इस बार कांवड़ लेने हरिद्वार में आए तो होना पड़ेगा 14 दिन क्वारंटाइन
Dehradun News in Hindi

इस बार कांवड़ लेने हरिद्वार में आए तो होना पड़ेगा 14 दिन क्वारंटाइन
उत्तराखंड समेत उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश की सरकारें कांवड़ यात्रा स्थगित करने का फैसला कर चुकी हैं. (file photo)

लॉकडाउन की वजह से कांवड़ यात्रा (Kanwad Yatra) इस बार स्थगित है. उत्तराखंड के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वे ज़िले हैं जहां से लाखों की संख्या में हर साल कांवड़िये हरिद्वार आते हैं.

  • Share this:
देहरादून. कोरोना वायरस के (COVID-19) संक्रमण का असर हर किसी की ज़िंदगी पर पड़ा है. क्या आम, क्या खास. कोरोना वायरस संक्रमण का असर धार्मिक क्रिया कलापों पर भी पड़ा है. उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन (Tourism) की रीढ़ कही जाने वाली चार धाम यात्रा (CharDham Yatra) इस साल नहीं हो पाई है, तो असर अब होने वाली कांवड़ यात्रा (Kanwad Yatra) पर भी पड़ा है. इसी को देखते हुए उत्तराखंड समेत उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश की सरकारें कांवड़ यात्रा स्थगित करने का फैसला कर चुकी हैं. लेकिन अगर फिर भी कोई कांवड़ लेकर आता है तो उसे 14 दिन क्वारंटाइन रहना होगा.

मुख्यमंत्रियों के बाद अफ़सरों में चर्चा 

कुछ दिन बाद सावन महीना शुरू होगा, जिसमें कांवड़ यात्रा होती है. हालांकि इस बार कांवड़ यात्रा स्थगित की जा चुकी है, लेकिन अगर किसी दूसरे राज्य से कोई कांवड़िया हरिद्वार आया तो उसे 14 दिन क्वारंटाइन होना पड़ेगा. मुख्यमंत्री स्तर की बैठक में इस पर सहमति बन चुकी है.



मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से बात कर चुके हैं. क्योंकि सबसे बड़ी संख्या में कांवड़िये यूपी और हरियाणा से ही उत्तराखंड आते हैं.
बुधवार को हरिद्वार के ज़िलाधिकारी ने उत्तराखंड-यूपी की सीमा से सटे ज़िलों के प्रशासन और पुलिस से बात की. इस बात पर चर्चा हुई कि कांवड़ लेकर आने वाले शिवभक्तों को कैसे समझाया जाए, कैसे उन्हें जानकारी दी जाए?

चुनौतीपूर्ण हैं हालात 

उत्तराखंड, यूपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वे ज़िले हैं जहां से लाखों की संख्या में कांवड़िये उत्तराखंड आते हैं. इन ज़िलों में मेरठ, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर शामिल हैं. कांवड़ के समय हुड़दंग की आशंका बनी रहती है और कांवड़ियों को नियंत्रित करना किसी भी प्रदेश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रहती है.

राज्य सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक का कहना है कि यह कोरोना के संकट का समय है और सभी राज्य सरकारों से इस मामले में बात हुई है. यह ऐसे हालात हैं जो सभी के लिए चुनौती हैं और इसलिए सभी राज्यों से बातचीत के बाद यह फैसला हुआ है कि इस बार परंपरागत तरीके से कांवड़ यात्रा नहीं होगी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज