विजय दिवस पर प्रशासन से नाराज़ दिखा ऋषिकेश के एकमात्र कारगिल शहीद का परिवार, जाने क्यों?

मनोज ने अपने सहयोगी नायब सूबेदार के साथ मिलकर छोटे भाई मनीष थापा की प्रतिमा की साफ़-सफ़ाई कर फूल-माला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

News18 Uttarakhand
Updated: July 26, 2019, 7:45 PM IST
विजय दिवस पर प्रशासन से नाराज़ दिखा ऋषिकेश के एकमात्र कारगिल शहीद का परिवार, जाने क्यों?
तीर्थनगरी ऋषिकेश के मनीष थापा कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले देश के जांबाज़ों में शामिल थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Updated: July 26, 2019, 7:45 PM IST
कारगिल विजय दिवस पर देश भर के साथ ही उत्तराखंड में भी सेना की विजय को उत्सवपूर्वक मनाया गया. सैनिकों की धरती माने जाने वाले उत्तराखंड में देहरादून समेत राज्य भर में शहीदों के श्रद्धांजलि देते हुए और विजय का जश्न मनाते हुए कार्यक्रम आयोजित किए गए. लेकिन इस सबके बीच अपने कई जवान बेटों को देश के लिए कुर्बान करने वाले ऋषिकेश में एक शहीद का परिवार जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से क्षुब्ध नज़र आया और अकेले ही जवान की शहादत को श्रद्धांजलि दी.

22 साल की उम्र में हो गए थे शहीद मनीष थापा 

तीर्थनगरी ऋषिकेश के मनीष थापा कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले देश के जांबाज़ों में शामिल थे. आज कारगिल विजय दिवस पर उनके बड़े भाई मनोज थापा ने बताया कि मनीष ब्रावो कंपनी, गोरखा राइफल्स की थर्ड बटालियन में राइफल मैन के पद पर तैनात थे. 9 नवम्बर, 1999 को जम्मू कश्मीर के तंगधार में मात्र 22 साल की अल्प आयु में वह शहीद हो गए थे.

दुखी मन से शहीद मनीष के बड़े भाई मनोज थापा कहते हैं कि कारगिल युद्ध में ऋषिकेश के एकमात्र शहीद मनीष थापा को उनके भाई व दोस्तों के अलावा श्रद्धांजलि देने कोई नहीं पहुंचा. मनोज ने अपने सहयोगी नायब सूबेदार के साथ मिलकर छोटे भाई मनीष थापा की प्रतिमा की साफ़-सफ़ाई कर फूल-माला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

सेना रखती है ख़्याल, प्रशासन नहीं 

उन्होंने स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के कारगिल शहीद की सुध न लेने पर दुख भी जताया.  उन्होंने बताया कि मनीष घर में सबसे छोटा था, जिसकी मौत की खबर सुनकर मां सदमे में आ गई और तब से बीमार है. सेना तो माता-पिता के इलाज का पूरा ध्यान रखती है लेकिन सरकार कोई सहयोग नहीं करती.

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First published: July 26, 2019, 7:40 PM IST
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