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कलयुगी नारद ने जागर लगाकर किया उत्तराखंड के शहीदों का आवाहन... देवभूमि की हालत से नाराज़ दिखे तीलू रौतेली, माधो सिंह भंडारी

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: October 7, 2019, 7:34 PM IST
कलयुगी नारद ने जागर लगाकर किया उत्तराखंड के शहीदों का आवाहन... देवभूमि की हालत से नाराज़ दिखे तीलू रौतेली, माधो सिंह भंडारी
गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान के लिए देहरादून के परेड ग्राउंड में चल रहे धरने में सोमवार को मंडाण-जागर लगाई गई.

गढ़वाली के लोकप्रिय हास्य कलाकार कृष्णा बगोट इस कार्यक्रम में कलयुगी नगद नारायण बनकर शामिल हुए और मंडाण-जागर लगाई.

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देहरादून. गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान के लिए देहरादून के परेड ग्राउंड में चल रहे धरने में सोमवार को मंडाण-जागर लगाई गई. अपनी तरह के अनूठी मंडाण-जागर कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य के ज्वलंत प्रश्नों को उठाने की कोशिश की गई. गढ़वाली के लोकप्रिय हास्य कलाकार कृष्णा बगोट इस कार्यक्रम में कलयुगी नगद नारायण बनकर शामिल हुए और मंडाण-जागर लगाई. बता दें कि उत्तराखंड में जागर देवताओं के आवाहन गीत हैं और माना जाता है कि जिस देवता का जागर में लगाया जाता है वह किसी मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर भक्तों से बात करता है.

इसलिए आए कलयुगी नारद 

गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान के रणनीतिकार मनोज ध्यानी ने बताया इस कार्यक्रम के बारे में बताया. यह माना गया कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के जो उत्तराखंडी शहीद हुए हैं वह नारद जी से अनुरोध करते हैं कि नारद जी देवभूमि उत्तराखंड में एक बार भ्रमण कर आएं जिसके लिए शहीदों ने अपने प्राण त्यागे और सर्वोच्च बलिदान किया था. शहीदों के अनुनय-विनय व अनुरोध पर नारद जी स्थिति जांचने के लिए उत्तराखंड राज्य में आते हैं.

कलयुगी नागद की ख़ास बात यह है कि वह नगद (नकद) नारायण के रूप में अवतरित हुए हैं क्योंकि कलयुग में सब कुछ नकद लेने व देने पर आधारित हो गई है. कलयुगी नगद नारायण की मुलाकात आदिबद्री धाम गैरसैंण में युवा नेता रघुवीर सिंह बिष्ट से होती है. रघुवीर बिष्ट उन्हें बताते हें कि गंगा जी के किनारे अब सुरा बनने लगी है, भांग उपजाया जा है और भ्रष्टाचार खूब फल-फूल रहा है. नगद नारद सोचते हैं कि वह बैकुंठ जाकर शहीदों और गढ़-कुमाऊं के वीर भड़ों को क्या और कैसे समझा पाएंगे? इसलिए वह मंडाण-जागर लगाकर सबको संयुक्त रूप से जगाने का फ़ैसला करते हैं.

garhwali mandan on gaisain, जागर में उत्तराखंड के कई वीरों का आवाहन किया गया था.
जागर में उत्तराखंड के कई वीरों का आवाहन किया गया था.


इनकी लगाई जागर 

नगद नारद मंडाण-जागर जगरियों के साथ मिलकर गाते हैं.  मंडाण-जागर में उत्तराखंड की महान विभूतियों तीलू रौतेली, वीर माधो सिंह भंडारी, गढ़वाल के वीर राजा अजय पाल, अहंकार का आवाहन किया गया. मंडाण-जागर में इन सभी ने प्रकट होकर राज्य व्यवस्था के हालात पर गहरी चिंता और रोष प्रकट किया.
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इसके बाद नारद नेर श्रीदेव सुमन, बाबा मोहन उत्तराखंडी, इंद्रमणि बडोनी, विपिन त्रिपाठी, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली, लोकगीतकार गिर्दा, शमशेर सिंह बिष्ट आदि गढ़वाल-कुमाऊं के वीरों का भी आवाहन किया. एक-एक कर सभी मंडाण-जागर में अवतरित हुए.



नाराज़गी  

माधो सिंह भंडारी इस बात पर नाराज़ दिखे कि देवभूमि में गंगा की तलहटी पर शराब बनने लगी है. वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को दर्द था कि समाज को जात-पात में बंटा जा रहा है, और मानव को मानव की दृष्टि से नहीं देखा जा रहा है. तीलू रौतेली उत्तराखंड की महिला शक्ति के हाथ बंधे रहने पर तीखा प्रहार करती है.

garhwali mandan on gaisain 3, जागर में नाचता एक युवक.
जागर में नाचता एक युवक.


शमशेर सिंह बिष्ट को यह डर सता रहा है कि उत्तराखंड शराब और नशे में डूबता जा रहा है. जनगीतकार गिर्दा संगीतकारों और जन सरोकारों के लिए क्रियाशील के द्वारा सामाजिक मुद्दों पर बनी मूक दर्शक बने रहने पर नाराजगी व्यक्त करते हैं. उत्तराखंड के सभी वीर भड़ों ने राज्य अवधारणा के अनुरूप राज्य की राजधानी गैरसैंण न बनने पर गहरी नाराजगी जताई.

ये थे साथी 

मंडाण-जागर कार्यक्रम में नारद मुनि कृष्णा बगोट के साथ थकुली बजाने में भानु प्रसाद भट्ट, डौंर बजाने में अनिल रावत और जागर कोरस गाने में आनंद प्रकाश जुयाल, संजय थपलियाल, लक्ष्मी प्रसाद थपलियाल, मनोज ध्यानी, रविन्द्र प्रधान, मदन भंडारी, सुशील कैंतुरा, जयनारायण बहुगुणा शामिल रहे.

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First published: October 7, 2019, 7:02 PM IST
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