UPCL, PTCUL में वेकेंसी के विरोध में खोला मोर्चा, जुगरान ने कहा- कोर्ट में देंगे चुनौती

ये वेकेंसी 2016 में करवाई गई परीक्षा को कैंसिल (Exam Cancellation) करने के बाद निकाली गई है.

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: August 26, 2019, 6:07 PM IST
UPCL, PTCUL में वेकेंसी के विरोध में खोला मोर्चा, जुगरान ने कहा- कोर्ट में देंगे चुनौती
यूपीसीएल और पिटकुल में जूनियर इंजीनियर के पदों पर वेकेंसी 2016 में करवाई गई परीक्षा को कैंसिल करने के बाद निकाली गई है. (प्रतीकात्मक फ़ोटो)
satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: August 26, 2019, 6:07 PM IST
राज्य सरकार ने यूपीसीएल (UPCL) और पिटकुल (PTCUL) में जूनियर इंजीनियर के रिक्त पदों (Vacancies) को भरने के लिए उत्तराखंड पब्लिक सर्विस सलेक्शन कमीशन (Uttarakhand Public Service Selection Commission) को प्रस्ताव भेज दिया है. इस प्रस्ताव पर पर यूकेएसएससी (UKSSC) आगे की कार्रवाई शुरू करे इससे पहले ही इस मामले का विरोध शुरु हो गया. दरअसल ये वेकेंसी 2016 में करवाई गई परीक्षा को कैंसिल (Exam Cancellation) करने के बाद निकाली गई है. सभी चयनित प्रत्याशी (Selected Candidates) इसका विरोध कर रहे हैं और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं.

परीक्षा आयोजन में सवाल 

मार्च, 2016 में राज्य सरकार ने 252 यूपीसीएल और पिटकुल में जूनियर इंजीनियर के 252 पदों के लिए लिखित परीक्षा करवाई थी. मार्च, 2018 में इनके परिणाम घोषित किए गए और 252 प्रत्याशियों का चयन किया गया. लेकिन इससे पहले कि इन्हें नौकरी दी जाती परीक्षा में असफल रहे छात्रों ने परीक्षा के आयोजन में घोटाले का आरोप लगाया.

इसके बाद हरिद्वार के ज़िलाधिकारी ने इस मामले की जांच की. डीएम ने जांच रिपोर्ट में कहा कि परीक्षा आयोजन में पारदर्शिता की कमी है इसलिए परीक्षा परिणाम संदिग्ध हैं. हरिद्वार डीएम की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने 2016 की परीक्षा को निरस्त कर दिया और पिछले हफ़्ते ही इन पदों पर दोबारा वेकेंसी निकालने का प्रस्ताव यूकेएसएससी को भेजा.

दोषी कौन? सज़ा क्यों नहीं?

2016 की परीक्षा में पास हुए अभ्यर्थी इसका विरोध कर रहे हैं. यह पूछ रहे हैं कि अगर परीक्षा के आयोजन में कोई गड़बड़ी हुई है तो यह गड़बड़ करने वालों को सज़ा क्यों नहीं हुई और अगर गड़बड़ नहीं हुई है तो किस आधार पर परीक्षा को निरस्त किया गया है.

सोमवार को देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में बीजेपी नेता और एक्टिविस्ट रविंद्र जुगरान ने कहा कि सरकार को संदेह के आधार पर फ़ैसले नहीं करने चाहिए. हरिद्वार के ज़िलाधिकारी ने जो जांच की है उसे सार्वजनिक करना चाहिए और अगर कोई दोषी है तो कार्रवाई करे. जुगरान ने कहा कि अगर सरकार फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं करती है तो इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी जाएगी.
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First published: August 26, 2019, 6:07 PM IST
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