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Uttarakhand Politics: किशोर उपाध्याय ने BJP जॉइन की, कांग्रेस को कोसा, अब तक ऐसा रहा सियासी सफर

Uttarakhand Politics: किशोर उपाध्याय ने BJP जॉइन की, कांग्रेस को कोसा, अब तक ऐसा रहा सियासी सफर

किशोर उपाध्याय ने भाजपा जॉइन की.

किशोर उपाध्याय ने भाजपा जॉइन की.

Uttarakhand Election : उत्तराखंड चुनाव से ठीक पहले बड़ी खबर यह रही कि बुधवार को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव (Devendra Yadav) ने एक चिट्ठी लिखकर पूर्व पीसीसी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को पार्टी से बाहर का रास्ता (Congress Expelled Kishore Upadhyay) दिखा दिया था. उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया गया था. आज भाजपा का दामन थाम लेने के बाद उपाध्याय ने कांग्रेस के इन आरोपों (Kishore Upadhyay Statement) का जवाब भी दिया और सवाल भी खड़ा किया कि कांग्रेस का कदम कितना ठीक था, कितना नहीं!

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देहरादून. कांग्रेस से निष्कासित किए जाने के एक दिन बाद गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भाजपा का दामन थाम लिया. भाजपा के उत्तराखंड चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी की मौजूदगी में उपाध्याय बीजेपी में शामिल हुए. समाचार एजेंसी एएनआई ने उपाध्याय का एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि इस तरह के हालात बने ही क्यों! माना जा रहा है कि बीजेपी उपाध्याय को टिहरी से चुनाव मैदान में उतार सकती है हालांकि इस बारे में आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार किया जा रहा है.

भाजपा जॉइन करने के बाद उपाध्याय ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में ही उत्तराखंड का विकास हो सकता है. आरएसएस और बीजेपी ने टिहरी व उत्तरकाशी के विकास के लिए बहुत काम किया है. मैं प्रहलाद जोशी का आभारी हूं कि उन्होंने भाजपा में मुझे अवसर दिया. अब मैं एक नई भूमिका में दिखाई दूंगा.’ इसके अलावा, उपाध्याय ने कांग्रेस से निकाले जाने की वजह पर कहा कि भाजपा के साथ मेरी एक तस्वीर वायरल हुई, जिसका गलत मतलब निकालकर मेरे साथ कांग्रेस ने नाइंसाफी की.

एक नज़र में किशोर उपाध्याय का सियासी सफर
टिहरी गढ़वाल में 1958 में पीताम्बर दत्त उपाध्याय और एकादशी देवी के घर जन्मे किशोर पीएचडी की डिग्री रखते हैं. विधायक रह चुके उपाध्याय ने उत्तराखंड आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. गांधी परिवार के करीबी उत्तराखंडी नेता रहे उपाध्याय ने अमेठी में राजीव गांधी को चुनाव लड़ाने के लिए भी काम किया था. 2002 में पहली बार टिहरी सीट से विधायक चुने गए थे और एनडी तिवारी सरकार में औद्योगिक राज्य मंत्री बने थे.

2007 में लगातार दूसरी बार टिहरी से विधायक चुने गए लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में टिहरी सीट पर ही निर्दलीय दिनेश धनै से 377 मामूली मतों से चुनाव हार गए. 2017 के विधानसभा चुनाव में देहरादून जिले की सहसपुर सीट से अपनी किस्मत आज़माई लेकिन फिर हार गए. 2014 से 2017 तक उपाध्याय उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी रहे.

Tags: Uttarakhand Assembly Election, Uttarakhand politics

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