को नुकसान 

आपको ऐसा लग सकता है कि मौजूदा परिस्थितियों से बाकी देश की तरह यंग लैफ़्टिनेंट भी गुस्से में होंगे और चीन को मुहंतोड़ जवाब देने के बारे में सोच रहे होंगे. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से लेफ़्टिनेंट रावत शांत भाव से कहते हैं कि अभी तो ऐसा नहीं लग रहा है कि वॉर होगी. वैसे जंग होनी भी नहीं चाहिए क्योंकि इससे दोनों देशों को नुक़सान होगा.

इसके साथ ही वह यह भी कहते हैं कि भारत की पॉलिसी कभी पहला हमला करने की नहीं रही है लेकिन यह भी तय है कि कोई हम पर हमला करेगा, पत्थरबाज़ी करेगा तो हम उसको छोड़ेंगे भी नहीं.

लेफ़्टिनेंट रावत कहते हैं कि चीन जैसे दिमाग से भारत के साथ खेल रहा है, हमें भी वैसा ही करना होगा. हमें उस पर सैन्य दबाव बनाने के साथ ही कूटनीतिक मोर्चे पर भी घेरना होगा. जैसे कि भारत संयुक्त राष्ट्र में दूसरे देशों के साथ मिलकर उस पर दबाव बनाए और ज़मीन पर सैनिक मजबूती से टिके रहें.

lieutenant Heera Singh Rawat , लेफ़्टिनेंट रावत कहते हैं कि चीन जैसे दिमाग से भारत के साथ खेल रहा है, हमें भी वैसा ही करना होगा.
लेफ़्टिनेंट रावत कहते हैं कि चीन जैसे दिमाग से भारत के साथ खेल रहा है, हमें भी वैसा ही करना होगा.


युवक नहीं आर्मी ऑफ़िसर 

क्या ऐसे मौके पर उनके जैसे यंग ऑफ़िसर को गुस्सा नहीं आता, खून नहीं खौलता? इस सवाल के जवाब में लेफ़्टिनेंट रावत कहते हैं कि जोश में होश नहीं खोने चाहिए और ठंडे दिमाग से काम करना चाहिए. ऐसा नहीं होना चाहिए कि आप जोश में आकर ऐसा कोई काम कर दें जिससे बाद में सरकार को शर्मिंदा होना पड़े.

एक युवक में और भारतीय सेना के एक अफ़सर में फ़र्क लेफ़्टिनेंट हीरा सिंह रावत की बात को सुनकर समझ आता है. ऐसे ही भारतीय सेना को दुनिया की सबसे मजबूत और काबिल सेना में नहीं गिना जाता. आईएमए की ट्रेनिंग का महत्व भी चंद मिनटों की इस बातचीत से साफ़ हो जाता है.

जब तक देश को ऐसे युवा अफ़सर मिलते रहेंगे हमें विश्वास है कि हमारी सीमाएं सुरक्षित रहेंगी. लेफ़्टिनेंट हीरा सिंह रावत के साथ ही सभी यंग आफ़िसर्स और भारतीय सेना को हमारी बहुत-बहुत शुभकामनाएं.

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