होम /न्यूज /उत्तराखंड /तो तीरथ की त्रासदी की कहानी में विलेन कौन रहा, COVID-19 या कुछ और?

तो तीरथ की त्रासदी की कहानी में विलेन कौन रहा, COVID-19 या कुछ और?

उत्तराखंड के सीएम पद से इस्तीफा देने वाले तीरथ सिंह रावत.

उत्तराखंड के सीएम पद से इस्तीफा देने वाले तीरथ सिंह रावत.

4 महीने से भी कम समय के लिए उत्तराखंड के सीएम रहे तीरथ सिंह रावत को क्यों और कैसे याद रखा जाना चाहिए? कैसे कोरोना संक्र ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली/देहरादून. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर तीरथ सिंह रावत के 115 दिनों के छोटे से कार्यकाल को इसलिए त्रासदी के तौर पर याद रखा जाएगा क्योंकि राज्य की शीर्ष कुर्सी पर उनका कभी नियंत्रण नहीं रहा और अजीब बयानों के साथ ही दुर्भाग्य भी पीछे लगा रहा. रावत का कार्यकाल इतना छोटा रहा कि न तो वह विधानसभा की सूरत देख पाए और न ही देहरादून स्थित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में शिफ्ट हो सके.

10 मार्च को जब रावत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, वह तभी से अपने निजी घर में ही रहे क्योंकि वह कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौर के चलते यह घोषणा कर चुके थे कि मुख्यमंत्री आवास को कोविड केयर सेंटर की तरह इस्तेमाल किया जाए. कोरोना का प्रकोप अपने उतार पर था, लेकिन इससे पहले कि वह आधिकारिक आवास में शिफ्ट हो पाते, मुख्यमंत्री की कुर्सी से ही उनके शिफ्ट होने की नौबत आन पड़ी.

Photo Story : विवादों में रहे 4 महीने के CM तीरथ सिंह रावत, इन बयानों से खूब हुई किरकिरी

पद की शपथ लेने के सिर्फ 12 दिनों बाद ही, खुद रावत 22 मार्च को कोविड संक्रमित हो गए थे और यही समय था, जो उनके लिए राजनीतिक तौर पर त्रासदी साबित हो रहा था. 23 मार्च को ही चुनाव आयोग ने सल्ट विधानसभा उपचुनाव का ऐलान किया. यह वही उपचुनाव था, जिसे केंद्र में रखकर भाजपा ने एक सांसद रहते हुए रावत को मुख्यमंत्री चुना था. लेकिन, हुआ यही कि कोविड के चलते अगले 14 दिनों के लिए रावत को सेल्फ आइसोलेशन में रहना पड़ा.

uttarakhand news, tirath singh rawat speech, tirath singh rawat controversy, tirath singh rawat video, उत्तराखंड न्यूज़, तीरथ सिंह रावत इस्तीफा, तीरथ सिंह रावत विवाद, तीरथ सिंह रावत भाषण
तीरथ सिंह रावत अपने अटपटे बयानों को लेकर कैसे विवादों में रहे, न्यूज़ 18 पर फोटो स्टोरी के तौर पर आप देख सकते हैं.


30 मार्च इस उपचुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख थी और रावत ने बाद में कहा कि अप्रैल के पहले हफ्ते तक आइसोलेशन के चलते ही वह यह उपचुनाव नहीं लड़ सके. इधर 4 अप्रैल को रावत की रिपोर्ट निगेटिव आई और उधर 17 अप्रैल को भाजपा ने सल्ट उपचुनाव आसानी से जीत भी लिया. इसके बाद, अप्रैल और जून में दो विधानसीटें खाली हुईं, लेकिन चूंकि राज्य के विधानसभा चुनाव में एक साल से कम ही समय रह गया था इसलिए नियमानुसार चुनाव आयोग को उपचुनाव करवाने की अनिवार्यता नहीं थी. इस वजह से भी रावत के लिए रास्ते और कठिन हो गए.

ये भी पढ़ें : मुख्यमंत्रियों का बार-बार बदलना उत्तराखंड की परंपरा, 21 सालों में राज्य ने देखे कितने सीएम?

फिर इस छोटे से कार्यकाल पर एक बड़ा संकट तब मंडराया, जब अप्रैल में राज्य में हुए कुंभ मेले के दौरान फर्जी कोविड टेस्ट संबंधी घोटाले की बात सामने आई. यही नहीं, कोरोना के कहर के दौरान कुंभ मेले का आयोजन ही पहले से आलोचना का विषय बन चुका था.

रावत का कार्यकाल इसलिए भी याद रखा जाएगा कि उन्होंने अजीबोगरीब बयान दिए, जो लोगों के बीच विवाद की वजह बनते चले गए. महिलाओं के रिप्ड जीन्स पहनने पर कमेंट करना, पीएम नरेंद्र मोदी को राम और कृष्ण का अवतार कह देना और सरकारी योजना में ज़्यादा राशन पाने के लिए लोगों को यह ताना देना कि ज़्यादा बच्चे क्यों पैदा नहीं किए... यह रावत के छोटे से कार्यकाल के बड़े पड़ाव रहे.

Tags: Tirath Singh Rawat, Uttarakhand corona, Uttarakhand news, Uttarakhand politics

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें