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पंचायती राज कानून पर हाईकोर्ट के फ़ैसले की ग़लत व्याख्या, सबको मिलेगी छूट: जोत सिंह बिष्ट... 3 नई याचिकाएं दायर

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: September 20, 2019, 5:16 PM IST
पंचायती राज कानून पर हाईकोर्ट के फ़ैसले की ग़लत व्याख्या, सबको मिलेगी छूट: जोत सिंह बिष्ट... 3 नई याचिकाएं दायर
पंचायती राज संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के फ़ैसले की ग़लत व्याख्या की गई है.

जोत सिंह बिष्ट के अनुसार हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ़ शब्दों में Panchayati Raj Institutions लिखा है जिसका अर्थ यह हुआ कि इसमें सभी संस्थाएं शामिल हैं.

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पंचायती राज संशोधन एक्ट (Panchayati Raj Amendment Act) पर हाईकोर्ट के आदेश (High Court Decision) के बाद राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission)  ने स्पष्ट किया है कि यह फ़ैसला सिर्फ़ प्रधान और ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) सदस्य के पदों पर ही लागू होगा. राज्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि दो से अधिक बच्चों वाले सिर्फ़ प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों के चुनाव ही लड़ सकेंगे, क्षेत्र पंचायत (Kshetra Panchayat) सदस्य और जिला पंचायत (Zila Panchayat) सदस्य के पदों पर चुनाव लड़ने के काबिल ये अब भी नहीं हैं. लेकिन इस मामले में याचिकाकर्ता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जोत सिंह बिष्ट कहते हैं कि आदेश की ग़लत व्याख्या की गई है, हाईकोर्ट का आदेश सभी तरह की पंचायतों पर लागू होता है. इस बीच इस मामले में हाईकोर्ट में तीन और याचिकाएं दायर कर दी गई हैं.

राज्य निर्वाचन आयोग की व्याख्या

त्रिस्तरीय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया आज से शुरु हो गई है. इस बीच राज्य निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट का आदेश सिर्फ़ ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों पर लागू होगा क्योंकि हाईकोर्ट ने केवल पंचायती राज संशोधन अधिनियम के आर्टिकल 8 One R पर फैसला सुनाया है. यह आर्टिकल केवल ग्राम प्रधान और ग्राम सभा सदस्यों पर ही लागू होता है.

state election commission, राज्य निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने कहा कि पंचायती राज संशोधन एक्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला केवल प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के पदों पर ही लागू होगा.
राज्य निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने कहा कि पंचायती राज संशोधन एक्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला केवल प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के पदों पर ही लागू होगा.


भट्ट के अनुसार क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों पर पंचायती राज संशोधन अधिनियम के आर्टिकल 53 और जिला पंचायत सदस्य पदों पर आर्टिकल 90 के तहत 2 से अधिक बच्चे वाला व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता. राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि इस संबंध में सभी ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को एडवाइज़री जारी कर दी गई है.

हाईकोर्ट का आदेश सभी पर लागू

लेकिन पंचायती राज संशोधन अधिनियम, 2019 को हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट कहते हैं कि हाईकोर्ट के आदेश की ग़लत व्याख्या की गई है. बिष्ट कहते हैं कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ़ शब्दों में Panchayati Raj Institutions लिखा है (देखें तस्वीर) जिसका अर्थ यह हुआ कि इसमें सभी संस्थाएं शामिल हैं.
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decision on panchayati raj amendment act, पंचायती राज संशोधन अधिनियम, 2019 पर हाईकोर्ट के फ़ैसले में पंचायती राज इंस्टीट्यूशन्स लिखा गया है.
पंचायती राज संशोधन अधिनियम, 2019 पर हाईकोर्ट के फ़ैसले में पंचायती राज इंस्टीट्यूशन्स लिखा गया है.


कांग्रेस उपाध्यक्ष कहते हैं कि हाईकोर्ट ने हज़ारों लोगों को उनका हक़ दे दिया है और इसे उन तक पहुंचने से रोकने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी.

3 नई याचिकाएं

राज्य में नामांकन प्रक्रिया शुरु हो चुकी है और अब भी कंफ़्यूज़न की स्थिति बनी हुई है. इस कंफ्यूज़न को दूर करने के लिए आज हाईकोर्ट में तीन और याचिकाएं दायर कर दी गई हैं. अल्मोड़ा के पूर्व ज़िला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह महरा, धारी, नैनीताल के पूर्व प्रमुख कृपाल सिंह महरा और बलवंत सिहं बिष्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ज़िला पंचायत और क्षेत्र पंचायत को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और ग्राम पंचायत की तरह इनमें भी राहत देने की मांग की है.

माना जा रहा है कि मामले की गंभीरता और तात्कालिक निर्णय की ज़रूरत को समझते हुए सोमवार को इन पर फ़ैसला आ जाएगा.

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First published: September 20, 2019, 5:10 PM IST
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